H
hoodarajesh
Guest
तीन जाट थे . तीनु सगे भाई थे . बड्डा ब्याह राखा था . रोटी तडके साँझ उनकी माँ
घाल कै दिया करती उन नै . और रोटिया पै घणा घी धर कै दिया करती .
एक दिन उनकी माँ उनके मामा कै चली गई . बड़े की बहु का नंबर आगा
रोटी देन का . उसने घी रोटिया की पापडी तले घाल कै दे दिया .
तीनो रोटी खान बैठ गे . एब घी कही नजर ना आया .
उन मैं तै एक जना बोला - भाई माँ तो माँ ऐ हो सै .
दूसरा बोला -- हाँ भाई माँ तो माँ ऐ हो सै . हामने कितना घी घाल कै दिया करती .
तीसरे नै वा रोटी की पापडी पाड़ ली . और उतना ऐ घी मिल गया उसके निचे .
फेर बोल्या - ना भाई बहु भी माँ ऐ हो सै .;
घाल कै दिया करती उन नै . और रोटिया पै घणा घी धर कै दिया करती .
एक दिन उनकी माँ उनके मामा कै चली गई . बड़े की बहु का नंबर आगा
रोटी देन का . उसने घी रोटिया की पापडी तले घाल कै दे दिया .
तीनो रोटी खान बैठ गे . एब घी कही नजर ना आया .
उन मैं तै एक जना बोला - भाई माँ तो माँ ऐ हो सै .
दूसरा बोला -- हाँ भाई माँ तो माँ ऐ हो सै . हामने कितना घी घाल कै दिया करती .
तीसरे नै वा रोटी की पापडी पाड़ ली . और उतना ऐ घी मिल गया उसके निचे .
फेर बोल्या - ना भाई बहु भी माँ ऐ हो सै .;