Email from Jayant on Muzaffarnagar riots

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Bhai election haran ka koye pressure naa thaa?

Issa e pressure thaa te, Hissar me ek saheed kyon karwaya ?

Hooda ko development ke liye vote diya jaa sakta hai par congress ko reservation ke liye aur MZFR NGR ke liye kabhi nahi.

जिनसे लेन-देन के रिश्ते होते हैं उनसे भाई-चारे नहीं निभाये जाया करते!


Avishwas aur pasho-pesh to donon hi taraf hai, Muslims ki taraf jaane mein aaj jhijhak hai to tilakdhari aur tarajudhari bhi kaunsa aapko barabar baitha lenge ya Agra ki rally mein baitha diya? Soch aapki, faisla aapka, bhavishaya aur samaaj aapka. but itna yaad
Tilakdhariyon aur tarajudhariyon ke saath aapke sirf len-den ke rishte nibh sakte hain, Jat se bhaichara na to kabhi inko nibhana aya aur naa kabhi ye nibha sakte, haan bhaichaare ya unity ka dhong jaroor kar sakte hain kyonki len-den ke rishte se to bhai-chaare ke rishte bana ke lootna aur bhi asaan ho jata hai. Jhanjhawat ki sthiti hai nikalna bahut mushkil hai, main to yahi kahunga ki apni Jat chaudhar ko bacha ke rakhna hai, aap kaise rakhenge wo aap jaanen. Ab jaise western U.P. ka hi maamla le lo, desh ki 543 seats pe nibha lena agar tilakdhariyo-tarajudhariyon se rishta nibhana bhi hai to but RLD ki 8 seats pe RLD ka khyaal jaroor rakhna, aakhirkaar various Jat Reservation Organizations, Jat bhaiyon ke balidan and hamaari Khaps ke joint sangharsh ko paar to Ajit Singh aur Bhupender Hooda ji ne hi mil ke lagwaya hai. aur jo samjhdar jat hoga wah yah bhi jaanta hoga ki congress pe jaisa pressure ka mahaul abhi bana tha, iske bina reservation milni bhi nahin thi. apne Jat leaders is cheej ko samjh gaye the ki abhi nahin to kabhi nahin aur poori jat biradari ka 6 saal ka sanghrash rang laya to usmen hamaare social leaders ke saath-saath in donon leaders ka bhi yogdan gina jayega!

Aur isse Jat kaum ka kitna bhala hone wala hai, wo aap logo isi saal se hone waale various college admissions, job promotions, new job selections mein saaf dekh lenge aur wo bhi bahut hi jald.


Phool Kumar Malik
 
Arey bhai Satender Vaire, ya to mera yah lekh tu khud pahuncha de Jayant Chaudhary ji ko, anytha mujhe unka email id de de, main send karta hu............ lekh is prakar hai:

ये जितने भी जाट भाई हिन्दू और हिंदुत्व का संखनाद फूंकते फिरते हैं और गुणगान करते नहीं छकते, कहीं पे हिन्दू यूनिटी तो कहीं पे हिन्दू बराबरी की बात करते हैं; क्या वो मुझे बता पाएंगे, कि कौन तिलकधारी या तराजूधारी, हिंदुओं का ट्रस्ट या कौनसे मंदिर की समिति ने मुज़फ्फरनगर दंगों के बाद, कौनसे जाट भाइयों या तथाकथित हिन्दू भाइयों के उजड़े और लुटे घरों और लोगों के पुनर्वास हेतु आगे आये? एक-से-एक पैसे वाले हिन्दू ट्रस्ट बैठे हैं, एक-से-एक बड़े मंदिरों वाले बैठे हैं, एक से एक आर-एस-एस से ले विश्व हिन्दू परिषद वाले बैठे हैं; और करोड़ों-खरबों के चंदे हमारे जैसे घरों से ही रोज आते हैं इनको| तो क्या किसी ने आगे बढ़ के एक भी जाट भाई के उजड़े घर का पुनर्वास तो छोड़ो, खाने-पीने तक की सामग्री भी भीड़ पड़ी यानि मुज़फ्फरनगर दंगों के दौरान या अभी तक भी पहुंचाई किसी के पास?


