Challenges and Chances before AAP

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कुम्हार की कुम्हारी पर तो पार बसाये ना, जा के गधे के कान मरोड़ने लग जाए:

कुछ ऐसा ही दिल्ली में "आप" की सरकार के साथ हो रहा है| सेंट्रल गवर्नमेंट से फुल्ली या partially पुलिस का कण्ट्रोल लेने को उनपे तो बरसते नहीं, दो दिन घेर के खड़े रहे बेचारी पुलिस को| अब पुलिस तो अपने मालिक के कहे अनुसार ही चलेगी ना, इतनी सी बात तो मेरे गांव का गड़रिया और भैंसों का पाली तक जानता है, पर इन "आप" वालों को पता नहीं क्यों समझ नहीं आती|

पुलिस का क्या है वो आज सेंट्रल गवर्नमेंट के तहत है तो सेण्टर की ड्यूटी बजाती है, कल दिल्ली सरकार के तहत होगी तो इनकी बजाएगी, फिर भी पता नहीं राजनीती की आइटम गर्ल बन चुकी इस "आप" को ये बात क्यों नहीं समझ आती, बस लेती है और फ़िल्म जहां पे कमजोर पड़ने लगती है, लग जाती है आइटम नंबर पे नाचने|

अब दिल्ली पुलिस को इंटरनेशनल लेवल पर भी इतनी तारीफ़ मिली है तो क्या वो बिना अपनी ड्यूटी किये मिल गई? उम्मीद करता हूँ कि आप और आप वाले इस बात को जानते होंगे कि दिल्ली पुलिस विश्व की मानी हुई आदरणीय पुलिस यूनिटों में आती है| आप वाले तो ये समझते हैं कि जैसे

  1. दिल्ली की पुलिस की कार्यप्रणाली है के बिना ही आज 1 भी गाड़ी पर काली फ़िल्मे नही,
  2. दिल्ली पुलिस की सख्ती के बिना ही आज लोग बेल्ट लगाकर गाड़िया चलाते है..
  3. इनकी पैनी निगरानी हुए बिना ही चलती गाड़ी मे लोग फोन पर बात करने से कतराते हैं...
  4. इनकी मुस्तैदी के बिना ही रेड लाइट पर हरी बत्ती होने पर ही गाड़ी चलाते हैं...
जनाब क्या हुआ जो दिल्ली के अधिकतर पुलिस वाले हरियाणा की किसान जातियों से आते हैं तो, क्या उनको ऐसे निशाने पे रखना अच्छी बात है? एक-एक किसान परिवार अपने बच्चे को देश-भक्ति पढ़ा के बड़ा करके पुलिस में भेजता है तो आप जैसों की अंधी गुर्राहट सुनने को नहीं|

आपको यह गुर्राहट जिसपे दिखानी चाहिए उनपे तो दिखाते नहीं, हो जाते हैं पुलिस को घेर के खड़े हर दूसरे दिन|

समझ में तो मुझे यह नहीं आता कि अरविन्द केजरीवाल के वो भाषण जो ये अक्सर अपनी ललित वाक्पटुता भुझाने को मुख-मंडल पर श्रृंगारे रहते हैं और मंत्रियों-नेताओं पर ही पुलिस को तंग करने का इल्जाम धरते बोले जाते हैं कि एक-एक पुलिस वाले को ऊपर मंत्रियों तक को भत्ता देना होता है तो वो रिश्वत मांगते हैं| तो जनाब क्या आपको वो ऊपर से भत्ता देने का दबाव सबसे पहले ख़त्म नहीं करवाना चाहिए? इससे भी पहले कि दिल्ली पुलिस सेण्टर के तहत रहेगी या दिल्ली सरकार के, नहीं? या आपने आके दिल्ली सरकार को कोई ख़ास ट्रैनिंग या सीख दिलवा दी, उनपे तेल-पानी ले के चढ़ने से पहले, कि आपको हम ये राहत दिलवाते हैं, अब आप ऐसे-ऐसे करेंगे?

अगर "आप" ने पुलिस को उपर्लिखित किसी भी दबाव से मुक्त करवाने को कोई कदम उठाया हो तो, लेकिन नहीं बस पहले से ही दबाव में काम कर रही पुलिस को और मार दो दबा-दबा के? मतलब जो समस्या की मूल जड़ है उनसे तो मोर्चा लेना नहीं, बस बैठ गए "बीटिंग अराउंड थे बुश करने को", यानि कुम्हार की कुम्हारी पे तो पार बसाये न जा के गधे के कान लगे मरोड़ने| - Phool Kumar Malik
 
from fb:

जो लोग केजरीवाल के बहकावे में आकर दिल्ली पुलिस को ही गलत समझ रहे हैं कृपया वो लोग ध्यान दे...

