Bhaan- bhaai

ravinderjeet

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एक बे घुशु का बाबु उह ने छोरी दीखान ले ग्या | मादी वार पाछे उनके घरके बोले अक छोरा छोरी ने आपस में बत्लानं दयो |घुशु ----(खंगार के ने ) आँ बेबे ,तम के भाई भाण सो ?
छोरी --- इब्ब ताहीं ते एक भाई अर एक भाण थे ,पर इब्ब तेरे आयें पाछे दो भाई हो गे |
 
यह तो वही बात हो गई । एक सरदारों के कुनबे में दो भाई थे और एक बहन ।

एक दिन किसी ने बड़े भाई से पूछ लिया कि आपके कितने भाई हैं । उसने बताया - मेरा एक भाई है ।

अगले दिन उसकी बहन से किसी ने पूछ लिया कि तुम्हारे कितने भाई हैं । उसने कहा - मेरे दो भाई हैं ।

यह सुन कर सरदार जी चक्कर में पड़ गया । उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि अगर मेरी बहन के दो भाई हैं तो फिर मेरा एक ही भाई क्यों है, दूसरा कहां गया ?


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यह तो वही बात हो गई । एक सरदारों के कुनबे में दो भाई थे और एक बहन ।

एक दिन किसी ने बड़े भाई से पूछ लिया कि आपके कितने भाई हैं । उसने बताया - मेरा एक भाई है ।

अगले दिन उसकी बहन से किसी ने पूछ लिया कि तुम्हारे कितने भाई हैं । उसने कहा - मेरे दो भाई हैं ।

यह सुन कर सरदार जी चक्कर में पड़ गया । उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि अगर मेरी बहन के दो भाई हैं तो फिर मेरा एक ही भाई क्यों है, दूसरा कहां गया ?


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deshwal saab aap ne ravinder bhai ko bhi peeche chod diya..... good one ..
 
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अब होली का टाइम है । एक पुराना चुटकला इसी धागे में पोस्ट कर देता हूँ ।

ताई फागुन में मस्ता रही थी, घाघरी पहन कर रिहर्सल कर रही थी । छोरियां तैं बोल्ली - आज सांझ नैं मैं रींछ बण-कै दिखाऊंगी ।

ताऊ नै सुण लिया अर रूक्का मार कै बोल्या - रींछ क्यूं, तू भैंस क्यूं ना बण ज्याती, दो सेर डोक्के तै दे देगी !!


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हा हा हा हा हा हा ,ताऊ भी सारी हाण चुलक्न की सोचें जावे था |​
 
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अब होली का टाइम है । एक पुराना चुटकला इसी धागे में पोस्ट कर देता हूँ ।

ताई फागुन में मस्ता रही थी, घाघरी पहन कर रिहर्सल कर रही थी । छोरियां तैं बोल्ली - आज सांझ नैं मैं रींछ बण-कै दिखाऊंगी ।

ताऊ नै सुण लिया अर रूक्का मार कै बोल्या - रींछ क्यूं, तू भैंस क्यूं ना बण ज्याती, दो सेर डोक्के तै दे देगी !!


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hahahaha,,, andyyy...........!!!!

es te nue bera laage hai ak puraane budhe kitne opportunistic ar optimistic hoya karde...koi b situation ho aapna fyda soch liya karde...!!!
 
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अब होली का टाइम है । एक पुराना चुटकला इसी धागे में पोस्ट कर देता हूँ ।

ताई फागुन में मस्ता रही थी, घाघरी पहन कर रिहर्सल कर रही थी । छोरियां तैं बोल्ली - आज सांझ नैं मैं रींछ बण-कै दिखाऊंगी ।

ताऊ नै सुण लिया अर रूक्का मार कै बोल्या - रींछ क्यूं, तू भैंस क्यूं ना बण ज्याती, दो सेर डोक्के तै दे देगी !!


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बहुत बढ़िया .... होल्ली के मौके का मस्त चुटकला छाप दिया देसवाल साहब ने |||
 
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अब होली का टाइम है । एक पुराना चुटकला इसी धागे में पोस्ट कर देता हूँ ।

ताई फागुन में मस्ता रही थी, घाघरी पहन कर रिहर्सल कर रही थी । छोरियां तैं बोल्ली - आज सांझ नैं मैं रींछ बण-कै दिखाऊंगी ।

ताऊ नै सुण लिया अर रूक्का मार कै बोल्या - रींछ क्यूं, तू भैंस क्यूं ना बण ज्याती, दो सेर डोक्के तै दे देगी !!


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Deshwal saab .. holi ki mubarkannn........or ek no ka joke tha........
 
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होली

अंग्रेजों का टाइम था । उस समय संचार के साधन कम थे, चिट्ठी लिखकर ही संदेश भेजे जाते थे ।

एक अंग्रेज अफसर भारत में कई साल से काम कर रहा था । उसने अपने एक रिश्तेदार को (लंदन में) चिट्ठी लिखी -


भारत में एक साल में एक खास दिन होता है जब सब लोग पागल हो जाते हैं । वह दिन मार्च के महीने में पड़ता है और उस दिन को यहां के लोग होली कहते हैं !



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अब होली का टाइम है । एक पुराना चुटकला इसी धागे में पोस्ट कर देता हूँ ।

ताई फागुन में मस्ता रही थी, घाघरी पहन कर रिहर्सल कर रही थी । छोरियां तैं बोल्ली - आज सांझ नैं मैं रींछ बण-कै दिखाऊंगी ।

ताऊ नै सुण लिया अर रूक्का मार कै बोल्या - रींछ क्यूं, तू भैंस क्यूं ना बण ज्याती, दो सेर डोक्के तै दे देगी !!


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nostalgic...........
 
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