ravinderjeet
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एक बे एक जाट भाई बाबा बणग्या | हांडते - फिरते उह के २५-३० चेले बण गे | घणखरे रंडुए एर भंगेड़ी | एक बे सुखा पड़ग्या | एक जमींदार बाबा धोरे आया एर नु बोल्या अक बाबाजी किम्मे जुगाड़ भीडाओ,मींह का | मेरे दो किल्ले सें में तमने दो हजार दे दूंगा जा मींह करवा दे तो | बाबा ने सोची अक सिद्ध होवण का ईह तें बढ़िया और के मोका मिलेगा | वे किल्ले जोहड़ तें माड़ी सी दूर पड़ें थे | रात नु सारे चेले ला कें एर ऊह के दोनु किल्ले भरवा दिए | या बात सारे गाम में फेल गी एक बाबा ने चमत्कार कर दिया | आगले दिन एकी और जमींदार आ लिए अक बाबा जी मेरे पांच किल्ले सें में तन्ने १० हजार रपिये दूंगा ,मेरे किल्ल्यां में भी मींह करवा दे | ऊह का एक चेला सुणे था वो बोल्या " गुरु जी देख के ने हाँ भरियो काल रात की बादलाँ की देहि टूटी पड़ी स "|