Exit polls, Results and who is who in Haryana Vidhan Sabha 2014

None of the Khap leaders like Baljit Singh Malik BJP candidate from Beri, S S Kharkada, BJP Meham, Santosh Dahiya INLD Beri, and, Tekram Kandela Independent Jind
could win the confidence of voters to be their representative in this election.


What inference could be drawn from this pattern of defeat of these leaders across the party lines as well as independent.

saab, baljeet kai tai kimme bi koni thaya. khap ki parchi na sai kimme bi.
 
BJP was the only party where nepotism was not allowed during the seat distribution of the recent elections in Haryana.

Manohar Lal Khatter CM ====================Kyuki he is friend of Modi and RSS Leaders.
 
bhai yo nepotism koni khatam hona kade bi. niri malayi taar le sai log bag rajniti maii aaye pache.

ek Birender singh to bola ki Jat cm hona chiye....Soch samj kar fasala le BJP ager usne khud ko congress se replace karna hai to
 
Though Birendra Singh did not contest assembly elections yet he still aspires to be CM of Haryana.

His wife an MLA from Uchana was quick to add ''I will vacate my seat in a second'' for him.
 
Cpt. Abhimanyu ka muh isska hoga jaanu bander ko kella dikha vapis le liya ho................................Amit shah said Ambimanyu hoge next cm tabi to ye jeeta.. ha ha ha ......Kasuti bani is chorre lega bhi.
 
21haryana1.jpg

The Bharatiya Janata Party on Tuesday picked Manohar Lal Khattar as the chief minister of Haryana. He is the first non-Jat CM in 18 years.
Khattar was an RSS worker from 1980 to 1994 and then joined the BJP. He is a close aide of Prime Minister Narendra Modi.

Riding on the Modi wave, Khattar, a bachelor above the age of 60, was confident of winning the Karnal seat and he did by a huge margin.

He faced a tough competition from Captain Abhimanyu, who was sent to Haryana by BJP chief Amit Shah to help win the state.

Captain Abhimanyu definitely had the backing of Delhi’s top leadership. But what worked to his disadvantage was that he is a Jat.

Jats have for long dominated politics in Haryana, but the BJP did not do well in south Haryana, which is dominated by the caste.

With only nine out of 27 BJP Jat candidates emerging winners, it is difficult for the party to ignore the growing clamour for a non-Jat CM.


Image: Karnal MLA Manohar Lal Khattar

Source :
http://www.rediff.com/news/report/m-l-khattar-to-be-haryana-cm/20141021.htm
 
BJP is no different party if you remove Modi & teachings of RSS. Every leader of every party wants to promote his/her family, friends & relatives. So all party have nepotism up to some extent.

In BJP , Modi will keep it in check and will not let it go beyond limits. Like Congress, SP, NCP, DMK, INLD, RLD, RJD etc etc.
 
BJP is no different party if you remove Modi & teachings of RSS. Every leader of every party wants to promote his/her family, friends & relatives. So all party have nepotism up to some extent.

In BJP , Modi will keep it in check and will not let it go beyond limits. Like Congress, SP, NCP, DMK, INLD, RLD, RJD etc etc.


Modi??? Kitne Percentage sach bolte hai PM ji?
 
All the speculations went wrong!!. I want to hear something from rathi, sanjeev and abhishek. I never thought even for a moment that there are chances of Jat CM in Haryana for BJP. BJP garnered all non-jats votes. I want to know how you guys thought that BJP can have a Jat CM in Haryana?
 
All the speculations went wrong!!. I want to hear something from rathi, sanjeev and abhishek. I never thought even for a moment that there are chances of Jat CM in Haryana for BJP. BJP garnered all non-jats votes. I want to know how you guys thought that BJP can have a Jat CM in Haryana?

Prashant,

If it was me. I had only one hope for JAT CM that too of Captain. I was keeping my fingers crossed till the last time when result declared for Narnaud. Truthfully, apart from being JAT he is young too. He should have been made CM.

Even after the polling I started a thread and was expecting a mix government of BJP + INLD. That too did not happen.
 
My perception was wrong then.


BJP always played game like this... Before election they gave hint Jats that Cpt. Abhimanyu could be next cm --------Ram Bilas sharma ne nhi nhi abi 1% bhi decide nhi hai.. Is traha Jat or no-jats dono vote le gaye....Esliye inhone cm declare nhi kia tha phaley....



