Dena seekho aur Lena bhool jao

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malikraj007

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जब एक इंसान की मौत होती है,
कई रिश्तों की मौत होती है।
इंसान भगवान को कोसता है।
पर इसमें उसका क्या कसूर,
उसकी दी हुई जिंदगी, जब चाहे मांग ले।
हम सब उसकी अमानत!

एक इंसान हंस के मर गया, पर हजारों को रुला गया। हम उसकी मौत पर क्यों रोते हैं? क्या उसकी कमी का एहसास होता है या अपनी आने वाली मौत का डर!

अगर उस इंसान की कमी का एहसास होता है, तो कुछ वक्त के बाद हम सब उसे भूल क्यों जाते हैं। क्यों याद नहीं आता वो इंसान जिसकी मौत पर हमने हजारों आंसू बहाए। क्यों वह पल भूल जाते हैं, जब हमने उसे जान से भी प्यारा माना था। अब हम उसे भूल गए, कहीं एक कोने में जरा सी जगह दे दी है उसे एक तस्वीर के रूप में। कुछ वक्त के बाद वो तस्वीर भी उस कोने में धुंधली सी दिखती है।

जब एक इंसान की मौत होती है, भगवान से बार-बार पूछा जाता है, क्या यही है तेरा न्याय? लेकिन जानते सब हैं कि जिंदगी देने से पहले ही वह मौत का वक्त भी तय कर देता है। इंसान रोता हुआ आता है, और हंसता हुआ जाता है। आती हुई जिंदगी का स्वागत हम हंसते हुए करते हैं, पर रोते हुए उसे विदा करते हैं। जब कोई पैदा होता है, तब रोना चाहिए और हंसते हुए उसे विदा करना चाहिए, क्योंकि असली घर तो वहीं है।

जिन्दगी का सबसे बड़ा उसूल बनाएं, हंसते हुए जिन्दगी का स्वागत करें और हंसते हुए ही उसे विदा करें। हर रिश्ते का एक वक्त होता है, वक्त में वह बनता है और वक्त खत्म होने पर रिश्ता भी खत्म हो जाता है।

जब एक रिश्ता टूटता है तो बहुत दुख होता है। तो दुख क्यों? वह इसलिए क्योंकि रिश्तों के साथ-साथ हमारी उम्मीदें भी बढ़ने लगती हैं। उससे जो मिलता है, उससे हम संतुष्ट नहीं होते। हम चाहते हैं कि हर पल वह रिश्ता वैसा रहे, जैसा उस पल में हम उसे चाहते हैं। उम्मीद तोड़ना इंसान की फितरत है।

रिश्ता चाहे पति-पत्नी का हो, भाई-बहन का या दोस्त का- उन दोनों में से कोई एक कमजोर होता है और दूसरा ताकतवर। कमजोर और ताकतवर सेहत से नहीं, सोच से। कमजोर अपने को ताकतवर के सामने हमेशा गलत ही समझता है, चाहे वह सही भी हो।

लेकिन जो खुद का कमजोर होना स्वीकार कर लेता है, वह दिल से बड़ा होता है। अपने को छोटा या कमजोर या गलत मान लेना आसान नहीं होता। जो खुद को ताकतवर मानता है, वह घमंडी होता है, उसकी सोच छोटी होती है। समझदारी इसी में है कि अपने से कमजोर किसी को मत समझो।

अच्छे संस्कारों वाला सबसे अमीर व्यक्ति, बुरे कामों वाला सबसे बड़ा गरीब। पैसा होने से कोई अमीर या गरीब नहीं बनता। इसलिए गरीब और अमीर में कभी फर्क मत करो। ईश्वर को वही प्यारा है, जो सच्चे दिल से, सच्ची भावना से अपने कर्म करता है। सबको एक जैसा समझो। घमंड और झूठ से सौ कोस दूर रहो।

देना सीखो और लेना भूल जाओ। देकर कभी जताओ नहीं, लेने के लिए कभी सताओ नहीं। कम बोलो, धीरे बोलो, पर अच्छा बोलो। ज्यादा सोचो, पर अच्छा सोचो। बुरा मत सुनो, सबकी सुनो, पर अपने मन की करो। सच्चाई का साथ दो, ईश्वर तुम्हारा साथ देंगे।

दूसरे का दिल कभी मत दुखाओ। सेवा का भाव हमेशा अपने मन में रखो। किसी को अपना दुख मत सुनाओ, दुख बढ़ता है। अपनी खुशियां बांटो, वे और बढ़ेंगी। सच्ची भावना से दुख-तकलीफ उस ईश्वर पर छोड़ दो, जिसने दिया है, वही उसका हल भी निकालेगा।

चाहे वह बुरा वक्त हो या अच्छा, उसका शुक्र अदा करो, क्योंकि जीवन की हर घड़ी उसी की दी हुई है। जीवन को प्रसाद समझ कर उसे ग्रहण करो, तो सब मीठा ही मीठा लगेगा। यदि कुछ मांगना हो तो यह मांगो कि हे प्रभु! मुझे सब्र करने की शक्ति देना।

सुनीता नथानी
Navbharat Times


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bhai saab baat to sarri badiya hain per itna ke karra jaa hai sarri haan
hamesha perfect hisab kitab thodi rehta hai. gussa,jalan,ghamand ye sab khabi naa khabi to dimag pe havvi hotte hi hain
 
:):)

vive...bhai bat to aapki thik hai...!

bhai Navbharattimes me pada tha...acha laga...to bej diya...aur bee pad le...thoda bhaut to pale pade..;);)
 
bhai aisi baatein badhne se jyada amal karne ki hoti hai .. jo ki bahut mushkil hai mere liye aapke liye aur hum sabke liye ... jo amal kar leta hai ussi ko saint ya mahapurush kehte hai .. aur bade log humse jyada gyaan de sake hai iss vishay par ...

par article achha hai :)
 
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