अभी अभी इंडिया न्यूज़ पर एक वरिष्ठ वकील ने ये खुलासा किया है कि जिस युगांडा की महिलाओं के साथ बत्तमीजी के आरोपी मंत्री "सोमनाथ भारती" को बचाने के लिए केजरीवाल जी दिल्ली पुलिस पर ही आरोप लगा रहे हैं और धरना प्रदर्शन कर रहे हैं वो मंत्री उन युगांडा की महिलाओं के घर के पास ही रहता है और उन महिलाओं से उसकी २००६ से एक मामले में मुकद्दमेबाजी चल रही है |

मंत्री बनने के बाद उसने अपने पद का इस्तमाल उन महिलाओं को सेक्स और ड्रग्स के झूठे आरोप में फंसाने में करने का प्रयास किया जिसे दिल्ली पुलिस की सूझबूझ ने होने नहीं दिया |

सर, आपकी बात तो बिलकुल सही है i दिल्ली पुलिस के गऊ जैसे सीधे सादे और ईमानदार लोगों पर ज़ुल्म ढाया जा रहा है i इन बिचारे मासूम लोगों पर रिश्वतखोरी,भ्रष्टाचार और नाफरमानी का आरोप लगाने से पहले लोगों की जुबान पर छाले क्यों नहीं पड़ जाते i कलयुग आग्या मालिक साहब, भले आदमियों का तो जीना ही मुहाल हो गया है i इतना ही नहीं, इन पापियों ने अफ्रीकन अबलाओं की आबरू को भी नहीं बक्शा i इन बिचारियों ने थोड़ी बहुत घाट-बाध कर दी तो के ज़ुल्म होग्या i उनकी लाइफ, उनका शरीर, वे चाहे कुछ भी करें, किसी को क्या हक़ है टोका-टोकी का i उनका अपना शरीर भाई, वे जैसे चाहे उसका प्रयोग करें i ये तो मानव अधिकारों का खुला उल्लंघन है i इन लोगों की बदमाशी यहीं ख़त्म नहीं हुई i इन्होने नशीले पदार्थ बेच कर मुश्किल से गुजारा करने वाले गरीब व्यापारियों के पेट पर भी दुलत्ती मारने का जघन्य अपराध किया है जो संविधान की धारा के खिलाफ है i भोत बड़ा ज़ुल्म हो रह्या सै भाई जी देश मै i पर सर, आप न्यू अपना खून फूकते रहोगे तो चुनाव तक आपका हीमोग्लोबिन 5 तक पहुँच ज्यागा i सर, थोड़े दिन दिमाग और कंप्यूटर नै आराम दे दयोगे तो इसमें आपका भी भला और कम्पूटर की भी सेहत ठीक रहगी, बाकी आपकी मर्ज़ी i जिस स्पीड तैं काम कर रहे सो, उस से तो दिमाग और कम्पूटर दोनों की हार्ड ड्राइव क्रैश हो ज्यागी i
 
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कुम्हार की कुम्हारी पर तो पार बसाये ना, जा के गधे के कान मरोड़ने लग जाए:

कुछ ऐसा ही दिल्ली में "आप" की सरकार के साथ हो रहा है| सेंट्रल गवर्नमेंट से फुल्ली या partially पुलिस का कण्ट्रोल लेने को उनपे तो बरसते नहीं, दो दिन घेर के खड़े रहे बेचारी पुलिस को| अब पुलिस तो अपने मालिक के कहे अनुसार ही चलेगी ना, इतनी सी बात तो मेरे गांव का गड़रिया और भैंसों का पाली तक जानता है, पर इन "आप" वालों को पता नहीं क्यों समझ नहीं आती|

पुलिस का क्या है वो आज सेंट्रल गवर्नमेंट के तहत है तो सेण्टर की ड्यूटी बजाती है, कल दिल्ली सरकार के तहत होगी तो इनकी बजाएगी, फिर भी पता नहीं राजनीती की आइटम गर्ल बन चुकी इस "आप" को ये बात क्यों नहीं समझ आती, बस लेती है और फ़िल्म जहां पे कमजोर पड़ने लगती है, लग जाती है आइटम नंबर पे नाचने|

अब दिल्ली पुलिस को इंटरनेशनल लेवल पर भी इतनी तारीफ़ मिली है तो क्या वो बिना अपनी ड्यूटी किये मिल गई? उम्मीद करता हूँ कि आप और आप वाले इस बात को जानते होंगे कि दिल्ली पुलिस विश्व की मानी हुई आदरणीय पुलिस यूनिटों में आती है| आप वाले तो ये समझते हैं कि जैसे