Modi ko as pm 1 saal phaley declare kar diya tha per haryana main cm ke name pe game khel gaye.
 
http://khabar.ndtv.com/news/election/bjps-micro-management-in-haryana-682410

दिल्ली से सटे हरियाणा में बीजेपी की अपने दम पर जीत इस विधानसभा चुनाव की बहुत बड़ी खबर है। महाराष्ट्र में बीजेपी के बहुमत से दूर रह जाने और सरकार को लेकर चल रही अटकलों में हरियाणा में बीजेपी की जीत की ये कहानी मीडिया की नजरों में नहीं आ सकी। लेकिन इस कहानी के कई महत्वपूर्ण पहलू हैं, जो बीजेपी के नए अध्यक्ष अमित शाह के चुनाव प्रबंधन को बताते हैं।

शाह को यह एहसास था कि बीजेपी ने विश्नोई के साथ गैर-बराबरी का समझौता किया और उन्हें उनकी हैसियत से ज़्यादा दे दिया। पार्टी की कमान संभालने के बाद उन्होंने विश्नोई से नए सिरे से बात की और 45 की जगह 20 सीटें और उपमुख्यमंत्री पद की पेशकश की। जिसे विश्नोई ने ठुकरा दिया और बीजेपी ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया।

लेकिन बीजेपी के पास सभी 90 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए न तो पर्याप्त संख्या में कार्यकर्ता थे और न ही संगठन और न ही उम्मीदवार। पार्टी ने बाहर से उम्मीदवार लिए। लोक सभा चुनाव की ही तरह कांग्रेस, इंडियन नेशनल लोकदल जैसी विरोधी पार्टियों से नेताओं को रातों-रात लाकर टिकट थमा दिया गया। बीजेपी पर बाहरी उम्मीदवारों का दबदबा किस कदर है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पार्टी के 47 विधायकों में से 17 दूसरी पार्टियों से आए हैं।

यही हाल कार्यकर्ताओं का रहा। बीजेपी ने अन्य राज्यों से हरियाणा में अपने कार्यकर्ताओं की फौज तैनात कर दी। राज्य के चुनाव प्रभारी मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय बनाए गए थे और वहां से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता हरियाणा आए। मध्य प्रदेश के अलावा पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से भी सांसदों और विधायकों की तैनाती की गई। 90 सीटों और 22 ज़िलों में प्रभारी से लेकर कार्यकर्ता तक की तैनाती कर उनसे हर रोज अभियान की रिपोर्ट ली जाने लगी। हरियाणा के ही प्रभारी डॉक्टर अनिल जैन हर शाम को सीट वार रिपोर्ट ले कर पार्टी आलाकमान को सूचित कर रहे थे। डेढ़ महीने पहले से ही हर सीट पर एक-एक फुलटाइमर की नियुक्ति कर दी गई थी। आरएसएस के स्वयंसेवकों को सक्रिय कर बूथ पर कार्यकर्ताओं की फौज जुटाने का जिम्मा सौंप दिया गया था। मतदान के दिन अपने वोटरों को लाने के लिए अलग से व्यवस्था की गई।

दलित बहुल इलाकों में काम करने का जिम्मा पार्टी के अनुसूचित जाति मोर्चे के दुष्यंत गौतम और अन्य नेताओं को दिया गया। दलितों के हर तबके पर अलग से ध्यान दिया गया। मिसाल के तौर पर जाटवों के दो अलग गुटों से अलग-अलग तरह से बात कर बीजेपी के लिए समर्थन जुटाया गया। वाल्मिकी, खटीक, धनिक सब वर्गों के मतदाताओं को साथ लेने के लिए पहल की गई और हर दिन की प्रगति की समीक्षा की गई। जाटों और दलितों में परंपरागत अनबन को देखते हुए पूरी कोशिश की गई कि दलित वोट को साधने में कहीं जाट नाराज़ न हो जाएं। एक विवादास्पद दलित नेता जो अपनी एक सभा जाट बहुल इलाके में करना चाहते थे, उन्हें दिल्ली से सटे शहरी इलाके में अपना कार्यक्रम करने के लिए मनाया गया।