जबकि मुस्लिमों को सरकारी मदद से कई गुना मदद पहुंची मदरसों और मस्जिदों से| आँखें खोलो जाट युवा, और नहीं तो अपने बुजुर्गों के पास बैठ के ही बतला लो कुछ| कौनसे हिन्दू और हिंदुत्व पे बावले हुए फिरते हो तुम? करी किसी तथाकथित हिंदुओं के ठेकेदार बनने वाले तिलकधारियों और तराजूधारियों में से किसी ने तुम्हारी पूछ? दंगों के बाद आर्थिक सहायता बारे भी तुम्हारे लिए कुछ नहीं किया| और तो और नरेंद्र मोदी की आगरा रैली में सम्मान तक नहीं दिलवाया या कहो कि दिया| इसी से लगा लो अपनी औकात का अंदाजा कि ये हम जाटों को कितने भाई मानते हैं अपने| और फिर मीडिया में जो हिन्दू-बनाम-मुस्लिम बना के दिखाना था वो जब जाट-बनाम-मुस्लिम बना के दिखाया, उसपे तो यह कुछ बोले ही नहीं थे, वो भी बावजूद इसके कि नब्बे % से ज्यादा मीडिया तिलकधारी और तराजूधारियों के हाथों में है|| क्या ऐसे बिना किसी आदर, सम्मान, सहायता और पूछ के, सूखे ही हिंदुत्व की सूली पे टंग के मरोगे क्या?


नी आखिर कमी क्या है तुम्हारे पास? और क्या भीड़ पड़ी है तुम्हें इन लोगों की, कि ये ना तुम्हारा सम्मान करें, जिस हिंदुत्व के लिए तुम लोग मरे जा रहे हो, उस हिंदुत्व का आज का सबसे बड़ा पैरोकार बना नरेंद्र मोदी तक तुमको उसकी उपस्थिति (आगरा रैली) तक में तुम्हें सम्मान नहीं दिलवा पाया, तो साफ़ दिखाता है कि तिलकधारियों और तराजूधारियों के आगे उसकी खुद की नहीं चलती और उसको (यानि एक ओबीसी) सिर्फ ये लोग सत्ता हथियाने का हथियार बनाये हुए हैं ताकि वोट लें और फिर खुद राज करें|


अरे किसान के नाम पे तो तुम लोगों को क्या देंगे ये बीजेपी और तथाकथित हिंदुत्व वाले, इन्होनें तो हिंदुत्व की रक्षा करने के बदले में ही तुम्हें वो मान-सम्मान तक नहीं दिया, जिसके कि तुम सीधे-सीधे हकदारी थे, बाकी इनके ट्रस्टों और मंदिरों की तरफ से जैसे मुस्लिमों को आर्थिक सहायता मिली, ऐसी तो भूल ही जाओ|


क्या इनका फर्ज नहीं था अपने खजानों के मुंह खोलने का कि लो हमारे हिन्दू भाइयो, आप लोगों ने हिंदुत्व के लिए इतना किया है तो हम तुम्हारे खाने-पीने और इलाज का वैसा ही सामूहिक ख्याल रखेंगे, जैसा कि मस्जिदों और मदरसों वालों ने मुस्लिमों का रखा| आखिर ये तिलकधारी ऐसी भीड़ पड़ी में भी ट्रस्टों और मंदिरों के खजानों का मुंह नहीं खोलेंगे तो क्या बाद में तुम लोगों के कल्चर और खापों को मीडिया में बदनाम करवाने हेतु प्रयोग करेंगे?


यानि सम्मान भी नहीं, आर्थिक सहायता भी नहीं और फिर भी इनके पीछे बावले हुए फिर रहे हो| जागो जाट युवा जागो, नहीं तो तुम्हारी आगे वाली पीढ़ियां मूर्ख कहेंगी तुमको| और फिर जाट को तो इतिहास में कभी तिलकधारी और तराजूधारी की जरूरत ही नहीं थी, और आज भी हमें इनकी नहीं बल्कि इनको हमारी जरूरत है| इसीलिए तो ये हिन्दू बराबरी और यूनिटी का राग अलापते फिर रहे हैं| सारे हिंदुस्तान में मुस्लिमों से पिट के, और जाटों का इतिहास को देखते हुए ये समझ चुके हैं कि इतिहास में भी जाट ने ही इनका पीछे छुड़वाया मुस्लिमों से और अब भी जाट ही छुड़वा सकते हैं| लेकिन बदले में तुम्हें मिल क्या रहा है? ना मान-सम्मान और ना आर्थिक सहायता, और बात करते हैं हिन्दू बराबरी और यूनिटी की| कहाँ है ये हिन्दू बराबरी और यूनिटी, मुझे धरती पे प्रक्टिकलिटी में तो कहीं दिख नहीं रही|


इसलिए जाट भाइयो पार्टी और कट्टरता के पीछे वोट खराब मत करना, जहां भी डालो सिर्फ और सिर्फ जाट उम्मीदवार को जिताने हेतु डालना और अगर एक ही सीट पे दो या अधिक जाट खड़े हों तो उनमें यह जरूर देख लेना कि कौनसे को डालने से जाट राजनीती की चौधर बढ़ेगी या दूसरों के हाथों में जा के पिटेगी|


- पगड़ी सम्भाल जट्टा और दुश्मन पहचान जट्टा

main chahta hu kyonki RLD ko tilakdhari aur taraajoodhari vote to vaise hi nahin chadhna to kyon na is speech ke dawara ke jat youth ko inki asliyat saamne rakhwa ke unki aankhen khulwaai jaayen......