  1. दिल्ली की पुलिस की कार्यप्रणाली है के बिना ही आज 1 भी गाड़ी पर काली फ़िल्मे नही,
  2. दिल्ली पुलिस की सख्ती के बिना ही आज लोग बेल्ट लगाकर गाड़िया चलाते है..
  3. इनकी पैनी निगरानी हुए बिना ही चलती गाड़ी मे लोग फोन पर बात करने से कतराते हैं...
  4. इनकी मुस्तैदी के बिना ही रेड लाइट पर हरी बत्ती होने पर ही गाड़ी चलाते हैं...
जनाब क्या हुआ जो दिल्ली के अधिकतर पुलिस वाले हरियाणा की किसान जातियों से आते हैं तो, क्या उनको ऐसे निशाने पे रखना अच्छी बात है? एक-एक किसान परिवार अपने बच्चे को देश-भक्ति पढ़ा के बड़ा करके पुलिस में भेजता है तो आप जैसों की अंधी गुर्राहट सुनने को नहीं|

आपको यह गुर्राहट जिसपे दिखानी चाहिए उनपे तो दिखाते नहीं, हो जाते हैं पुलिस को घेर के खड़े हर दूसरे दिन|

समझ में तो मुझे यह नहीं आता कि अरविन्द केजरीवाल के वो भाषण जो ये अक्सर अपनी ललित वाक्पटुता भुझाने को मुख-मंडल पर श्रृंगारे रहते हैं और मंत्रियों-नेताओं पर ही पुलिस को तंग करने का इल्जाम धरते बोले जाते हैं कि एक-एक पुलिस वाले को ऊपर मंत्रियों तक को भत्ता देना होता है तो वो रिश्वत मांगते हैं| तो जनाब क्या आपको वो ऊपर से भत्ता देने का दबाव सबसे पहले ख़त्म नहीं करवाना चाहिए? इससे भी पहले कि दिल्ली पुलिस सेण्टर के तहत रहेगी या दिल्ली सरकार के, नहीं? या आपने आके दिल्ली सरकार को कोई ख़ास ट्रैनिंग या सीख दिलवा दी, उनपे तेल-पानी ले के चढ़ने से पहले, कि आपको हम ये राहत दिलवाते हैं, अब आप ऐसे-ऐसे करेंगे?

अगर "आप" ने पुलिस को उपर्लिखित किसी भी दबाव से मुक्त करवाने को कोई कदम उठाया हो तो, लेकिन नहीं बस पहले से ही दबाव में काम कर रही पुलिस को और मार दो दबा-दबा के? मतलब जो समस्या की मूल जड़ है उनसे तो मोर्चा लेना नहीं, बस बैठ गए "बीटिंग अराउंड थे बुश करने को", यानि कुम्हार की कुम्हारी पे तो पार बसाये न जा के गधे के कान लगे मरोड़ने| - Phool Kumar Malik

पुलिस और देशभक्ति का पाठ !! भाई एक पोस्ट से काम नहीं चलेगा ! एक नया विस्तृत थ्रेड बनता है इस गहन और महत्वपूर्ण विषय पर !! जहाँ तक मुझे अथवा यहाँ के अन्य जाट भाइयो को ज्ञात है किसान देशभक्ति क लिए नहीं अपितु अपनी चौधर एवं गर्रे के लिए अपने बच्चे को भेजता है ! सैकडो जगह ले देकर सेटिंग करता है ताकि ट्रफिक या अन्य अंडी जगह पोस्टिंग आ जाए तो सारा निवेश ब्याज सहित वसूल कर गाम म अंडी कोठी गाडी जाए ! बाकी आपकी तरह गहन ज्ञान नहीं इस विषय का !
 
This is second time you are clashing with me on this thread, a few days ago, I left with you same kind of sarcastic things, so I won't take any heed on it this time. In fact if to worry and take care sir, then please take it at ur end against Phool Kumar. For example this post in quote does or did yield any fruitful analysis; no but just solely the haste and sarcastice splitting! Thanks sir, keep going......... I don't know what would happen to Phool and his computer drives but one thing is for sure that one day you shall find yourself just left with waves striking in ur mind vessel on how to stop or comment on Phool's post sarcastically even if his posts really carry a message or not..... lolz.....God save you from Phoolophobia V.P. Singh ji.....hahahahahahahah