दूसरी चुनौती थी जाट वोटों के ओम प्रकाश चौटाला के समर्थन में ध्रुवीकरण को रोकने की। पार्टी ने इसके लिए 25 जाट उम्मीदवारों को टिकट दिया। बीजेपी के रणनीतिकारों को ये एहसास था कि पार्टी की छवि गैर जाट जातियों के समर्थक के तौर पर होने के वजह से जाट मतदाता छिटक सकते हैं। कांग्रेस से लाए गए चौधरी वीरेंद्र सिंह जैसे ताकतवर जाट नेता की पत्नी को टिकट दिया गया। प्रचार में चौधरी वीरेंद्र सिंह, कैप्टन अभिमन्यु और ओमप्रकाश धनकड़ को लगाया गया। बीजेपी की कोशिश थी कि ताकतवर जाट उम्मीदवार अपने बूते पर सीट निकालें ताकि चौटाला को नुकसान पहुंचाया जा सके और जाट वोट चौटाला के पक्ष में लामबंद न हो सके। जाट वोटों में पार्टी ने कुछ हद तक सेंध भी लगाई। पार्टी के छह जाट उम्मीदवार चुनाव जीते। जाट युवाओं की ओर खास तौर से ध्यान दिया गया। पार्टी को एहसास था कि युवाओं में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बहुत लोकप्रिय हैं और इसका इस्तेमाल अपने पक्ष में हो सकता है।


लेकिन पार्टी ने ये ध्यान रखा कि जाटों को साथ लेने के प्रयास में कहीं उसका कोर वोट बैंक यानी गैर जाट छिटक न जाए। प्रचार के अंतिम चरण जब सूत्रों के हवाले से कैप्टन अभिमन्यु को मुख्यमंत्री बनाने की खबरें चलने लगीं तो गैर जाट मतदाताओं में इसकी विपरीत प्रतिक्रिया रोकने के लिए पार्टी ने खंडन करने में देर नहीं लगाई। 48 गैर जाट उम्मीदवारों को जिताने में पार्टी ने पूरी ताकत झोंक दी।
 
BJP always played game like this... Before election they gave hint Jats that Cpt. Abhimanyu could be next cm --------Ram Bilas sharma ne nhi nhi abi 1% bhi decide nhi hai.. Is traha Jat or no-jats dono vote le gaye....Esliye inhone cm declare nhi kia tha phaley....

Modi ko as pm 1 saal phaley declare kar diya tha per haryana main cm ke name pe game khel gaye.

This is called smart politics and I find nothing immoral about this. Winner is always smarter than looser.

RK^2
 
This is called smart politics and I find nothing immoral about this. Winner is always smarter than looser.

RK^2


Yes it shows BJP took Jat as Muslim...... Lok shabha main muslim se vote liye modi ne baad kacchedaariyo ne pasie or jaan se marne ki dhamki deker hindu ladkiyo se muslim ladko pe ilzaam lagwye. right.

this is so moral.
 
http://khabar.ndtv.com/news/election/bjps-micro-management-in-haryana-682410

दिल्ली से सटे हरियाणा में बीजेपी की अपने दम पर जीत इस विधानसभा चुनाव की बहुत बड़ी खबर है। महाराष्ट्र में बीजेपी के बहुमत से दूर रह जाने और सरकार को लेकर चल रही अटकलों में हरियाणा में बीजेपी की जीत की ये कहानी मीडिया की नजरों में नहीं आ सकी। लेकिन इस कहानी के कई महत्वपूर्ण पहलू हैं, जो बीजेपी के नए अध्यक्ष अमित शाह के चुनाव प्रबंधन को बताते हैं।

शाह को यह एहसास था कि बीजेपी ने विश्नोई के साथ गैर-बराबरी का समझौता किया और उन्हें उनकी हैसियत से ज़्यादा दे दिया। पार्टी की कमान संभालने के बाद उन्होंने विश्नोई से नए सिरे से बात की और 45 की जगह 20 सीटें और उपमुख्यमंत्री पद की पेशकश की। जिसे विश्नोई ने ठुकरा दिया और बीजेपी ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया।

लेकिन बीजेपी के पास सभी 90 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए न तो पर्याप्त संख्या में कार्यकर्ता थे और न ही संगठन और न ही उम्मीदवार। पार्टी ने बाहर से उम्मीदवार लिए। लोक सभा चुनाव की ही तरह कांग्रेस, इंडियन नेशनल लोकदल जैसी विरोधी पार्टियों से नेताओं को रातों-रात लाकर टिकट थमा दिया गया। बीजेपी पर बाहरी उम्मीदवारों का दबदबा किस कदर है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पार्टी के 47 विधायकों में से 17 दूसरी पार्टियों से आए हैं।

