dhundhte rah jaaoge

Ghani sentimental baat kahdi sari. Tasvir Dev Dahiya hote to teri sari baata ke jawab dete:)
Bahut badhiya likhya hai....likhta rahiye kade teri likhawat bi doondhtey reh jaa
दो - एक चमोल्ले और ...........

गुड की सुहाली
खेताँ मै हाली
ढूंढते रह जाओगे /

हारे की सिलगती आग
ब्याह मै पेठे का साग
ढूंढते रह जाओगे /

हाथ का बँटा बाण
सरगुन्दी आली नाण
ढूंढते रह जाओगे /

हाथ मै झोला
खीर का कचोला
ढूंढते रह जाओगे /

ड्योढ़ी की सोड
बंदडे का मोड़ [सेहरा ]
ढूंढते रह जाओगे /
 
मैं भी फेंकू सू.. थामियो.

खेत में बैठ के खाना,
डोल्ला का सिरहाना,
ढूंढते रह जाओगे !

लावणी करती लुगाईया,
पानी प्याती पनहारिया,
ढूंढते रह जाओगे !

डेला नीचे खाट,
भाटा के बाट,
ढूंढते रह जाओगे !

..... :)
 
दो -एक चमोल्ले और --------

सिर मैं भौरी
अणपढ़ छौरी
ढूंढते रह जाओगे /

चरमक चूँ की जूती
दुध प्यांण की तूती
ढूंढते रह जाओगे /

मावस की खीर
पहंडे का नीर
ढूंढते रह जाओगे /

गर्मियां मैं राबड़ी
खेताँ मैं छाबड़ी
ढूंढते रह जाओगे /

घरां मैं पौली
कोरडे की होली
ढूंढते रह जाओगे /

चणे के साग की कढी
चाबी तैं चालदी घडी
ढूंढते रह जाओगे /
 
लालटेण का चानणा
बनछटीयाँ का बालणा
ढूंढते रह जाओगे /
/

Bhai tasvir,
Me rajasthani hooo,
mere yo samaz koni aayo
बनछटीयाँ का बालणा
ke hove hai ????
 
दो -एक चमोल्ले और --------

सिर मैं भौरी
अणपढ़ छौरी
ढूंढते रह जाओगे /

चरमक चूँ की जूती
दुध प्यांण की तूती
ढूंढते रह जाओगे /

मावस की खीर
पहंडे का नीर
ढूंढते रह जाओगे /

गर्मियां मैं राबड़ी
खेताँ मैं छाबड़ी
ढूंढते रह जाओगे /

घरां मैं पौली
कोरडे की होली
ढूंढते रह जाओगे /

चणे के साग की कढी
चाबी तैं चालदी घडी
ढूंढते रह जाओगे /


bhai tasveer ,,jama tod paad diya...!!!
kati etihasik cheez likhan laag rya sai..!!
wah wah..!!
 
Bhai tasvir,
Me rajasthani hooo,
mere yo samaz koni aayo
बनछटीयाँ का बालणा
ke hove hai ????

Sitaram ji,,
(बनछटी) hoti hai kapas ( narma ) chugne k baad jo wo paudha sookh jata hai..!!
usko ghar me jalane k liye istemaal me laya jata hai,,or haryanvi me BANCHHATI (बनछटी) BOLTE HAIN..
 
दो - एक चमोल्ले और ....

काबुआ कांसी का
काढ़ा खांसी का
ढूंढते रह जाओगे /

काजल कौंचे की
शुद्धताई चौंके की
ढूंढते रह जाओगे /

गुलगला बरसात का
चूरमा सकरात का
ढूंढते रह जाओगे /

सीठणे लुगाइयाँ के
नखरे हलवाईयाँ के
ढूंढते रह जाओगे /

भजनी अर ढोलक
माट्टी के गुल्लक
ढूंढते रह जाओगे /
 
दो - एक चमोल्ले और ....

