Do you know ?

कैप्टन चन्द्र चौधरी नौ सितंबर, 2002 को जम्मू-कश्मीर के उधमसर में दुश्मनों से लड़ते हुए शहीद हुए। चन्द्र चौधरी का जन्म 16 अक्टूबर 1974 को बीकानेर जिले की श्रीडूंगरगढ़ तहसील में गाँव बीगावास रामसरा में कन्हैयालाल जी सियाग के घर में हुआ। शहीद कैप्टन चन्द्र चौधरी (SS-37998) की याद में श्रीडूंगरगढ़ स्थित गांव बीगावास रामसरा में सेना का टैंक ‘विजयन्त’ तैनात किया गया है। बीकानेर में म्यूजियम चौराहा का नाम शहीद कैप्टेन चन्द्र चौधरी सर्कल किया गया है. इस चौराहे से सर्किट हॉउस तक जाने वाली सड़क का नामकरण शहीद कैप्टेन चन्द्र चौधरी सड़क के नाम पर किया गया है जाटलैंड पर और अधिक आप यहाँ पढ़ सकते हैं -

[Wiki]Capt Chander Choudhary[/Wiki]
 
भरत ओला ऐसे लेखक हैं जिनकी पहली पुस्तक 'जीव री जात' (राजस्थानी कहानी संग्रह) पर साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली ने अपना सर्वोच्च साहित्य अकादेमी पुरस्कार दिया। राजस्थानी भाषा के इस पुरस्कार के साथ डॉ. भरत ओला उन गिने-चुने साहित्यकारों में शुमार हो गये, जिनकी पहली ही पुस्तक पर साहित्य अकादेमी पुरस्कार मिला हो।

Read more about him on Jatland at ....[Wiki]Dr. Bharat Ola[/Wiki]
 
Dr Raj Pal Singh

Dr Raj Pal Singh is a reputed historian. He is now on Jatland as regular editor. He is doing wonderful contribution to Jatland through quality editing particularly in history section. We all welcome him. May know more about him on Jatland Wiki at [Wiki]Dr Raj Pal Singh[/Wiki]
 
Burdak Ji please forgive me but aap ye naee naee theories (hawaa mein) lagaa karr yahaan bachhon kaa manobal tod rahe hain ! inn sabb cheejon ka koee proof hai aapke paas !

Hmare yahaan jaton ka ek gotr hai "Dhanda" jiska matlab hai budhha bail.

Iska matlab huaa kuch bailon ne jaaton ko join kiyaa hai ?
ya its good cross question,
 
कोई जानवर जाट नहीं बनेगा परन्तु जानवरों के नाम पर जाट के गोत्र बने हैं. यह जाट गोत्र की सूची देख कर जान सकते हैं. बैल को राजस्थानी में गोधा कहते हैं. गोधा एक जाट गोत्र है. गोदारा जनपद राजस्थान के रेगिस्तान में था और ये लोग बैल रखते थे. खेती के लिए बैल जरूरी था. इन लोगों को गोदारा कहा जाने लगा. ढांडा भी गाय बैल को कहते हैं. गाय बैल पालने वाले लोग ढांडा कहलाये होंगे. शिव भी बैल रखते थे. जाट शिव के उपासक थे और हैं. प्रमाण तो हमें जुटाने पड़ेंगे. प्रमाण होता तो सीधे सीधे नहीं लिख देते. जाट एक संघ था और इसमें कोई भी शामिल हो सकता था. यह तो उस समय की परिस्थितियों पर निर्भर करता था कि किस संघ में फायदा था.
 
सामूहिक विवाह सम्मेल्लन
मध्य प्रदेश में सामूहिक विवाह आयोजन की प्रथा है. इसमें सैंकड़ों युवा-युवतियां विवाह बंधन में बंधते हैं. इस तरह के आयोजन स्थानीय जाट समाज संस्थाओं द्वारा किये जाते हैं. मुख्य जिले जहाँ ये सामूहिक विवाह आयोजन होते हैं उनमे देवास, हरदा, इन्दोर, धार, उज्जैन आदि हैं. अगला सामूहिक विवाह का आयोजन मध्य प्रदेश जाट क्षत्रिय विकास संघ उज्जैन द्वारा दिनांक 23 अप्रेल 2012 को किया जा रहा है.