यही हाल कार्यकर्ताओं का रहा। बीजेपी ने अन्य राज्यों से हरियाणा में अपने कार्यकर्ताओं की फौज तैनात कर दी। राज्य के चुनाव प्रभारी मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय बनाए गए थे और वहां से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता हरियाणा आए। मध्य प्रदेश के अलावा पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से भी सांसदों और विधायकों की तैनाती की गई। 90 सीटों और 22 ज़िलों में प्रभारी से लेकर कार्यकर्ता तक की तैनाती कर उनसे हर रोज अभियान की रिपोर्ट ली जाने लगी। हरियाणा के ही प्रभारी डॉक्टर अनिल जैन हर शाम को सीट वार रिपोर्ट ले कर पार्टी आलाकमान को सूचित कर रहे थे। डेढ़ महीने पहले से ही हर सीट पर एक-एक फुलटाइमर की नियुक्ति कर दी गई थी। आरएसएस के स्वयंसेवकों को सक्रिय कर बूथ पर कार्यकर्ताओं की फौज जुटाने का जिम्मा सौंप दिया गया था। मतदान के दिन अपने वोटरों को लाने के लिए अलग से व्यवस्था की गई।

दलित बहुल इलाकों में काम करने का जिम्मा पार्टी के अनुसूचित जाति मोर्चे के दुष्यंत गौतम और अन्य नेताओं को दिया गया। दलितों के हर तबके पर अलग से ध्यान दिया गया। मिसाल के तौर पर जाटवों के दो अलग गुटों से अलग-अलग तरह से बात कर बीजेपी के लिए समर्थन जुटाया गया। वाल्मिकी, खटीक, धनिक सब वर्गों के मतदाताओं को साथ लेने के लिए पहल की गई और हर दिन की प्रगति की समीक्षा की गई। जाटों और दलितों में परंपरागत अनबन को देखते हुए पूरी कोशिश की गई कि दलित वोट को साधने में कहीं जाट नाराज़ न हो जाएं। एक विवादास्पद दलित नेता जो अपनी एक सभा जाट बहुल इलाके में करना चाहते थे, उन्हें दिल्ली से सटे शहरी इलाके में अपना कार्यक्रम करने के लिए मनाया गया।

दूसरी चुनौती थी जाट वोटों के ओम प्रकाश चौटाला के समर्थन में ध्रुवीकरण को रोकने की। पार्टी ने इसके लिए 25 जाट उम्मीदवारों को टिकट दिया। बीजेपी के रणनीतिकारों को ये एहसास था कि पार्टी की छवि गैर जाट जातियों के समर्थक के तौर पर होने के वजह से जाट मतदाता छिटक सकते हैं। कांग्रेस से लाए गए चौधरी वीरेंद्र सिंह जैसे ताकतवर जाट नेता की पत्नी को टिकट दिया गया। प्रचार में चौधरी वीरेंद्र सिंह, कैप्टन अभिमन्यु और ओमप्रकाश धनकड़ को लगाया गया। बीजेपी की कोशिश थी कि ताकतवर जाट उम्मीदवार अपने बूते पर सीट निकालें ताकि चौटाला को नुकसान पहुंचाया जा सके और जाट वोट चौटाला के पक्ष में लामबंद न हो सके। जाट वोटों में पार्टी ने कुछ हद तक सेंध भी लगाई। पार्टी के छह जाट उम्मीदवार चुनाव जीते। जाट युवाओं की ओर खास तौर से ध्यान दिया गया। पार्टी को एहसास था कि युवाओं में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बहुत लोकप्रिय हैं और इसका इस्तेमाल अपने पक्ष में हो सकता है।


लेकिन पार्टी ने ये ध्यान रखा कि जाटों को साथ लेने के प्रयास में कहीं उसका कोर वोट बैंक यानी गैर जाट छिटक न जाए। प्रचार के अंतिम चरण जब सूत्रों के हवाले से कैप्टन अभिमन्यु को मुख्यमंत्री बनाने की खबरें चलने लगीं तो गैर जाट मतदाताओं में इसकी विपरीत प्रतिक्रिया रोकने के लिए पार्टी ने खंडन करने में देर नहीं लगाई। 48 गैर जाट उम्मीदवारों को जिताने में पार्टी ने पूरी ताकत झोंक दी।

What are your concluding remarks after going through all this ?

RK^2
 
What are your concluding remarks after going through all this ?

RK^2

Only one thing that Bjp spending a lot of money for speech writer, Strategy maker and their professional politics advisor. Spending tax payer money like this. Great job.
 
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