ravindersura
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लिबेर्हन कमीशन ने 30 जून को बाबरी मस्जिद पर अपनी रिपोर्ट प्रधानमंत्री को सौंप दी | इस रिपोर्ट को पूरा करने में 17 वर्ष का समय व देश के 8 करोड़ रूपये खर्च हो गए | असल में ये बाबरी मस्जिद का मसला क्या हैं ये किसी को नहीं पता पर देश के कुछ चुनिन्दा नेता देश के भोले लोगो को अपने स्वार्थ के लिए गुमराह करते हैं | चौ.हवा सिंह सांगवान जी की लिखी किताब ' असली लुटेरे कौन ?' के अध्याय 7 में लेखक ने बाबरी मस्जिद के बारे में व ब्राह्मणों के पाखंडो के बारे में बहुत अच्छे से वर्णन किया हैं |
7. इस्लाम धर्म के पैगम्बर हजरत मुहम्मद की जाटों ने की रक्षा , ईशाई धर्म का किया सुधार और सिक्ख धर्म के रहे ताबेदार
' महात्मा बुद्ध ने जहाँ , धम्म का राग गाया |
मसीह ने जहाँ - जहाँ प्यार का पैगाम पहुचाया |
चिश्ती ने जिस चमन को अपना बतलाया |
नानक ने जिस ज़मीं पर वहदत का गीत गाया |
जाट का वतन वहीँ हैं , जाट का वतन वहीँ हैं | '
इसमें किसी प्रकार का संदेह नहीं हैं की सातवीं सदी तक जाट बौद्धधर्मी थे , क्योंकि उनके राजा भी बौद्धधर्मी थे | यह एक शोध का विषय हो सकता हैं की स्वयं महात्मा बुद्ध जाट जाति में पैदा हुए तथा भारतीये इतिहास लिखता हैं की वे क्षत्रिये वंश के शाक्य - गोत्री थे | जैन धर्म के 24वे तीर्थकार भगवान् महावीर स्वामी भी जाट क्षत्रिये जाति से थे | इसलिए इन इतिहासकारों का कर्तव्य बनता हैं की वे सिद्ध करे की वे किस जाति के थे ? हलाँकि ' जाट वीरों का इतिहास ' के लेखक कैप्टन दलीप सिंह अहलावत ने अपने ग्रन्थ में इन्हें जाट जाति का सिद्ध किया हैं | यह ऐतिहासिक तथ्य हैं की बौद्ध जाटों ने इस धर्म को संसार में फैलाया , जो आज लगभग 28 देशों में यह धर्म स्थापित हैं | लेकिन आज यह धर्म अपनी ही जन्मभूमि पर दम तोड़ रहा हैं | आज लोग इस बारे में बड़े खफा हैं की मुसलमानों ने हिन्दुओ के मंदिरों को क्यों तोड़ा , क्या मैं कट्टरवादी से पूछ सकता हु की उन बौद्धधर्मी जाटों के मठ किसने तोड़े ? यह बड़ा लम्बा इतिहास हैं की यह धर्म ब्राह्मणवाद का किस प्रकार शिकार हुआ | लेकिन संक्षेप में यह बतलाना आवश्यक हैं की कई इतिहासकारों ने ' हदीस ' के हवाले से लिखा हैं की जब हजरत मुहम्मद करबला से मक्का लौटने लगे तो उन्होंने अपनी सुरक्षा की मदद जाटों से ली थी तथा करबला के खजाने की जिम्मेवारी जाटों के सहारे छोड़ी थी | इमाम बुखारी ने अपनी पुस्तक ' किताबल अब्दुल मुफरद ' में लिखा हैं की जब पैगम्बर साहब की दूसरी बेगम आयशा बीमार पड़ी तो उसका इलाज एक जाट चिकित्सक ने किया था | पैगम्बर साहब ने अरब की रक्षा के लिए जाटों को ' अन्तकिया ' क्षेत्र में बसाया था | अरब में जाटों को ' जट्ट या जत ' नाम से पुकारा जाता हैं | ' rise of islam ' अंग्रेजी की पुस्तक में यूरोपियन इतिहासकार मण्डली लिखती हैं की दसवीं सदी में अरब व मध्य एशिया में ईसाई धर्म के प्रचारक पोप अपने प्रचार में लगे थे , लेकिन ये भ्रष्टाचारी हो गए थे , जिस कारण जाटों ने इन्हें वापिस यूरोप में धकेल दिया | बौद्ध ग्रन्थ ' अभियान जातक ' में जाटों के समुंद्री बेडे का विस्तार से वर्णन मिलता हैं | मध्य एशिया में सबसे पहले इस्लाम धर्म अपनाने वाला जाट राजा गजन खान था जो एक बौद्ध नाम था | यही खान शब्द इस्लाम में लोकप्रिय बना जिसने पठानों को बड़ी शौहरत दिलवाई | इस इतिहास की सम्पूर्ण जानकारी ' Jats - The Ancient Rulers " में भी दी गई हैं |
लेकिन बड़े अफ़सोस से लिखना पड़ रहा हैं की मैंने स्वयं 31 अक्तूबर 1990 को प्रातः देखा जब बाबरी मस्जिद तोड़ने गए हजारों लोगो को अयोध्या के सरयू नदी के पुल से गिरफ्तार किया गाया तो उनमे जाटों के लड़के भी थे | जाट तो शिवालय , बौद्ध मठ , मस्जिद , गिरजाघर व गुरूद्वारे आदि बनानेवाले थे , तोड़ने वाले कैसे हो गए ? जाटों को नहीं भूलना चाहिए की आज जो कट्टर हिन्दुपंथी मस्जिदों को तोड़ने की बात कर रहें हैं उन्ही के पूर्वजों ने कभी मंदिरों को लुटवाया और तुड़वाया था | गजनी व बाबर के सेनापति रेमिदास और तिलक इन्ही के पूर्वज थे |
contd.............