Note: speech mein modification ho sakti hai but mool bhawana aur sandesh yahi hoga_
 
maine akela politicians ko credit nahin diya hai janaab, saath hi different jat reservation organizations and Khaps ki bhi baat ki hai


rest aap mera lekh number 22 padh len, jo yahin pe dala hua hai, hope that will clear ur rest of doubts about my words_

Bhai election haran ka koye pressure naa thaa?

Issa e pressure thaa te, Hissar me ek saheed kyon karwaya ?

Hooda ko development ke liye vote diya jaa sakta hai par congress ko reservation ke liye aur MZFR NGR ke liye kabhi nahi.
 
Arey bhai Satender Vaire, ya to mera yah lekh tu khud pahuncha de Jayant Chaudhary ji ko, anytha mujhe unka email id de de, main send karta hu............ lekh is prakar hai:

ये जितने भी जाट भाई हिन्दू और हिंदुत्व का संखनाद फूंकते फिरते हैं और गुणगान करते नहीं छकते, कहीं पे हिन्दू यूनिटी तो कहीं पे हिन्दू बराबरी की बात करते हैं; क्या वो मुझे बता पाएंगे, कि कौन तिलकधारी या तराजूधारी, हिंदुओं का ट्रस्ट या कौनसे मंदिर की समिति ने मुज़फ्फरनगर दंगों के बाद, कौनसे जाट भाइयों या तथाकथित हिन्दू भाइयों के उजड़े और लुटे घरों और लोगों के पुनर्वास हेतु आगे आये? एक-से-एक पैसे वाले हिन्दू ट्रस्ट बैठे हैं, एक-से-एक बड़े मंदिरों वाले बैठे हैं, एक से एक आर-एस-एस से ले विश्व हिन्दू परिषद वाले बैठे हैं; और करोड़ों-खरबों के चंदे हमारे जैसे घरों से ही रोज आते हैं इनको| तो क्या किसी ने आगे बढ़ के एक भी जाट भाई के उजड़े घर का पुनर्वास तो छोड़ो, खाने-पीने तक की सामग्री भी भीड़ पड़ी यानि मुज़फ्फरनगर दंगों के दौरान या अभी तक भी पहुंचाई किसी के पास?


जबकि मुस्लिमों को सरकारी मदद से कई गुना मदद पहुंची मदरसों और मस्जिदों से| आँखें खोलो जाट युवा, और नहीं तो अपने बुजुर्गों के पास बैठ के ही बतला लो कुछ| कौनसे हिन्दू और हिंदुत्व पे बावले हुए फिरते हो तुम? करी किसी तथाकथित हिंदुओं के ठेकेदार बनने वाले तिलकधारियों और तराजूधारियों में से किसी ने तुम्हारी पूछ? दंगों के बाद आर्थिक सहायता बारे भी तुम्हारे लिए कुछ नहीं किया| और तो और नरेंद्र मोदी की आगरा रैली में सम्मान तक नहीं दिलवाया या कहो कि दिया| इसी से लगा लो अपनी औकात का अंदाजा कि ये हम जाटों को कितने भाई मानते हैं अपने| और फिर मीडिया में जो हिन्दू-बनाम-मुस्लिम बना के दिखाना था वो जब जाट-बनाम-मुस्लिम बना के दिखाया, उसपे तो यह कुछ बोले ही नहीं थे, वो भी बावजूद इसके कि नब्बे % से ज्यादा मीडिया तिलकधारी और तराजूधारियों के हाथों में है|| क्या ऐसे बिना किसी आदर, सम्मान, सहायता और पूछ के, सूखे ही हिंदुत्व की सूली पे टंग के मरोगे क्या?


