astitav

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doston ki dosti sai gaeron ki mahobbat taq
sab kuch milla hume bus do pyar bhare lafzo ki kammi hai

khushboo ke samandaar sai aasman ki hadoo taq
sab kuch milla hume bus do gaz jameen ki kammi hai




unka aasman pe honne ka bharam salamat rahe
hum ko apni ye do gaz jameen hi bahut azeez hai
 
ab aishe karoge to main sharma jaunga :D
fher sher to ke kutrru bhi naa likha jaa :)


Naa to ke ?? :p

We know we have a great 'original' 'non-copy paster' shayar here named V...... D...... ! :)

Kuch aur aane do issi baat pe.....
 
vry good......

100% sahi haan ye baat

kitne rishte nibhati haan ek Ladki

bt ajj time change ho gya haan dost...?

ladki kis bhi chiz me ladke se kum nahi....

meri 100% vote ladies Spcieal Tange ko
 
lafzo ki hi kyu talash rahi tumhe sada
kabhhi aankho ka kaha to samjh paate
aasman par baithane ka shauk tumhe hi tha
becharri jameen to hamesha se vahi thi


doston ki dosti sai gaeron ki mahobbat taq
sab kuch milla hume bus do pyar bhare lafzo ki kammi hai

khushboo ke samandaar sai aasman ki hadoo taq
sab kuch milla hume bus do gaz jameen ki kammi hai
 
प्यास

है कौन यहाँ जिसे प्यास नही है,
जीने की किसे आस नही है...

प्यास जहाँ हो चाहत की,
जिन्दा दफ़नाएं जाते है,
हर दिल में मुमताज की खातिर,
ताज़ बनाएं जाते है...
विरान है वो दिल जिसमे मुमताज नही है
है कौन यहाँ जिसे प्यास नही है,

प्यास जहाँ हो पिया मिलन की
वहाँ स्वप्न सजोंये जाते है
प्रियतम से मिलने की चाहत में
नैन बिछाये जाते है
प्यासे नैनो में आँसू की थाह नही है
है कौन यहाँ जिसे प्यास नही है

प्यास जहाँ हो बस जिस्म की
दामन पे दाग लगाये जाते है,
कुछ पल के सुख की खातिर
हर पल रूलाये जाते है
माटी के तन की बुझती प्यास नही है
है कौन यहाँ जिसे प्यास नही है

प्यास जहाँ हो दौलत की,
कत्ल खूब कराये जाते है,
अपने निज स्वार्थ की खातिर,
दिल निठारी बनाये जाते है...
खून बहा कर भी मिलती एक सांस नही है
है कौन यहाँ जिसे प्यास नही है,

प्यास जहाँ हो शौहरत की,
रिश्ते भुलाये जाते हैं,
एक नाम को पाने की खातिर,
हर नाम भुलाये जाते हैं
भाई से भाई लड़े रिश्तों में आँच नही है
है कौन यहाँ जिसे प्यास नही है

प्यास जहाँ हो वतन की,
वहाँ शीश नवाये जाते हैं,
धरती माँ के मान की खातिर,
सर कलम कराये जाते हैं
आज़ादी की रहती किसको आस नही है
है कौन यहाँ जिसे प्यास नही है

है कौन यहाँ जिसे प्यास नही है
जीने की किसे आस नही है॥
 
ऎ जिन्दगी तुझको अब मैने पुकारा नहीं
सारे जहाँ में तुझको कोई भी प्यारा नहीं

खो गई हूँ खुदी में,जब मिली खुद से मै
लेकिन लबो पर नाम भी अब तुम्हारा नहीं

छोड़ दे तनहा मुझको अब ना तड़पा मुझे
ऎसा नहीं कि तुझ बिन अब मेरा गुजारा नहीं

तेरी बेवफ़ाई कि तुझको, मै दूँ क्या खबर
मेरे दिल का एक टुकड़ा भी अब तुम्हारा नहीं

मेरी पलकों पे ठहरे अश्क न बहेंगे कभी
वेवजह मिट्टी मे मिलना इनको गवाँरा नहीं

मेरी खामोशियों को न बहला चली जा अभी
मेरी यादों का एक लम्हा भी अब तुम्हारा नहीं

जिन्दगी ख्वाब है ख्वाब बन मिली थी कभी
मेरी पलको को ख्वाबों का भी अब सहारा नहीं

तेरी चाहत नही,तुझसे कोई तमन्ना भी नहीं
तेरे गुलशन का कोई फ़ूल भी अब बेसहारा नहीं...
 
kyu ikhtiyar ho dusro pe mera
me khuda to nahi aakhir
assman se jab girre to jaana
ki kitne insan hi bus hum the
 
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