Chor ki Museebat

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dndeswal

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चोर की मुसीबत

कहते हैं कि जाट तो टोटे (गरीबी) में भी हंसना-हंसाना जानता है । एक गरीब, बूढ़ी चौधराइन अकेली रहती थी, घर में और कोई न था । जाड़े के दिन थे और वो रात के समय एक पतली सी चादर ओढ़कर सर्दी से कांपती हुई अंधेरे में खाट पर लेटी थी कि कुछ चोर घुस आये । चोरों ने सारा घर छान मारा पर कुछ हाथ नहीं आया । फिर एक चोर की नजर उस बुढ़िया पर पड़ी और उसने दया करके अपना कंबल उस पर डाल दिया ।

एक चोर बोला - चलो, किसी और घर में चलते हैं । जब वे जाने लगे तो चौधराइन बोली - "बेटा, पांच-सात दिन में एक गेड़ा (चक्कर) मारते रहया करो" !!
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गाँव में एक मलंग* के घर में रात को चोर घुस आये । मलंग एक अंधेरे कोने में बैठा था । घर में बहुत सारे खाली मटके रखे थे - चोरों ने सब छान मारे पर कुछ नहीं मिला । जब वे बाहर निकलने लगे तो मलंग ने रूका मारा - "अरै भाई, जब मन्नै इनमैं दिन मैं-ऐं कुछ ना मिलता, तै रात नै के तुमनैं न्यौळी* पावैगी?"
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*मलंग - बिन ब्याहा आदमी
*न्यौळी - रुपये-पैसे की पोटली
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Arr sir, aap bhi chakkar martay rahaya karo
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चोर की मुसीबत

कहते हैं कि जाट तो टोटे (गरीबी) में भी हंसना-हंसाना जानता है । एक गरीब, बूढ़ी चौधराइन अकेली रहती थी, घर में और कोई न था । जाड़े के दिन थे और वो रात के समय एक पतली सी चादर ओढ़कर सर्दी से कांपती हुई अंधेरे में खाट पर लेटी थी कि कुछ चोर घुस आये । चोरों ने सारा घर छान मारा पर कुछ हाथ नहीं आया । फिर एक चोर की नजर उस बुढ़िया पर पड़ी और उसने दया करके अपना कंबल उस पर डाल दिया ।

एक चोर बोला - चलो, किसी और घर में चलते हैं । जब वे जाने लगे तो चौधराइन बोली - "बेटा, पांच-सात दिन में एक गेड़ा (चक्कर) मारते रहया करो" !!
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गाँव में एक मलंग* के घर में रात को चोर घुस आये । मलंग एक अंधेरे कोने में बैठा था । घर में बहुत सारे खाली मटके रखे थे - चोरों ने सब छान मारे पर कुछ नहीं मिला । जब वे बाहर निकलने लगे तो मलंग ने रूका मारा - "अरै भाई, जब मन्नै इनमैं दिन मैं-ऐं कुछ ना मिलता, तै रात नै के तुमनैं न्यौळी* पावैगी?"
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*मलंग - बिन ब्याहा आदमी
*न्यौळी - रुपये-पैसे की पोटली
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