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बाबा का जमाई
मग्घड़ मलंग खूब हट्टा-कट्टा था पर था निरा बावली-बूच । एक दिन एक रूंख (पेड़) की डाली पर बैठा था और उसी को कुल्हाड़े से काट रहा था । साथ वाले कच्चे रास्ते पर बाबा छोटूनाथ पैदल जा रहा था - दूसरे गांव की तरफ । बाबा ने पेड़ पर देखा और बोला – अरै बावळे, तू तै पड़ैगा नीचै ।
जरा सी देर में ही डाली टूट पड़ी और मग्घड़ भी नीचे गिर पड़ा । उसकी मदद के लिए बाबा छोटूनाथ उसके पास आया । मग्घड़ बाबा के पैर पकड़ कर बोला "बाबा, तू तै अंतर्यामी सै, न्यूं और बता दे अक मैं मरूंगा किस दिन ?"
बस मग्घड़ तो बाबा छोटूनाथ का चेला बन गया और उसके साथ ही दूसरे गांव में चला गया और बाबा के साथ ही उसकी कुटिया में रहने लग गया ।
बूढ़ा बाबा छोटूनाथ रोज थैला उठाकर गांव आता और घर-घर से आटा मांग कर ले जाता । मग्घड़ उसका कहना नहीं मानता था । जब भी बाबा उसको काम बताता तो वो टाल जाता - "बाबा, लोग मन्नैं भीख ना दें, तेरे बरगे बूढ़े आदमी नै भीख घणी मिल्लै सै" ।
एक दिन कई बुजुर्ग आदमी पौळी के बाहर बैठकर हुक्का पी रहे थे । बाबा को आता देखकर एक ताऊ ने बाबा से पूछा "अरै बाबा, तू बूढ़ा आदमी सै, रोज खुद क्यूं आवै सै - कदे आपणे चेले नै बी भेज दिया कर" ।
बाबा नै फट जवाब दिया - "चौधरी, वो मेरा चेला कोनी, मन्नैं भूल-तैं जमाई के कान पाड़ दिये" !!!
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बाबा का जमाई
मग्घड़ मलंग खूब हट्टा-कट्टा था पर था निरा बावली-बूच । एक दिन एक रूंख (पेड़) की डाली पर बैठा था और उसी को कुल्हाड़े से काट रहा था । साथ वाले कच्चे रास्ते पर बाबा छोटूनाथ पैदल जा रहा था - दूसरे गांव की तरफ । बाबा ने पेड़ पर देखा और बोला – अरै बावळे, तू तै पड़ैगा नीचै ।
जरा सी देर में ही डाली टूट पड़ी और मग्घड़ भी नीचे गिर पड़ा । उसकी मदद के लिए बाबा छोटूनाथ उसके पास आया । मग्घड़ बाबा के पैर पकड़ कर बोला "बाबा, तू तै अंतर्यामी सै, न्यूं और बता दे अक मैं मरूंगा किस दिन ?"
बस मग्घड़ तो बाबा छोटूनाथ का चेला बन गया और उसके साथ ही दूसरे गांव में चला गया और बाबा के साथ ही उसकी कुटिया में रहने लग गया ।
बूढ़ा बाबा छोटूनाथ रोज थैला उठाकर गांव आता और घर-घर से आटा मांग कर ले जाता । मग्घड़ उसका कहना नहीं मानता था । जब भी बाबा उसको काम बताता तो वो टाल जाता - "बाबा, लोग मन्नैं भीख ना दें, तेरे बरगे बूढ़े आदमी नै भीख घणी मिल्लै सै" ।
एक दिन कई बुजुर्ग आदमी पौळी के बाहर बैठकर हुक्का पी रहे थे । बाबा को आता देखकर एक ताऊ ने बाबा से पूछा "अरै बाबा, तू बूढ़ा आदमी सै, रोज खुद क्यूं आवै सै - कदे आपणे चेले नै बी भेज दिया कर" ।
बाबा नै फट जवाब दिया - "चौधरी, वो मेरा चेला कोनी, मन्नैं भूल-तैं जमाई के कान पाड़ दिये" !!!
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