नी आखिर कमी क्या है तुम्हारे पास? और क्या भीड़ पड़ी है तुम्हें इन लोगों की, कि ये ना तुम्हारा सम्मान करें, जिस हिंदुत्व के लिए तुम लोग मरे जा रहे हो, उस हिंदुत्व का आज का सबसे बड़ा पैरोकार बना नरेंद्र मोदी तक तुमको उसकी उपस्थिति (आगरा रैली) तक में तुम्हें सम्मान नहीं दिलवा पाया, तो साफ़ दिखाता है कि तिलकधारियों और तराजूधारियों के आगे उसकी खुद की नहीं चलती और उसको (यानि एक ओबीसी) सिर्फ ये लोग सत्ता हथियाने का हथियार बनाये हुए हैं ताकि वोट लें और फिर खुद राज करें|


अरे किसान के नाम पे तो तुम लोगों को क्या देंगे ये बीजेपी और तथाकथित हिंदुत्व वाले, इन्होनें तो हिंदुत्व की रक्षा करने के बदले में ही तुम्हें वो मान-सम्मान तक नहीं दिया, जिसके कि तुम सीधे-सीधे हकदारी थे, बाकी इनके ट्रस्टों और मंदिरों की तरफ से जैसे मुस्लिमों को आर्थिक सहायता मिली, ऐसी तो भूल ही जाओ|


क्या इनका फर्ज नहीं था अपने खजानों के मुंह खोलने का कि लो हमारे हिन्दू भाइयो, आप लोगों ने हिंदुत्व के लिए इतना किया है तो हम तुम्हारे खाने-पीने और इलाज का वैसा ही सामूहिक ख्याल रखेंगे, जैसा कि मस्जिदों और मदरसों वालों ने मुस्लिमों का रखा| आखिर ये तिलकधारी ऐसी भीड़ पड़ी में भी ट्रस्टों और मंदिरों के खजानों का मुंह नहीं खोलेंगे तो क्या बाद में तुम लोगों के कल्चर और खापों को मीडिया में बदनाम करवाने हेतु प्रयोग करेंगे?


यानि सम्मान भी नहीं, आर्थिक सहायता भी नहीं और फिर भी इनके पीछे बावले हुए फिर रहे हो| जागो जाट युवा जागो, नहीं तो तुम्हारी आगे वाली पीढ़ियां मूर्ख कहेंगी तुमको| और फिर जाट को तो इतिहास में कभी तिलकधारी और तराजूधारी की जरूरत ही नहीं थी, और आज भी हमें इनकी नहीं बल्कि इनको हमारी जरूरत है| इसीलिए तो ये हिन्दू बराबरी और यूनिटी का राग अलापते फिर रहे हैं| सारे हिंदुस्तान में मुस्लिमों से पिट के, और जाटों का इतिहास को देखते हुए ये समझ चुके हैं कि इतिहास में भी जाट ने ही इनका पीछे छुड़वाया मुस्लिमों से और अब भी जाट ही छुड़वा सकते हैं| लेकिन बदले में तुम्हें मिल क्या रहा है? ना मान-सम्मान और ना आर्थिक सहायता, और बात करते हैं हिन्दू बराबरी और यूनिटी की| कहाँ है ये हिन्दू बराबरी और यूनिटी, मुझे धरती पे प्रक्टिकलिटी में तो कहीं दिख नहीं रही|


इसलिए जाट भाइयो पार्टी और कट्टरता के पीछे वोट खराब मत करना, जहां भी डालो सिर्फ और सिर्फ जाट उम्मीदवार को जिताने हेतु डालना और अगर एक ही सीट पे दो या अधिक जाट खड़े हों तो उनमें यह जरूर देख लेना कि कौनसे को डालने से जाट राजनीती की चौधर बढ़ेगी या दूसरों के हाथों में जा के पिटेगी|


- पगड़ी सम्भाल जट्टा और दुश्मन पहचान जट्टा

main chahta hu kyonki RLD ko tilakdhari aur taraajoodhari vote to vaise hi nahin chadhna to kyon na is speech ke dawara ke jat youth ko inki asliyat saamne rakhwa ke unki aankhen khulwaai jaayen......

Note: speech mein modification ho sakti hai but mool bhawana aur sandesh yahi hoga_

mera bandh aankhein khul gayi.........phoolkumar ji kya lekh likha hai aapne....BJP ki 50 seat kam honi waali hai iss lekh se...
 
Every political party weighs the matter and issue statement/their take on it thereafter. It is true no political party works without their self interest. Now the question lies whom to support then. Everyone has his/her view on what is right and wrong with the political parties. Per me what is sensible is to stay united and vote for a party which is least worst among others and can take a stand on our issues.

For those who are claiming that muzzarfarnagar roits are a things of past, let me tell them very clearly if the area doesn't get strong hold of BJP this time, things we get worse. I am not gainsaying that BJP supported selflessly but again all others are seculars at its best.

I don't see any gain to our community is supporting RLD at this point in time.

PS: Never support any party who take us for granted rather doing anything for us.
 
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