सर, आपकी बात तो बिलकुल सही है i दिल्ली पुलिस के गऊ जैसे सीधे सादे और ईमानदार लोगों पर ज़ुल्म ढाया जा रहा है i इन बिचारे मासूम लोगों पर रिश्वतखोरी,भ्रष्टाचार और नाफरमानी का आरोप लगाने से पहले लोगों की जुबान पर छाले क्यों नहीं पड़ जाते i कलयुग आग्या मालिक साहब, भले आदमियों का तो जीना ही मुहाल हो गया है i इतना ही नहीं, इन पापियों ने अफ्रीकन अबलाओं की आबरू को भी नहीं बक्शा i इन बिचारियों ने थोड़ी बहुत घाट-बाध कर दी तो के ज़ुल्म होग्या i उनकी लाइफ, उनका शरीर, वे चाहे कुछ भी करें, किसी को क्या हक़ है टोका-टोकी का i उनका अपना शरीर भाई, वे जैसे चाहे उसका प्रयोग करें i ये तो मानव अधिकारों का खुला उल्लंघन है i इन लोगों की बदमाशी यहीं ख़त्म नहीं हुई i इन्होने नशीले पदार्थ बेच कर मुश्किल से गुजारा करने वाले गरीब व्यापारियों के पेट पर भी दुलत्ती मारने का जघन्य अपराध किया है जो संविधान की धारा के खिलाफ है i भोत बड़ा ज़ुल्म हो रह्या सै भाई जी देश मै i पर सर, आप न्यू अपना खून फूकते रहोगे तो चुनाव तक आपका हीमोग्लोबिन 5 तक पहुँच ज्यागा i सर, थोड़े दिन दिमाग और कंप्यूटर नै आराम दे दयोगे तो इसमें आपका भी भला और कम्पूटर की भी सेहत ठीक रहगी, बाकी आपकी मर्ज़ी i जिस स्पीड तैं काम कर रहे सो, उस से तो दिमाग और कम्पूटर दोनों की हार्ड ड्राइव क्रैश हो ज्यागी i
 
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re o taau, teri gel mera bada pyaar ka rista hai, bada bhai sai tu mera...... is karken tu jo chaahe lapet meri posts se teri chhoot sai..... par itna bhi yaad raakh ak mere is post ko halke se lene mein tu kahin na kahin apni hi community ke contribution ko halke se le raha hai, uska disregard kar raha hai, so karta rah, aise-aise views pe hi to kaha jata hai ki "Jaatda aur Kaatda, aapne ko hi maare"...... main to makha jo mhaari kaum ke bande sen vo kyaa contribute karte hain nation ko usko highlight karun, but shayad Jat ko apni praise kabhi pasand nahin aati; yah to uska gene hota hai ki 2 shabd uski praise mein bole nahin ak, Jat lag jyaga apni kabar aapne aap hi khodne..... warna jis chaudhar aur garre kee tu baat kar rahya sai na, uspe bhi tujhe main dikha deta hi Jat ki chaudhar aur garra kyaa hota hai, agar tujhse meri wo waali post miss ho gai ho to, le padh le Jat ka asali garra aur chaudhar yaah hove sai, likhi to maine yaah AK ko samjhaane ko thi but lagta hai AK se pahle apne hi Jat bhai ko samjhaane ki darkaar hai, plz go through it:

आओ! अरविन्द केजरीवाल समझें कि डोमिनेंट कम्युनिटी क्या होती है:

अरविन्द केजरीवाल की आम आदमी पार्टी कहती है कि हम हरियाणा में दिल्ली की मोहल्ला सभा (पता नहीं दिल्ली में अभी तक बनी भी कि नहीं) की तर्ज पर मोहल्ला व् ग्राम सभाएं तो बनायेंगे पर डोमिनेंट कम्युनिटी की नहीं सुनेंगे?

ताज्जुब है, पहली तो बात यह डोमिनेंट कम्युनिटी होती क्या है? ये बनती कैसे हैं और कहाँ से ऊठ के आती है? अरविन्द केजरीवाल या ...आप वालो पता है आप लोगों को? नहीं पता हो तो आओ मैं बताता हूँ!

1) कोई कम्युनिटी डोमिनेंट तब बनती है जब वो मिटटी की लकीरों से अन्न उगा तुम्हारा पेट भर तुम्हारी अन्नपूर्णा कहलाती है! एक चिप्स के पैकेट से ले बालों के तेल तक उसके हलों की बनाई लकीरों से निकल जब तुम्हारे माथे की चमक बनते हैं, तब वो कम्युनिटी डोमिनेंट कहलाती है|

2) कोई कम्युनिटी डोमिनेंट तब बनती है जब वो हल की फालों के बीच से रूई निकाल, तुम्हारा तन ढांपने को कपडा देती है| तुम्हें नंग-धड़ंग से एक ढका-लिपटा सुन्दर इंसान बना समाज की गलियों में चलाने का जरिया बनती है!