मध्य प्रदेश जाट क्षत्रिय विकास संघ उज्जैन द्वारा श्री कृष्ण बलदाऊ छात्रावास और धर्मशाला अंकपात रोड, उज्जैन में प्रतिवर्ष सामूहिक विवाह सम्मलेन आयोजित किया जाता है. यह कार्य जाट समाज में फिजूलखर्ची रोकने व आर्थिक मजबूती हेतु सामाजिक क्षेत्र में क्रांति लाने के लिए किया जाता है.

अविवाहित युवक युवतियों के लिए अच्छा अवसर है.
 
Dr [Wiki]Badri Prasad Dhaka[/Wiki] (डॉ. बद्रीप्रसाद ढाका) was Awarded with Excellence Award for National Social Activity by Global Research Foundation New Delhi on 20 April 2012. This award is for his contribution in the field of Social and Economic upliftment of villagers.
 
Dr Badri Prasad Dhaka (डॉ. बद्रीप्रसाद ढाका) was Awarded with Excellence Award for National Social Activity by Global Research Foundation New Delhi on 20 April 2012. This award is for his contribution in the field of Social and Economic upliftment of villagers.

We are proud of Dr Dhaka's excellent achievement and congratulate him. We also thank you Sir for bringing this type of rare achievements of the Jats from time to time to light.
 
1857 का एक क्रन्तिकारी गाँव रोहनात

गाँव रोहनात, तहसील हांसी, जिला हिसार पूरे देश में मात्र एक गाँव है जिसके समस्त लोग 1857 की क्रांति में शामिल हुए. अंग्रेजी शासन के दोबारा स्थापित होने पर 20 जुलाई 1858 को इस गाँव के 50 -60 की संख्या में वीरों को जंजीरों से जकड़ कर हांसी की लाल सड़क पर रोलर से पीस दिया गया. इस गाँव के तीन नेता चौधरी न्योणदा राम बूरा , चौधरी बिरड दास स्वामी, तथा एक अन्य को फांसी पर लटका दिया गया था.

अधिक जानकारी के लिए पढ़ें - [Wiki]Rohnat[/Wiki]

कृपया पुष्टि करें यह गाँव हांसी तहसील में है या भिवानी जिले में ?
 
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1857 का एक मात्र क्रन्तिकारी गाँव

गाँव रोहनात, तहसील हांसी, जिला हिसार पूरे देश में मात्र एक गाँव है जिसके समस्त लोग 1857 की क्रांति में शामिल हुए. अंग्रेजी शासन के दोबारा स्थापित होने पर 20 जुलाई 1858 को इस गाँव के 50 -60 की संख्या में वीरों को जंजीरों से जकड़ कर हांसी की लाल सड़क पर रोलर से पीस दिया गया. इस गाँव के तीन नेता चौधरी न्योणदा राम बूरा , चौधरी बिरड दास स्वामी, तथा एक अन्य को फांसी पर लटका दिया गया था.

अधिक जानकारी के लिए पढ़ें - Rohnat

कृपया पुष्टि करें यह गाँव हांसी तहसील में है या भिवानी जिले में ?

Burdak ji,

Main manata huin kee Rohnat ka is kranti mein bahut yogdaan tha aur mein un sabhi ko naman karta hun.

Lekin mera manana hai kee Thread ka naam ''1857 ka eik krantikaari gaon'' , hona chahiya.

Yah gaon ''ekmatra'' nahin tha aur bhee bahut se gaon the jinhone kam balidaan nahin diya.

Yah gaon Bhiwani district kee Bawani khera tehsil mein hai. Bhiwani 1972 mein zila bana tha pahale yeh bhi Hansi kee tarah Hisar zile ki ek tehsil tha. 1857 mein Hansi aur Hisar mei Sainik chhawania thee isliya Sirsa tak ke krantikarion ko Hansi lakar sazain dee gayee thee unke khoon see Hansi kee sadak bhi lambe samaya tak lal sadak ya khuni sadak kahalane lagee thee.

Dhanyavad!
 
क्रांतिकार मेजर जयपाल सिंह कामरेड

पिता चौधरी बोहरंग लाल, गोत्र - ?,

जन्म- 15 जुलाई 1916 , स्वर्गवास - 25 जनवरी 1982

गाँव - करमानी , जिला मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश.

1941 में सेना में कमीशन मिला तथा 1945 में मेजर बने . देश की आजादी के लिए समकक्ष अधिकारियों को अंग्रेजों के खिलाफ बगावत के लिए प्रेरित किया. आजादी के बाद किसान मजदूरों के पक्ष में मार्क्सवादी आन्दोलन से जुड़कर किसान आन्दोलन को गति दी.

