rajpaldular
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एक बच्चे को रोज उसके पिता स्कूल छोड़ने जाते थे ।
एक दिन व्यस्त होने के कारण उसके पिता जी ने उसे ड्राईवर के साथ भेज दिया ।
लड़के ने ड्राईवर को निर्देश देने शुरू कर दिए ।
कुछ देर बाद ड्राईवर ने झुंझलाकर कहा कि आप चुपचाप बैठिये मेरे पास मालिक के पर्याप्त निर्देश हैं और मैं उन्हें ही मानूंगा।
लड़का स्कूल से लौटकर धरने परर बैठ गया कि इस ड्राईवर ने मेरा कहना नहीं माना अब या तो इसे मेरा नौकर बना दो या इसे नौकरी से निकालो ।
काफी नौटंकी के बाद उसके पापा ने उस ड्राईवर को छुट्टी पर भेज दिया और उस लड़के को एक गुब्बारा दिया ।
वह लड़का खुश हो गया और उसने धरना ख़त्म कर दिया ।
बाद में पता चला की वो लड़का वास्तविकता में एक बीमारी से ग्रसित था जिसका नाम 'ध्यानाकर्षण मनोरोग' कहते हैं ।
नोट : उपर्युक्त कथन का किसी भी ' आम आदमी ' या घटना से कोई सम्बन्ध नहीं है और यदि ऐसा होता है तो इसे मात्र एक संयोग कहा जायेगा।
एक दिन व्यस्त होने के कारण उसके पिता जी ने उसे ड्राईवर के साथ भेज दिया ।
लड़के ने ड्राईवर को निर्देश देने शुरू कर दिए ।
कुछ देर बाद ड्राईवर ने झुंझलाकर कहा कि आप चुपचाप बैठिये मेरे पास मालिक के पर्याप्त निर्देश हैं और मैं उन्हें ही मानूंगा।
लड़का स्कूल से लौटकर धरने परर बैठ गया कि इस ड्राईवर ने मेरा कहना नहीं माना अब या तो इसे मेरा नौकर बना दो या इसे नौकरी से निकालो ।
काफी नौटंकी के बाद उसके पापा ने उस ड्राईवर को छुट्टी पर भेज दिया और उस लड़के को एक गुब्बारा दिया ।
वह लड़का खुश हो गया और उसने धरना ख़त्म कर दिया ।
बाद में पता चला की वो लड़का वास्तविकता में एक बीमारी से ग्रसित था जिसका नाम 'ध्यानाकर्षण मनोरोग' कहते हैं ।
नोट : उपर्युक्त कथन का किसी भी ' आम आदमी ' या घटना से कोई सम्बन्ध नहीं है और यदि ऐसा होता है तो इसे मात्र एक संयोग कहा जायेगा।