3) कोई कम्युनिटी डोमिनेंट तब कहलाती है, जब वो पोह-माह की हाड कंपकपाती सर्दियों की भूतहा काली-रातों में साँपों-बिच्छुओं के मुंहों पे पैर रख, घुटने-घुटने तक की ऐसी अंधियारी घासों में जहां यह तक पता नहीं होता कि अगला कदम किसी सांप के बिल पे पड़ेगा या चूहे के खोदे हुए तागड़ी तक गहरे गर्क जाने वाले बिलों में धंसेगा, में पड़ता-गिरता वो गन्ना उगाता है जिससे तुम्हारी रसोई की मिठास संपन्न होती है| और तो छोड़ो, तुम्हारी चाय तक की मिठास ये लोग साँपों-बिच्छुओं के फनों को कुचल तुम्हारे जीवन में भरते हैं, तब ये डोमिनेंट कहलाते हैं|

4) कोई कम्युनिटी डोमिनेंट तब कहलाती है जब वो पशुओं के गोबर-मूत से लथपथ हो तुम्हारी चाय के काले रंग को भूरा कर देती है| तुमारे जीवन के रंगों के लिए वो अपने रंग बेनूर करते हैं, तब वो डोमिनेंट कम्युनिटी कहलाते हैं, केजरीवाल बाबू|

5) कोई कम्युनिटी डोमिनेंट तब कहलाती है अरविन्द केजरीवाल और आप वालो, जब तुम घरों में चादर तान के सो रहे होते हो और उस कम्युनिटी के सबसे अधिक वीर-बांकुरे तुम्हारे लिए शरहदों पे अपने शीश कटवाते हैं| तुम्हारे सुकून से सोने के बदले जब वो अपनी नींद और शीश त्यागते हैं तब वो डोमिनेंट कहलाते हैं|

6) कोई कम्युनिटी डोमिनेंट तब कहलाती है जब उसको देख के धर्म के प्रवर्त्तकों तक में होंसला बनता है कि जब तक ये जिन्दा हैं, तब तक उनके धर्म और संस्कृति की तरफ कोई आँख उठा के नहीं देख सकता| और वो भी बावजूद इस कड़वी सच्चाई का जहर पी कि वो धर्म के प्रवर्त्तक इनकी प्रशंसा पे ना कभी किताबें लिखते हैं, ना ही अपने लेखों में इनको सराहते हैं| ऐसे यथार्थ के कड़वे घूँट पी के कोई कम्युनिटी डोमिनेंट बनती है|

7) कोई कम्युनिटी डोमिनेंट तब कहलाती है, जब बाबर तक उसके दर पे आ के शीश नवाता है!

8) कोई कम्युनिटी डोमिनेंट तब कहलाती है, जब इकलौते उसी कम्युनिटी के राजे-रजवाड़े ऐसे होते हैं जिन्होनें समझौतों की टेबलों पे अंग्रेजों से "ट्रीटी ऑफ इक्वलिटी" साइन करवाई हों और अंग्रेजों से संधि करने हेतु हाथों में सफ़ेद झंडे उठवा दिए हों|

कुछ पड़ी पल्ले कि नहीं, जनाब? लेकिन शायद तुमने गली-चौराहों पर इक्का-दुक्का छुट-पुट गुंडागर्दी करने वालों को डोमिनेंट समझ लिया है; अगर ऐसा है तो अपनी सोच बदलो| और असली डोमिनांसी ढूंढ़नी है तो जाओ उन खेतों-खलिहानों में, जाओ उन सीमा के कंदराओं में जहां इसी डोमिनेंट कम्युनिटी के लोग तुम्हें डोमिनांसी में मिलेंगे|

सो तुम किसी से ये गली-चौराहों की डोमिनांसी तो भले ही छीन लो, पर क्या वो डोमिनांसी छीन पाओगे जो हर पल तुम्हारे पेट में दौड़ती है इनकी वजह से? तुम्हारे तन पे फब्ती है, इनकी वजह से| तुम्हें पीस ऑफ़ माइंड देती है इनकी वजह से? पा पाओगे या पा सकते हो निजात उनकी इस डोमिनांसी से?

इन वाली डोमिनांसी किसी मनियार के पिटारे का खिलौना नहीं अरविन्द बाबू, कि दो-चार रूपये दे के खरीद लिया| इन वाली डोमिनांसी किसी गली-चौराहे की छेड़खानी नहीं कि दो-चार वारदातें करी और डोमिनेंट कहलवाने लगे| इन वाली डोमिनांसी किसी मंच से खड़े हो के बख्त में बेबख्त के बोल बोलना नहीं कि खड़े हो के भीड़ों को उकसा दिया, और फिर जब ऐन मैदान छिड़ा तो दूम दबा के भाग लिए| इन वाली डोमिनांसी कोई झंडे उठा के दो बोल बोलना नहीं कि अपने आपको छद्म अवतारी समझ, हो गए डोमिनेंट| इन वाली डोमिनांसी कोई डेढ़-दो एकड़ की वो जमीन नहीं जो सरकारें कुछ जातियों को देती हैं किसान बनाने को और वो उसको बेच के वापिस वहीँ ढर्रे पे रेंगते हैं|