अधिक जानकारी के लिए पढ़ें - [Wiki]Jaypal Singh[/Wiki]
 
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क्रांतिकार मेजर जयपाल सिंह कामरेड

पिता चौधरी बोहरंग लाल गोत्र - ?,

जन्म- 15 लुजई 1916 , स्वर्गवास - 25 जनवरी 1982

गाँव - करमानी , जिला मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश.

1941 में सेना में कमीशन मिला तथा 1945 में मेजर बने . देश की आजादी के लिए समकक्ष अधिकारियों को अंग्रेजों के खिलाफ बगावत के लिए प्रेरित किया. आजादी के बाद किसान मजदूरों के पक्ष में मार्क्सवादी आन्दोलन से जुड़कर किसान आन्दोलन को गति दी.

अधिक जानकारी के लिए पढ़ें - Jaypal Singh

Well done Burdakji,

By putting the lives and work of such great personalities on the pages of jatland.com you are doing the real service to the cause of society in the form of bringing to light such inspiring persons from the grass root level and thus popularising their acts of bravery for the motherland. For this cause the community has always been contributing in a significant manner but has been denied due place on the pages of history due to ignorance on the part of text book authors.
Keep it up please.

Thanks and regards,

P.S. Kindly improve spelling of month of birth as : July please.
 
Richhpal Singh Fogat

Richhpal Singh Fogat (रिछपाल सिंह फोगाट) was an honorary Magistrate and a minister with the Jat Maha Sabha in Sikar Jat-Prajapati Maha Yagya in 1934.

जन्म: सन 1901 , स्वर्गवास: सन 1966

पिता: चौधरी जहान सिंह,

गोत्र: फोगाट

गाँव: धमेडा कीरत , जिला: बुलंदशहर (उत्तर प्रदेश)

जीवन भर समाज की उन्नति के लिए कार्यरत रहे.

अधिक जानकारी के लिए जाटलैंड पर यहाँ पढ़ें - [Wiki]Richhpal Singh Fogat[/Wiki]
 
Mamraj Singh Narwal (मामराज सिंह नरवाल)

आदर्श समाज चिन्तक

जन्म: सन 1878 , स्वर्गवास: सन 1941 ,

पिता: चौधरी तोता राम,

गोत्र: नरवाल

गाँव: शामली, जिला: मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश)

जीवन भर समाज की उन्नति के लिए कार्यरत रहे. सन 1907 में मुजफ्फरनगर में अखिल भारतीय जाट महासभा संस्था का गठन किया गया था जिसके स्थापना में मामराज सिंह की मुख्य भूमिका थी.

अधिक जानकारी के लिए जाटलैंड पर यहाँ पढ़ें - [Wiki]Mamraj Singh Narwal[/Wiki]
 
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आजाद हिंद फ़ौज के कप्तान चौधरी कंवल सिंह

जन्म: 17 अगस्त 1920 , स्वर्गवास: ? , पिता - सरदार तारा सिंह

गाँव - मांडोठी, जिला: रोहतक, हरयाणा, गोत्र - दलाल

अंग्रेजी दासता से देश की आजादी के लिए आजाद हिंद फ़ौज में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के अति निकटस्त ए.डी.सी. के रूप में कार्य किया. एक साथी की गद्दारी से पकडे गए व् लाल किले में फांसी की सजा दी. किन्तु आजाद हिंद फ़ौज पर चले मुकदमे के खिलाफ जन विद्रोह से सरकार ढीली पड़ गयी व् फांसी की सजा को उम्र कैद में बदल दिया स्वतंत्रता प्राप्त होने पर जेल से रिहा किया गया.

अधिक जानकारी के लिए जाटलैंड पर यहाँ पढ़ें - [Wiki]Kanwal Singh[/Wiki]
 
General Mohan Singh

जनरल मोहन सिंह - आजाद हिंद फ़ौज के आदि संस्थापक

जन्म: 3 जनवरी 1909 , स्वर्गवास: 26 दिसंबर 1989 , पिता - सरदार तारा सिंह

गाँव - जुगियाना, जिला: लुधियाना, पंजाब

अंग्रेजी दासता से देश की आजादी के लिए सिंगापुर में आजाद हिंद फ़ौज का गठन किया . लगभग 50000 सैनिकों को संगठित किया. रासबिहारी बोस के आने के बाद आजाद हिंद फ़ौज की कमान उनको सौंप दी.

अधिक जानकारी के लिए जाटलैंड पर यहाँ पढ़ें - [Wiki]General Mohan Singh[/Wiki]
 
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