काबुआ कांसी का
काढ़ा खांसी का
ढूंढते रह जाओगे /

काजल कौंचे की
शुद्धताई चौंके की
ढूंढते रह जाओगे /

गुलगला बरसात का
चूरमा सकरात का
ढूंढते रह जाओगे /

सीठणे लुगाइयाँ के
नखरे हलवाईयाँ के
ढूंढते रह जाओगे /

भजनी अर ढोलक
माट्टी के गुल्लक
ढूंढते रह जाओगे /

commendable effort tasveer bhai..!!!
 
Tashvir Bhai

Ram Ram

Bhoot hi badiya likha hai. Aag ke tarh phail rahi is western cluture me bhartye sanskrte din pe din khatam hote ja rahi hai.

Kafe deno bad kese writer ki itni sunder rachna padne ko mile accha laga.

Ise trach se samaj ke jwlant subject per likhte rahao.

Jai Hind, Jai Hanuman , Jai Jat.
 
Last edited:
Tashvir Bhai

Ram Ram

Bhoot hi badiya likha hai. Aag ke tarh phail rahi is western cluture me bhartye sanskrte din pe din khatam hote ja rahi hai.

Kafe deno bad kese writer ki itni sunder rachna padne ko mile accha laga.

Ise trach se samaj ke jwlant subject per likhte rahao.

Jai Hind, Jai Hanuman , Jai Jat.


धन्यवाद भाई
 
मॉटी का चूल्हा

उसनै देख कै एक माँ का मन पसीज़ ग्या

जब मॉटी का चूल्हा मींह कै म्हाँ भीज़ ग्या
चूल्हा वो माटी-गार का
सारे कूणबे के प्यार का

सीली बॉल छणया करती
सारयाँ की रोटी बणया करती

धोरै धरया रहता एक पलॅवा
कदे पूरी अर कदे हलवा

गुलगुले, पूड़े, कदे राबड़ी
आग तै पकी मॉटी की पापड़ी

माँ ने एक सताया करता
जब लुक-लुक कै नै खाया करता

सारे भाइयों का कट्ठा परोसा
जब एक की टिण्डी दूसरे ने खोसया

राम की थाली, लछमण का टूक
पेट सबके न्यारे, साझली सबकी भूख़

माँ जब लाकड़ी सहलाया करती
चूल्हे की आग भी बतलावा करती

बाबू भी तो उड़ै खाया करता
दुःख-सुख की बतलाया करता

चाहे घर हो, चाहे हो गमीणे की तैयारी
उस चूल्हे की थी हर जगहाँ भागीदारी

चूल्हे की आग जब फड़फड़ाया करती
कोय करै सै चुगली थारी उननैं बताया करती

पर उसनै कदे कराई जग-हंसाई ना
घर का हो या बाहर का, काची रोटी खुवाई ना

भाईयाँ मैं तैं सारे-ए तो पढ़गे
कुछ नौकरी लागगे, कुछ जहाजाँ में चढ़गे

खुशियाँ मैं बंडवारा बंड़ग्या
घर का चूल्हा एकला पड़ग्या

चूल्हे की कायां झरण लाग गी
बस चार-ए रोटी बणन लाग गी

दो बूढ़े की, एक बूढ़िया की,
अर एक बारणै बैठी कुतिया की

फेर एक दिन घराँ छोरा आया
चूल्हे नै दुःख मोटा आया

बोल्या, माँ क्यूँ धूम्में मैं आँख फुड़ानै सै,
सारी दुनिया गैस पर रोटी बणावै सै

थारै ख़ातर यू लोह का चूल्हा ल्याया,
सिलैण्डर भी सै सिफारसां तै पाय्या

धूम्मैं तै पाण्डा छुटाओ
इसपै थाम रोटी बणाओ

माँ नै, ना था उसका बेरया
स्टील कै चूल्है पै हाथ फेरया

मेरे मन की बात छिपै कोन्या
तेरा यू चूल्हा तो गार तै लिपै कोन्या

इसनै ठाये-ठाये कित हांडूंगी
ना इसकै नयन, ना नक्श, कित मैं पलवा टांगूंगी

फूक देगा सुवाहली, अर कॉची राखैगा राबड़ी
इसके लोह के तन पै तै, कोन्या उतरै मॉटी की पापड़ी