इन वाली डोमिनांसी बड़े जिगर का काम है, ऐसी डोमिनांसी पल-पल का मरना मांगती है, वो मरना जो ये डोमिनेंट कम्युनिटी वाले ऊपर दिए उदाहरणों में पल-पल कदम-कदम पे जीते हैं| और ये वाली डोमिनांसी को रिटेन करना सबके बस की बात भी नहीं, क्योंकि होती, तो आज हरियाणा के गाँव-के-गाँवों से कुछ मानव जातियां लुप्त ना हो जाती|

और जिस तरीके का रवैय्या आप डोमिनेंट कम्युनिटी के प्रति दिखा रहे हो, उसके चलते खुदा-ना-खास्ता अगर इन्होनें एक बार सामाजिक चक्कर रोक दिया तो आदम के जमाने की तरह घास-फूस खा के तो पेट भरते दिखोगे और पत्ते-टहनियों से तन ढांपते| इनके घरों में तो आज भी चरखे-करघे रखे हैं (भले ही टाँडों पे टांग रखे हों, जिनको उतारने में इनको देर नहीं लगेगी) सो ये तो चरखे उतार के तन ढकने को कपडे बुन भी लेंगे, अपनी सोच लेना कि तुम्हारा क्या होगा? और समाज को ऐसी दुर्गति की गर्त में धकेलने की राजनीति ही ले के आनी है तो भला होगा आपका कि अपनी सोच बदलें|

उम्मीद करता हूँ कि ये कहीं की ईंट - कहीं के रोड़े जमा करके जो भानमति का कुनबा जोड़ा हुआ है आपने, उसमें से कोई समझाए आपको कि डोमिनेंट कम्युनिटी होती क्या है!

ये लेफ्टिस्ट की भाषा छोड़ के अपनी भाषा अख्तियार करो आप वालो, ये डोमिनांसी की पॉलिटिक्स तो लेफ्ट वाले करते हैं| उनके जैसी पॉलिटिक्स की वर्कशॉप लगाने की जरूरत नहीं, एक बार जा के पश्चिमी बंगाल के हालात ही देख आओ, कि इन महारथियों ने पैंतीस साल के राज में वहाँ क्या हाल बना दिए उस प्रदेश के| पैंतीस साल के राज में ये लोग वहाँ वो गरीबी तक नहीं मिटा पाये, जिससे मजबूर हो वहाँ के माँ-बाप अपनी बेटियां तक बेचने को मजबूर होते हैं| और वो वाकई में कितने मजबूर हैं वो देखने के लिए तो आपको बंगाल जाने की भी जरूरत नहीं, इधर हरियाणा में ही वहाँ से हर रोज दो-चार "मोल की" आने वालियों के रूप में देख सकते हो|

इसलिए जो ये लकीर पकड़ी हैं ना ईंट-रोड़े जोड़ के भानमती का कुनबा बनाने की, बहुत घातक साबित होगी आप लोगो के लिए| इधर-उधर हर तरफ हड़फाड़ने की बजाये अपनी नई विचारधारा को उभारो वरना, इस भानमती के कुनबे की खिचड़ी में खुद के दाने भी नहीं पहचान पाओगे| - Phool Kumar Malik





पुलिस और देशभक्ति का पाठ !! भाई एक पोस्ट से काम नहीं चलेगा ! एक नया विस्तृत थ्रेड बनता है इस गहन और महत्वपूर्ण विषय पर !! जहाँ तक मुझे अथवा यहाँ के अन्य जाट भाइयो को ज्ञात है किसान देशभक्ति क लिए नहीं अपितु अपनी चौधर एवं गर्रे के लिए अपने बच्चे को भेजता है ! सैकडो जगह ले देकर सेटिंग करता है ताकि ट्रफिक या अन्य अंडी जगह पोस्टिंग आ जाए तो सारा निवेश ब्याज सहित वसूल कर गाम म अंडी कोठी गाडी जाए ! बाकी आपकी तरह गहन ज्ञान नहीं इस विषय का !
 
After seeming struggle for one-up-man-ship between AAP of Delhi CM and Home Ministry held by Congress, telecast day and night by the Media, came to an abrupt end, people of Delhi and India heaved a sigh of relief late last evening.

Ultimately, one has the right to know the purpose, object and attainment of this event ! If there was any logic to hold this high IT propagated theatrical show by the AAP Cabinet.
 
Deep in my heart I am so much pissed off with paid Indian media and internet trolls of all sorts who constantly bombard with all sort of nonsense. They forget that the public has its own mind to filter the truth.

RK^2

You are absolutely right sir! When I watched the ABP news at 2am Aus time, It was showing that 67% people support the Dharna!
With in 10 hours the support has come down to 23% . What a joke!
 
Following news item is for all those who are quoting all sorts of laws being violated by AAP in asking for the suspension of police officers. Read this news item in which your own Jats were involved;
...................................................................................................................................................

