Naliasar (नलियासर) is an ancient archeological site in Phulera tahsil of Jaipur district in Rajasthan. Naliasar site is situated on Sambhar-Naraina Road, 4 km south of Sambhar Lake, in Jaipur District of Rajasthan. Naliasar Lake is in west of Phulera.
नलियासर एक ऐतिहासिक स्थान है जो जयपुर से 83 किमी पश्चिम में सांभर झील से लगभग 3 मील पर स्थित है। नलियासर के एक टीले पर की गई खुदाई में ईसा पूर्व की तीसरी शताब्दी से लेकर 10वीं शताब्दी ई. के अवशेष प्राप्त हुए हैं। इस खुदाई से चौहान युग से पूर्व काल पर भी अच्छा प्रकाश पड़ा है। खुदाई से प्राप्त सामग्री में आहत मुद्राएँ, उत्तर इण्डोसासेनियन सिक्के, हुविष्क के सिक्के, इण्डोग्रीक सिक्के,यौधेयों के सिक्के प्रमुख हैं। गुप्तकालीन चाँदी के सिक्के, सोने तथा ताँबे की वस्तुएँ मिली हैं.
नलियासर (सांभर) में कुषाण एवं गुप्तकालीन भवनों के अवशेष भी प्राप्त हुये हैं। इन भवनों के प्रारुप को देखने से स्पष्ट ज्ञात होता है कि ई.पू की द्वितीय शताब्दी से लेकर नौवीं शताब्दी तक किस प्रकार के घरों में लोग निवास किया करते थे। जयपुर पुरातत्त्व विभाग द्वारा की गई खुदाई से पूर्व भी सांभर में लगभग सौ वर्ष पूर्व खुदाई की गई थी, जो अनुमानत: ई.पू तीसरी शताब्दी की थी। इस प्रकार सांभर में ईसा पूर्व की तीसरी शताब्दी से लेकर चौहान युग तक यहाँ संस्कृति पनपी एवं विकसित हुई।
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नलियासर एक ऐतिहासिक स्थान है जो जयपुर से 83 किमी पश्चिम में सांभर झील से लगभग 3 मील पर स्थित है। नलियासर के एक टीले पर की गई खुदाई में ईसा पूर्व की तीसरी शताब्दी से लेकर 10वीं शताब्दी ई. के अवशेष प्राप्त हुए हैं। इस खुदाई से चौहान युग से पूर्व काल पर भी अच्छा प्रकाश पड़ा है। खुदाई से प्राप्त सामग्री में आहत मुद्राएँ, उत्तर इण्डोसासेनियन सिक्के, हुविष्क के सिक्के, इण्डोग्रीक सिक्के,यौधेयों के सिक्के प्रमुख हैं। गुप्तकालीन चाँदी के सिक्के, सोने तथा ताँबे की वस्तुएँ मिली हैं.
नलियासर (सांभर) में कुषाण एवं गुप्तकालीन भवनों के अवशेष भी प्राप्त हुये हैं। इन भवनों के प्रारुप को देखने से स्पष्ट ज्ञात होता है कि ई.पू की द्वितीय शताब्दी से लेकर नौवीं शताब्दी तक किस प्रकार के घरों में लोग निवास किया करते थे। जयपुर पुरातत्त्व विभाग द्वारा की गई खुदाई से पूर्व भी सांभर में लगभग सौ वर्ष पूर्व खुदाई की गई थी, जो अनुमानत: ई.पू तीसरी शताब्दी की थी। इस प्रकार सांभर में ईसा पूर्व की तीसरी शताब्दी से लेकर चौहान युग तक यहाँ संस्कृति पनपी एवं विकसित हुई।
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