Haryanvi (Devanagari: हरियाणवी hariyāṇvī, also हरयाणवी harayāṇvī), also known as Bangru (बांगरू bāṅgrū), is the northernmost dialect of the Hindi language. It is most widely spoken in the North Indian state of Haryana, and also in Delhi. According to linguistic research, Haryanvi is very similar to Braj Bhasha[SUP][1][/SUP] and has 65% lexical similarity with the Bagri language
"ळ" - एक जाट उच्चारण - वैदिक काल से
हरयाणवी, राजस्थानी, मराठी आदि भाषाओं में "ळ" शब्द खूब प्रचलित है । ळ और ल अलग-अलग शब्द हैं । जैसे हिन्दी में कहते हैं काला - हरयाणवी आदि में बोला जाता है - काळा । इसी प्रकार हळ, फळ, जाळा, साळा आदि बोले जाते हैं । बच्चे जब इन शब्दों का उच्चारण स्कूल में करते हैं तो कई मास्टर उनको गंवार कह कर धमका देते हैं ! यह सब उन शिक्षकों का कोरा अनाड़ीपन है ।
ळ शब्द वैदिक संस्कृत में खूब आया है, महर्षि पाणिनि ने अपनी अष्टाध्यायी में इसे सम्मिलित किया है । हिन्दी वर्णमाला से ळ क्यों गायब हो गया, इसका कारण शायद यही है कि हिन्दी पर पूर्वी प्रदेश अर्थात पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार आदि प्रदेश वालों का वर्चस्व ज्यादा रहा है और उन स्थानों के लोग ळ का उच्चारण नहीं कर पाते । ळ शब्द वैदिक सभ्यता के जन्मदाता जाट-बहुल क्षेत्रों में अब भी बोला जाता है ।
ऋग्वेद के पहले ही मंत्र में ळ शब्द आया है -
ॐ अग्निमीळे पुरोहितं यज्ञस्य देवमृत्विजम् ।
होतारं रत्नधातमम् ॥१॥
आओ हम ळ शब्द को हिन्दी वर्णमाला में स्थान दिलायें । इसको बोलते तो हम सभी हैं ।
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Bamanya gotra Jats
Bamanya (बामण्या) gotra Jats live in Tonk district in Rajasthan in village Ramnagar Aliyari. It means some Brahmans also joined Jats.
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