13 cops suspended for failing to prevent security breach at Sushilkumar Shinde's housePTI New Delhi, April 11, 2013 | UPDATED 10:24 IST






In a major security breach, around 150 protesters demanding reservation for Jat community on Wednesday barged into the residence of Union Home Minister Sushilkumar here, following which 13 Delhi Police personnel were suspended for dereliction of duty.

Police later arrested 142 protesters and slapped a case of rioting and tresspass against them.

Shinde was not at home as he is currently on an official visit to Russia.

Protesters under the banner of Akhil Bhartiya Jat Aarakshan Sangharsh Samiti had initially assembled at Jantar Mantar for the demonstration and in the evening they proceeded to Shinde's 2-Krishna Menon Marg residence in three buses.

Police apprently did not have any clue about the intentions of the protesters and was taken by surprise when they landed in front of the Home Minister's residence.

The protesters tried to storm into Shinde's residence but security personnel were able to prevent them initially.

However, they managed to open the gate by damaging it and reached the courtyard where they staged a sit in protest.

A senior Delhi police officer said 13 personnel were suspended for dereliction of duty.

"They(policemen) could not anticipate and prevent the protesters from entering Home Minister's residence," he said.

The protests were led by Yashpal Malik, Satyapal Choudhary, B S Ahlawat, Ummed Singh, Moolchand Dahiya and S Singh Dhaka.

All the protesters were later detained and taken to Tughlaq Road police station.

An official said a case has been registered against the protesters.

The official said the case was registered under the Indian Penal Code sections 147 (rioting), 149 (unlawful assembly), 186 (obstructing public servant in discharge of public functions), 353 (hurt) and 451 (tresspass) against the arrested persons

...........................................................

Immediate action in this case but no action by police when public had been complaining of drug and sex rackets for so many months.

RK^2
 
Last edited:
You are absolutely right sir! When I watched the ABP news at 2am Aus time, It was showing that 67% people support the Dharna!
With in 10 hours the support has come down to 23% . What a joke!

Forget about media and the trolls, common man in street is supporting AAP's agitation. Public is fed up with police.

RK^2
 
Deep in my heart I am so much pissed off with paid Indian media and internet trolls of all sorts who constantly bombard with all sort of nonsense. They forget that the public has its own mind to filter the truth.

RK^2

Kindly elaborate Friend who was paying the 'media' to cover all 'non sense' utterances

and

non issue based drama enacted and wound up in a huff by AAP leadership.

Thanks and regards
 
Forget about media and the trolls, common man in street is supporting AAP's agitation. Public is fed up with police.

RK^2

Public is fed up with bunch of politicians too who instead of performing their duty indulge in such activities as cause inconvenience to a large number of people across cross sections of society as employees, commuters, daily wage earners etc. by seizing the city without any rhyme or reason !
 
Following news item is for all those who are quoting all sorts of laws being violated by AAP in asking for the suspension of police officers. Read this news item in which your own Jats were involved;
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13 cops suspended for failing to prevent security breach at Sushilkumar Shinde's housePTI New Delhi, April 11, 2013 | UPDATED 10:24 IST






In a major security breach, around 150 protesters demanding reservation for Jat community on Wednesday barged into the residence of Union Home Minister Sushilkumar here, following which 13 Delhi Police personnel were suspended for dereliction of duty.

Police later arrested 142 protesters and slapped a case of rioting and tresspass against them.

Shinde was not at home as he is currently on an official visit to Russia.

Protesters under the banner of Akhil Bhartiya Jat Aarakshan Sangharsh Samiti had initially assembled at Jantar Mantar for the demonstration and in the evening they proceeded to Shinde's 2-Krishna Menon Marg residence in three buses.

Police apprently did not have any clue about the intentions of the protesters and was taken by surprise when they landed in front of the Home Minister's residence.

The protesters tried to storm into Shinde's residence but security personnel were able to prevent them initially.

However, they managed to open the gate by damaging it and reached the courtyard where they staged a sit in protest.

A senior Delhi police officer said 13 personnel were suspended for dereliction of duty.

"They(policemen) could not anticipate and prevent the protesters from entering Home Minister's residence," he said.

The protests were led by Yashpal Malik, Satyapal Choudhary, B S Ahlawat, Ummed Singh, Moolchand Dahiya and S Singh Dhaka.

All the protesters were later detained and taken to Tughlaq Road police station.

An official said a case has been registered against the protesters.

The official said the case was registered under the Indian Penal Code sections 147 (rioting), 149 (unlawful assembly), 186 (obstructing public servant in discharge of public functions), 353 (hurt) and 451 (tresspass) against the arrested persons

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Immediate action in this case but no action by police when public had been complaining of drug and sex rackets for so many months.

RK^2

Yes, Fair, impartial and speedy dealing of all such cases at the hands of the administration is the need of the hour !
 
