kamnanadar
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चाँद तन्हा है आसमां तन्हा,दिल मिला है कहाँ कहाँ तन्हा,,,
बुझ गई आस छुप गया तारा थर थराता रहा धुआं तन्हा,,,
जिंदगी क्या इसी को कहते हैं,जिस्म तनहा है और जाँ तन्हा,,,
हमसफ़र कोई गर मिले भी कहीं,दोनों चलते रहे तन्हा तन्हा,,,
जलती बुझती सी रौशनी के परे सिमटा सिमटा सा एक मकां तन्हा,,,
राह देखा करेंगे सदियों तक,छोड़ जायेंगे ये जहाँ तन्हा...
बुझ गई आस छुप गया तारा थर थराता रहा धुआं तन्हा,,,
जिंदगी क्या इसी को कहते हैं,जिस्म तनहा है और जाँ तन्हा,,,
हमसफ़र कोई गर मिले भी कहीं,दोनों चलते रहे तन्हा तन्हा,,,
जलती बुझती सी रौशनी के परे सिमटा सिमटा सा एक मकां तन्हा,,,
राह देखा करेंगे सदियों तक,छोड़ जायेंगे ये जहाँ तन्हा...