ravindersura
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भारत रत्न की बंदर बाँट
हमारे देश मे 6000 के करीब जातिया हैं | प्रत्येक जाति की इस देश के निर्माण व तरक्की मे ना कुछ अहम भूमिका रही हैं | परंतु जब अब तक दिये गए भारत रत्न की फेहरिस्त पर नजर डालता हूँ तो ऐसा लगता हैं की इस देश के निर्माण मे सिर्फ ब्राह्मण , कायस्थ का ही सबसे ज्यादा योगदान हैं इसलिए सबसे ज्यादा भारत रत्न का सम्मान इन जाति के लोगो को मिला हैं | और अब हाल मे भी इस रत्न के लिए पंडित वाजपाई का नाम सबसे ज्यादा उछला गया मतलब उनको इस सम्मान से नवाजने के लिए भूमिका तैयार की गई | इनके लोगो को सम्मान देने की वकालत करने के लिए लोग भी बहुत हैं परंतु हमारे लोगो के लिए वकालत करने वाला भी कोई नहीं | हमारे लोगो को तो खुद ही कहना पड़ता हैं की मैं भी इस सम्मान का हकदार हूँ , मैंने भी इस देश के लिए कुछ करके दिखाया हैं , जैसे बलबीर सिंह सीनियर जी को खुद ही कहना पड़ा | इन लोगो का अपने किसी आदमी को सम्मान देने की वकालत का तरीका भी बड़ा जबर्दस्त हैं | ये लोग अपने ही उस आदमी का विरोध करेंगे जिसको पहले ये सम्मान मिल चुका होता हैं की इसको यह सम्मान किस लिए दिया गया ? इसने ऐसा क्या किया ? और फिर धीरे से अपने ही किसी नए आदमी का नाम आगे कर देंगे | यह लोग जिसका विरोध कर रहे होते हैं उसके लिए यह कभी नहीं कहते की उसका सम्मान वापिस लिया जाये | हमारे लोग इनके विरोध से ही खुश हो लेते हैं की देखा ये लोग जातिवादी नहीं हैं यदि होते तो अपने का ही विरोध नहीं करते |
इन स्वर्ण जाति के लोगो की आबादी देश मे 12% के करीब हैं और ये 12% लोग हम 88% लोगो के कानो मे राष्ट्रवाद की फूँक मार देते हैं और फिर हम इनके शंख की तरह बजते रहते हैं | यह हाल सिर्फ इस भारत रत्न का ही नहीं हैं , कहीं भी नजर मार के देख लो मलाई खाने वाली जगह सबसे ज्यादा ये लोग ही मिलेंगे | यदि हम इसके लिए आवाज़ उठाए तो हमारे ही कुछ लोग जो इनके शंख बने हुए हैं हम पर जातिवाद फैलाने का आरोप लगा देते हैं |
हमारे देश मे 6000 के करीब जातिया हैं | प्रत्येक जाति की इस देश के निर्माण व तरक्की मे ना कुछ अहम भूमिका रही हैं | परंतु जब अब तक दिये गए भारत रत्न की फेहरिस्त पर नजर डालता हूँ तो ऐसा लगता हैं की इस देश के निर्माण मे सिर्फ ब्राह्मण , कायस्थ का ही सबसे ज्यादा योगदान हैं इसलिए सबसे ज्यादा भारत रत्न का सम्मान इन जाति के लोगो को मिला हैं | और अब हाल मे भी इस रत्न के लिए पंडित वाजपाई का नाम सबसे ज्यादा उछला गया मतलब उनको इस सम्मान से नवाजने के लिए भूमिका तैयार की गई | इनके लोगो को सम्मान देने की वकालत करने के लिए लोग भी बहुत हैं परंतु हमारे लोगो के लिए वकालत करने वाला भी कोई नहीं | हमारे लोगो को तो खुद ही कहना पड़ता हैं की मैं भी इस सम्मान का हकदार हूँ , मैंने भी इस देश के लिए कुछ करके दिखाया हैं , जैसे बलबीर सिंह सीनियर जी को खुद ही कहना पड़ा | इन लोगो का अपने किसी आदमी को सम्मान देने की वकालत का तरीका भी बड़ा जबर्दस्त हैं | ये लोग अपने ही उस आदमी का विरोध करेंगे जिसको पहले ये सम्मान मिल चुका होता हैं की इसको यह सम्मान किस लिए दिया गया ? इसने ऐसा क्या किया ? और फिर धीरे से अपने ही किसी नए आदमी का नाम आगे कर देंगे | यह लोग जिसका विरोध कर रहे होते हैं उसके लिए यह कभी नहीं कहते की उसका सम्मान वापिस लिया जाये | हमारे लोग इनके विरोध से ही खुश हो लेते हैं की देखा ये लोग जातिवादी नहीं हैं यदि होते तो अपने का ही विरोध नहीं करते |
इन स्वर्ण जाति के लोगो की आबादी देश मे 12% के करीब हैं और ये 12% लोग हम 88% लोगो के कानो मे राष्ट्रवाद की फूँक मार देते हैं और फिर हम इनके शंख की तरह बजते रहते हैं | यह हाल सिर्फ इस भारत रत्न का ही नहीं हैं , कहीं भी नजर मार के देख लो मलाई खाने वाली जगह सबसे ज्यादा ये लोग ही मिलेंगे | यदि हम इसके लिए आवाज़ उठाए तो हमारे ही कुछ लोग जो इनके शंख बने हुए हैं हम पर जातिवाद फैलाने का आरोप लगा देते हैं |