Following news item is for all those who are quoting all sorts of laws being violated by AAP in asking for the suspension of police officers. Read this news item in which your own Jats were involved;
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13 cops suspended for failing to prevent security breach at Sushilkumar Shinde's housePTI New Delhi, April 11, 2013 | UPDATED 10:24 IST


In a major security breach, around 150 protesters demanding reservation for Jat community on Wednesday barged into the residence of Union Home Minister Sushilkumar here, following which 13 Delhi Police personnel were suspended for dereliction of duty.

Police later arrested 142 protesters and slapped a case of rioting and tresspass against them.





The protests were led by Yashpal Malik

@ Bhai Phoolkumar Malik,

Bhai Kumar vishvas arr lala kejriwal barge to teri meri sunte konya.... Yashpal Malik ne e samjha ke dekh le eb be... je yo e maan le to makha... ak kimme badaai na dhari in batta me..
 
अंततः क्यों केजरीवाल मात्र आंशिक मांग पूरी होने पर भी धरने से पतली गली पकड़ कर निकल लिए?


(इससे पहले आप लोगों को ये जानकारी देना अत्यंत आवश्यक है कि केजरीवाल जिसे आंशिक मांग का माने जाना कह रहे हैं उसका भी कोई अर्थ (प्रयोजन) ही नहीं हैं क्योंकि उप राज्यपाल ने जिस दिन पूरे मामले की जांच के आदेश दिए थे, उसी दिन से दोनों एसएचओ छुट्टी पर थे, उन्हें आज अलग से केजरीवाल के कहने पर छुट्टी पर नहीं भेजा गया ये तो केवल मात्र जनता को एक बार पुनः केजरीवाल द्वारा गुमराह करने की चाल थी जिसे उसने व्यर्थ में ही अपनी जीत करार दिया। वैसे सूत्रों के अनुसार इन दोनों एसएचओ को केवल तीन दिन के लिए छुट्टी पर भेजा गया है)


*पुलिस वालों द्वारा केजरीवाल को अंतिम चेतवानी दे दी गयी थी कि अब उठ जाओ नहीं तो धारा 144 के उल्लंघन में कल लाठीचार्ज होना निश्चित है, भारी मात्रा में पुलिस बल बुलाया गया है.


*दिल्ली वालों से अपेक्षित समर्थन नहीं मिला, केवल 4000 से 5000 कार्यकर्ता ही पहुँचे थे, जबकि दस लाख से अधिक गों को पहुँचने के लिए SMS भेजे गए थे और Email से अपील की गयी थी (SMS भेजे जाने की बात कल रात न्यूज़ चैनलों पर भी प्रसारित की गयी थी)


*सम्पूर्ण देश समझ चुका था कि केजरीवाल की ये नौटंकी केवल अपने कानून मंत्री सोमनाथ को बचाने और अपनी कई कमियों को छुपाने के लिए की गयी है इससे पूरे देश से आम आदमी पार्टी के विरोध में परिणाम आ रहे थे.


*केजरीवाल का वास्तविक रंग सामने आने से और फिर "आप" के ही बिन्नी और टीना शर्मा के विरोध में आ जाने से बड़ी संख्या में "आप" समर्थक भी पार्टी से निराश हुए हैं और मीडिया जगत "आम आदमी पार्टी" के विरोध में जाते देश के रुख को भांप कर ओर अधिक केजरीवाल का गुणगान नहीं कर सकता था इसलिए "आज तक, IBN7" जैसे एक-दो बिकाऊ न्यूज़ चैनल को छोड़ कर किसी न्यूज़ चैनल ने केजरीवाल का साथ देने से मना कर दिया।


*आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता ही भारी अराजकता फैला रहे थे जिससे पार्टी की थू थू हो रही थी.


*तेजी से फैलता हुआ जनता का विरोध देखकर कांग्रेस ने भी अपनी 'बी टीम' को कोई सहायता देने से हाथ खड़े कर दिए थे.


*आगे कुआँ और पीछे खायी की स्थिति हो गयी थी.


ये सब देखते हुए केजरी मियाँ ने "भागते भूत की लंगोट भली" की तर्ज पर आंशिक मांग पूर्ण होने का हल्ला मचाकर भागना ही उचित समझा। एवं जीत गए जीत गए का हवाई फायर छोड़ कर केजरीवाल निकल लिए.


ध्यान रखें ना पुलिस वालों का निलंबन हुआ है, ना स्थानान्तरण, ना दिल्ली पुलिस राज्य सरकार के अधिकार में आ पायी और ना ही दिल्ली पुलिस की नियुक्ति और निलंबन का अधिकार राज्य सरकार को मिला।


ये मांगे केजरीवाल की थी जिनमें से एक भी पूर्ण नहीं हुई.
 
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