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7. इस्लाम धर्म के पैगम्बर हजरत मुहम्मद की जाटों ने की रक्षा , ईशाई धर्म का किया सुधार और सिक्ख धर्म के रहे ताबेदार
' महात्मा बुद्ध ने जहाँ , धम्म का राग गाया |
मसीह ने जहाँ - जहाँ प्यार का पैगाम पहुचाया |
चिश्ती ने जिस चमन को अपना बतलाया |
नानक ने जिस ज़मीं पर वहदत का गीत गाया |
जाट का वतन वहीँ हैं , जाट का वतन वहीँ हैं | '
इसमें किसी प्रकार का संदेह नहीं हैं की सातवीं सदी तक जाट बौद्धधर्मी थे , क्योंकि उनके राजा भी बौद्धधर्मी थे | यह एक शोध का विषय हो सकता हैं की स्वयं महात्मा बुद्ध जाट जाति में पैदा हुए तथा भारतीये इतिहास लिखता हैं की वे क्षत्रिये वंश के शाक्य - गोत्री थे | जैन धर्म के 24वे तीर्थकार भगवान् महावीर स्वामी भी जाट क्षत्रिये जाति से थे | इसलिए इन इतिहासकारों का कर्तव्य बनता हैं की वे सिद्ध करे की वे किस जाति के थे ? हलाँकि ' जाट वीरों का इतिहास ' के लेखक कैप्टन दलीप सिंह अहलावत ने अपने ग्रन्थ में इन्हें जाट जाति का सिद्ध किया हैं | यह ऐतिहासिक तथ्य हैं की बौद्ध जाटों ने इस धर्म को संसार में फैलाया , जो आज लगभग 28 देशों में यह धर्म स्थापित हैं | लेकिन आज यह धर्म अपनी ही जन्मभूमि पर दम तोड़ रहा हैं | आज लोग इस बारे में बड़े खफा हैं की मुसलमानों ने हिन्दुओ के मंदिरों को क्यों तोड़ा , क्या मैं कट्टरवादी से पूछ सकता हु की उन बौद्धधर्मी जाटों के मठ किसने तोड़े ? यह बड़ा लम्बा इतिहास हैं की यह धर्म ब्राह्मणवाद का किस प्रकार शिकार हुआ | लेकिन संक्षेप में यह बतलाना आवश्यक हैं की कई इतिहासकारों ने ' हदीस ' के हवाले से लिखा हैं की जब हजरत मुहम्मद करबला से मक्का लौटने लगे तो उन्होंने अपनी सुरक्षा की मदद जाटों से ली थी तथा करबला के खजाने की जिम्मेवारी जाटों के सहारे छोड़ी थी | इमाम बुखारी ने अपनी पुस्तक ' किताबल अब्दुल मुफरद ' में लिखा हैं की जब पैगम्बर साहब की दूसरी बेगम आयशा बीमार पड़ी तो उसका इलाज एक जाट चिकित्सक ने किया था | पैगम्बर साहब ने अरब की रक्षा के लिए जाटों को ' अन्तकिया ' क्षेत्र में बसाया था | अरब में जाटों को ' जट्ट या जत ' नाम से पुकारा जाता हैं | ' rise of islam ' अंग्रेजी की पुस्तक में यूरोपियन इतिहासकार मण्डली लिखती हैं की दसवीं सदी में अरब व मध्य एशिया में ईसाई धर्म के प्रचारक पोप अपने प्रचार में लगे थे , लेकिन ये भ्रष्टाचारी हो गए थे , जिस कारण जाटों ने इन्हें वापिस यूरोप में धकेल दिया | बौद्ध ग्रन्थ ' अभियान जातक ' में जाटों के समुंद्री बेडे का विस्तार से वर्णन मिलता हैं | मध्य एशिया में सबसे पहले इस्लाम धर्म अपनाने वाला जाट राजा गजन खान था जो एक बौद्ध नाम था | यही खान शब्द इस्लाम में लोकप्रिय बना जिसने पठानों को बड़ी शौहरत दिलवाई | इस इतिहास की सम्पूर्ण जानकारी ' Jats - The Ancient Rulers " में भी दी गई हैं |
लेकिन बड़े अफ़सोस से लिखना पड़ रहा हैं की मैंने स्वयं 31 अक्तूबर 1990 को प्रातः देखा जब बाबरी मस्जिद तोड़ने गए हजारों लोगो को अयोध्या के सरयू नदी के पुल से गिरफ्तार किया गाया तो उनमे जाटों के लड़के भी थे | जाट तो शिवालय , बौद्ध मठ , मस्जिद , गिरजाघर व गुरूद्वारे आदि बनानेवाले थे , तोड़ने वाले कैसे हो गए ? जाटों को नहीं भूलना चाहिए की आज जो कट्टर हिन्दुपंथी मस्जिदों को तोड़ने की बात कर रहें हैं उन्ही के पूर्वजों ने कभी मंदिरों को लुटवाया और तुड़वाया था | गजनी व बाबर के सेनापति रेमिदास और तिलक इन्ही के पूर्वज थे |
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