छोरे, जै मेरा सुख चाहवै सै, तो बताइये
एक बै मेरे धोरै सारे भाईयाँ नै लाइये

साच कहूँ सूँ बेटा, मैं फूल्ली नही समाऊँगी
सारै जणया नै आपणै हाथ तैं पो कै खुआऊँगी

छोरा ना मान्या, जूल्म करग्या
मॉटी कै चूल्हे नै छत पै धरग्या

माँ के दुःखदे गोड्डे छत पै चढ़ते नही
छोरे भी आ कै माँ का दुःख आँख्यॉ कैं पढ़ते नही

बूढ़ी उम्मीद इब गोबर और गॉरा ल्यावै सै
आच्छा-सा घोल बणा कै छात काहनी लखावै सै
जब भी बरसै सै मींह, चूल्हा खुले मैं भीजै सै

अर एक माँ का दिल बार-बार पसीजै सै
 
बच्चों में बचपन
जवानों में यौवन
शीशों में दरपन
जीवन में सावन
गाँव में अखाड़ा
शहर में सिंघाड़ा
टेबल की जगह पहाड़ा
और पायजामें में नाड़ा
ढूंढते रह जाओगे

ऑंखों में पानी
दादी की कहानी
प्यार के दो पल
नल-नल में जल
संतों की बानी
कर्ण जैसा दानी
घर में मेहमान
मनुष्यता का सम्मान
पड़ोस की पहचान
रसिकों के कान
ब्रज का फाग
आग में आग
तराजू में बट्टा
और लड़कियों का दुपट्टा
ढूंढते रह जाओगे

भरत-सा भाई
लक्ष्मण-सा अनुयाई
चूड़ी भरी कलाई
शादी में शहनाई
बुराई की बुराई
सच में सच्चाई
मंच पर कविताई
ग़रीब की खोली
आंगन में रंगोली
परोपकारी बंदे
और अरथी को कंधे
ढूंढते रह जाओगे
 
अध्यापक, जो सचमुच पढ़ाए
अफ़सर, जो रिश्वत न खाए
बुध्दिजीवी, जो राह दिखाए
क़ानून, जो न्याय दिलाए
ऐसा बाप, जो समझाए
और ऐसा बेटा, जो समझ जाए
ढूंढते रह जाओगे

गाता हुआ गाँव
बरगद की छाँव
किसानों का हल
मेहनत का फल
मेहमान की आस
छाछ का गिलास
चहकता हुआ पनघट
लम्बा-लम्बा घूंघट
लज्जा से थरथराते होंठ
और पहलवान का लंगोट
ढूंढते रह जाओगे

कट्टरता का उपाय
सबकी एक राय
डंकल के पंजे से देश आज़ाद
मरने का मज़ा, जीने का स्वाद
नेताजी को चुनाव जीतने के बाद
दुर्घटनाओं से रहित साल
गूदड़ी में होने वाले लाल
ऑंखों में काजल
प्रेम में पागल
साँस लेने को ताज़ा हवा
और सरकारी अस्पताल में दवा
ढूंढते रह जाओगे
 
Last edited:
आपस में प्यार
भरा-पूरा परिवार
नेता ईमानदार
दो रुपए उधार
कल में आज
संगीत में रियाज़
बातचीत में रिवाज़
दोस्ती में लिहाज
सड़क किनारे प्याऊ
सम्बोधन में चाचा-ताऊ
ढूंढते रह जाओगे

नेहरू जैसी इज्ज़त
सुभाष जैसी हिम्मत
पटेल के इरादे
शास्त्री सीधे-सादे
पन्ना धाय का त्याग
राणा प्रताप की आग
अशोक का बैराग
तानसेन का राग
चाणक्य का नीति ज्ञान
विवेकानंद का स्वाभिमान
इंदिरा गांधी जैसी बोल्ड
और महात्मा गांधी जैसा गोल्ड
ढूंढते रह जाओगे
 
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