rajpaldular
Active member
वाह ! हमारे देश की प्रशासनिक व्यवस्था १५००० लोगों की मृत्यु का सौदा अमेरिका से कर बैठी, हमारी न्यायिक प्रणाली भी दोयम श्रेणी की निकली, जाटलैंड.कॉम के मेरे सभी भाइयो और बहनों और सभी देशवासिओं मेरे विचार में इन नेताओं की दृष्टि में मृत्यु का कोई मोल नहीं है, सी. बी. आई. को इन राजनेताओं ने सत्यानाश करके रख दिया है. इन्ही मनमोहन सिंह, सोनिया ने सी.बी.आई. और जजों के माध्यम से शिबू शोरेन को बरी कराया था. फांसी यदि देनी है तो इन राजनेताओं को देनी चाहिए. कैसे बेशर्म प्रधान मंत्री हैं जो इस निर्णय के बारे में एक शब्द भी नहीं बोले. समिति बनाकर क्या करोगे? कौन सा बाण चलेगा? अब भी नहीं चेते तो दूसरी दुर्घटना परमाणु की होगी, इन विदेशियों पर कानून क्यों नहीं लागू होते? क्या इनसे कमीशन खाया होता है? कांग्रेस बेईमान पार्टी सिद्ध होती जा रही है. अब भी इन राजनेताओं को शर्म नहीं है. जवानों को मरवाना, देशवासिओं को मरवाना, घोषणा करना कि ५-५ लाख रुपये मरने वालों को जैसे इनके अपने घर से जा रहा हो.
जागो जाटो, विकास के नाम पर अमेरिकी शह करके आपको विष पिलाया जा रहा है. ये राजनेता देश का क्या भला करेंगे, एक carbide ने भोपाल गैस त्रासदी कराई दूसरा परमाणु वाला मनमोहन सिंह करवाएंगे, शर्म नहीं आ रही है शीर्ष स्तर पर बैठे राजनेताओं को. क्या दिया है अमेरिका ने? सदैव छल कपट किया है भारत के साथ. भारत के राजनेता चाहे वह किसी भी पार्टी के हों विदेशियों के सामने क्यों इनके तलवे चाटता है? अब आज की तिथि में एंडरसन के स्थान पर इन नेताओं को फांसी पर लटकाया जाये. न्यायपालिका से पूछना है कि क्या १५००० मौतों की कोई कीमत नहीं है. आज परमाणु समझौता हो रहा है इसको बंद करो, हमारी व्यवस्था, हमारा कानून और ये राजनेता इन सबको ठीक किया जाये. सी. बी.आई. को इन राजनेताओं से जाल से मुक्त किया जाये. न्यायपालिका बताये जब लालू, मुलायम, मायावती, शिबू शोरेन इत्यादि की जांच जब सही दिशा में चल रही होती है तो अचानक धीमी क्यों हो जाती है? क्यों नहीं न्यायपालिका उस समय एक्शन लेती सी.बी.आई. पर और कौन न्यायपालिका को प्रभावित करता है? सोनिया या मनमोहन? या कोई और??????????????????
जागो जाटो, विकास के नाम पर अमेरिकी शह करके आपको विष पिलाया जा रहा है. ये राजनेता देश का क्या भला करेंगे, एक carbide ने भोपाल गैस त्रासदी कराई दूसरा परमाणु वाला मनमोहन सिंह करवाएंगे, शर्म नहीं आ रही है शीर्ष स्तर पर बैठे राजनेताओं को. क्या दिया है अमेरिका ने? सदैव छल कपट किया है भारत के साथ. भारत के राजनेता चाहे वह किसी भी पार्टी के हों विदेशियों के सामने क्यों इनके तलवे चाटता है? अब आज की तिथि में एंडरसन के स्थान पर इन नेताओं को फांसी पर लटकाया जाये. न्यायपालिका से पूछना है कि क्या १५००० मौतों की कोई कीमत नहीं है. आज परमाणु समझौता हो रहा है इसको बंद करो, हमारी व्यवस्था, हमारा कानून और ये राजनेता इन सबको ठीक किया जाये. सी. बी.आई. को इन राजनेताओं से जाल से मुक्त किया जाये. न्यायपालिका बताये जब लालू, मुलायम, मायावती, शिबू शोरेन इत्यादि की जांच जब सही दिशा में चल रही होती है तो अचानक धीमी क्यों हो जाती है? क्यों नहीं न्यायपालिका उस समय एक्शन लेती सी.बी.आई. पर और कौन न्यायपालिका को प्रभावित करता है? सोनिया या मनमोहन? या कोई और??????????????????