amritameerut01
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कंकड़ पत्थर जोड़कर , मस्जिद लियो बनाये ,
चढ़ कर मुलाह बांग दे , क्या बहरा हुआ खुदाए I
देवी बड़ी ना देवता , सूरज बड़ा ना चन्द ,
आदि अंत दोनों बड़े , के गुरु के गोविन्द I
माला फेरूँ ना हरी भजूं , मुख से कहूँ ना राम,
मेरे हरी मोको भजें , तब पाऊं विश्राम I
भय से भक्ति करें सबै , भय से पूजा होए ,
भय पारस है जीव को , निर्भय होए ना कोए I
शब्द बराबर धन नहीं , जो कोई जाने बोल ,
हीरा तो दामों मिलें , शब्द मोल ना तोल I
कंकड़ पत्थर जोड़कर , मस्जिद लियो बनाये ,
चढ़ कर मुलाह बांग दे , क्या बहरा हुआ खुदाए I
देवी बड़ी ना देवता , सूरज बड़ा ना चन्द ,
आदि अंत दोनों बड़े , के गुरु के गोविन्द I
माला फेरूँ ना हरी भजूं , मुख से कहूँ ना राम,
मेरे हरी मोको भजें , तब पाऊं विश्राम I
भय से भक्ति करें सबै , भय से पूजा होए ,
भय पारस है जीव को , निर्भय होए ना कोए I
शब्द बराबर धन नहीं , जो कोई जाने बोल ,
हीरा तो दामों मिलें , शब्द मोल ना तोल I