बिश्नोई एक धार्मिक पंथ हे , ये कोई जाती नहीं हे । जब गुरु जम्भेश्वर ने ये पंथ चलाया तो जाट और राजपूत ही इसमें शामिल हुए थे । जेसा की सर्वविदित हे राजपूत भी जट्टों में से ही बने थे । सिख भी एक पंथ हे , पर शादी आपस में करते हैं मोने या जिनको आजकल हिन्दू जाट कहने लगे हैं । आजादी के आस्पास तक मुले जट्टों में शादियाँ हो जाती थी । आजकल कट्टरवाद थोड़ा बढ़ गया हे । पहले जाट चाहे वह हिन्दू हों, सिख हों, बिश्नोई हों, या मुस्लमान हों ,जाट धर्म को सब मानते थे । और आपस में रिश्ते भी करते थे ।त्यागी भी जट्टों में से ही बने हुए हैं ,पर ये अपने आप के भाम्ण बताने लग गए हैं आजकल ।