rakeshsehrawat
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एक बार रलदू घने ऐ दिन पाछे फत्तू तें मिलन उसके घर गया उडे वारी पहुँचा फत्तू ने पूच्या रोटी खावेगा?
वो बोल्या न भाई रोटी तो खा क आया हूँ !सोऊंगा आर तडके उठते ही जाऊंगा !
फत्तू बोल्या भाई तू न्यू कर तू पिंकी आले कमरे में सो ज्या !
रलदू ने बालाक न्यू ऐ न पसंद थे उसने सोच्या इसकी चोरी का नाम होगा पिंकी रात ने उठ के रोण लगगई तो मुसीबत होज्यगी वो बोल्या भाई मेरी ख़त तो तू बरामदे में ऐ घाल दे मन्ने आड़े भीतर नींद ना आवे !
फत्तू बोल्या भाई तेरी मर्ज़ी
तडके होते ही रलदू किसी मीठी आवाज ने ठाया " उठो जी चा पी ल्यो"
रलदू ने आँख मसलते मसलते देख्या एक घनी ऐ सुथरी छोरी खड़ी थी वो बोल्या जी आप कौन?
वा बोली जी में पिंकी फत्तू जी की चोटी साली और आप?
बोल्या जी मैं!.... मैं तो फद्दु हूँ!
वो बोल्या न भाई रोटी तो खा क आया हूँ !सोऊंगा आर तडके उठते ही जाऊंगा !
फत्तू बोल्या भाई तू न्यू कर तू पिंकी आले कमरे में सो ज्या !
रलदू ने बालाक न्यू ऐ न पसंद थे उसने सोच्या इसकी चोरी का नाम होगा पिंकी रात ने उठ के रोण लगगई तो मुसीबत होज्यगी वो बोल्या भाई मेरी ख़त तो तू बरामदे में ऐ घाल दे मन्ने आड़े भीतर नींद ना आवे !
फत्तू बोल्या भाई तेरी मर्ज़ी
तडके होते ही रलदू किसी मीठी आवाज ने ठाया " उठो जी चा पी ल्यो"
रलदू ने आँख मसलते मसलते देख्या एक घनी ऐ सुथरी छोरी खड़ी थी वो बोल्या जी आप कौन?
वा बोली जी में पिंकी फत्तू जी की चोटी साली और आप?
बोल्या जी मैं!.... मैं तो फद्दु हूँ!