Farmers are not meant to ride on development bandwagon!!

The only reason of the discussion and presence on JL for me atleast is to stay pro-jat in whatsoever situation and government. Why shall I steer it someway other ?

Your banal platitude of farmer's perspective and betterment seems hollow as you solely reply on HOPE the base of which is not visible in present decisions about agricultural sector. I am not disappointed but I like to see things as they are. Nor less neither more. So if you like to have discussions on agricultural sector, start with accepting the fallacy with present MSPs from govt this season and its affect on millions of the homes/future. Any trite and hollow talks beyond that would only be killing cyber space as well as your time.
Here I would say you are more concerned about agriculture and farmers even for Jats than others. I think this thing will give some relief to your ears for sure. If your words can add some values to cyber space then fill it with your full capacity. I will be the first person to wish you if your bewailing could help to improve farmer's conditions.
 
Here I would say you are more concerned about agriculture and farmers even for Jats than others. I think this thing will give some relief to your ears for sure. If your words can add some values to cyber space then fill it with your full capacity. I will be the first person to wish you if your bewailing could help to improve farmer's conditions.

>>>Insert Yawn Smily<<<
 
Present Condition of Farmers is temporary. Farmer will & can hold his crop ......to seek appropriate time to sell. That can happen only & only when MARKET RATE will prevail. No government intervention.

Seedhi si baat hain jab kisan ke haalaat sudhrenge toh voh crop beechne ka best time decide karne ka bhi faisla lene lag jayega...........YEH Condition to paisa aane par sudharti chali jayegi.

Sabte chale ki baat to ya se - Naming of " Minimum SUPPORT price ".

Government SUPPORT nahin uske rate ko badhne se rokne ki tarkib leke aayi hain. Na to yo price MINIMUM hain arr na SUPPORTIVE.

Jab naamkaran hi GUMRAAH karne wala ho to poori POLICY to khud samaj jaon.
msp lago hoo swaminathan farmula s orr sari crops ki purchase hoo govt. k through jaisse ki wheat ki hoti h............tabhi gujara h kissan ka.
pracatcally wheat /jiri only one variety /sugarcane yahi kharid hote h msp joo filhal h uss rate per govt.ki.............sugercane may too sugermills 220 se upper rate dene ko agree nahi h msp lago hone se hi 310 mil jayta h kissan koo................... kum s kum mota sa andaja hoo jata h ki 1 acre m itne ki fasal ho jygi in crops per.
jin ki msp nahi h for example tamatar ........mandi m 4rs.kissan ka bik raha h orr retail m 40..............kai baar too jyda maal aa jye too 2 rs bhi rate hoo jata h orr kissan k
pass koi option nahi hote ki usko kha per laker jye ghar too bhaar na sakta tamter t 2 din mey sadd jyga............ya too uss rate per becchye ya gusse m road per fek dey .
ajj bhi mandi k alwa koi market nahi h jaha apni fasal bech sake kissan ......mandi m 10 lala ate h orr uski fasl ki dherrey ki kimmat bata dete h wo bhi 1din baad.
bechara guggu sa ban joo dey h lay aata h lala s ........kyu ki kuch nahi kar sakta woo ............ye hi haqikat h kisi bhi kissan s jan sakte hoo .
 
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msp lago hoo swaminathan farmula s orr sari crops ki purchase hoo govt. k through jaisse ki wheat ki hoti h............tabhi gujara h kissan ka.
pracatcally wheat /jiri only one variety /sugarcane yahi kharid hote h msp joo filhal h uss rate per govt.ki.............sugercane may too sugermills 220 se upper rate dene ko agree nahi h msp lago hone se hi 310 mil jayta h kissan koo................... kum s kum mota sa andaja hoo jata h ki 1 acre m itne ki fasal ho jygi in crops per.
jin ki msp nahi h for example tamatar ........mandi m 4rs.kissan ka bik raha h orr retail m 40..............kai baar too jyda maal aa jye too 2 rs bhi rate hoo jata h orr kissan k
pass koi option nahi hote ki usko kha per laker jye ghar too bhaar na sakta tamter t 2 din mey sadd jyga............ya too uss rate per becchye ya gusse m road per fek dey .
ajj bhi mandi k alwa koi market nahi h jaha apni fasal bech sake kissan ......mandi m 10 lala ate h orr uski fasl ki dherrey ki kimmat bata dete h wo bhi 1din baad.
bechara guggu sa ban joo dey h lay aata h lala s ........kyu ki kuch nahi kar sakta woo ............ye hi haqikat h kisi bhi kissan s jan sakte hoo .

Jo pakki fasal hain jaise Wheat , Rice , Dals , Chana ------sirf inni ka MSP hain. Ise bhi band kar do. Pher dekho Kisan ki shakti. Pher sabb kuch apne aap bikega.

Sarkar.....sabji ka......doodh ka.....MSP kyun nahin karti ? Neeyat main khot se sarkar ki!

Mera kehna hain.........Sabb cheejo ka MSP nahin ho sakta.........jinka hain unko bhi band kar degi toh.........saari cheej bikkan ka rasta khul ja ga.
 
लखनऊ। गन्ना समर्थन मूल्य बढ़ने की आस लगाए किसानों को लगातार दूसरे वर्ष भी मायूसी हाथ लगी। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता में बुधवार को आयोजित मंत्रिमडल की बैठक में गन्ने के दाम बढ़ाने की मांग को खारिज कर गत वर्ष के समर्थन मूल्य 275-280 रुपये प्रति क्विंटल को यथावत बनाए रखने का निर्णय किया गया। साथ ही चीनी मिल मालिकों की मांग मंजूर करते हुए दो किस्तों में भुगतान करने की इजाजत भी दे दी। इसमें भी किसानों की कटौती कर दी गई। पहली किस्त में किसान को 240 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान मिल सकेगा। धन लेने के लिए पेराई खत्म होने तक इंतजार करना होगा। यानि गत सत्र में गन्ना मूल्य की पहली किस्त में 260 रुपये की दर से भुगतान पाए किसान इस मर्तबा प्रति क्विंटल 40 रुपये कम नगद रकम पा सकेंगे।
सरकार के फैसले की जानकारी देते हुए चीनी विकास के प्रमुख सचिव राहुल भटनागर ने पत्रकारों को बताया कि चीनी मिलों की खराब वित्तीय स्थिति व किसान हित ध्यान में रखते हुए इस बार गन्ना मूल्य नहीं बढ़ाया जा सका। गत पेराई सत्र के समर्थन मूल्य को यथावत रखते हुए सामान्य प्रजाति के गन्ने का मूल्य 280, अगेती-290 व अनुपयुक्त प्रजाति का गन्ना 275 रुपये प्रति क्विंटल की दर से ही खरीदा जाएगा। मिलों को दो किस्तों में गन्ना मूल्य भुगतान की सुविधा मिलेगी। पहली किस्त में 240 रुपये प्रति क्विंटल दर से 14 दिन में भुगतान करना होगा वरना ब्याज लगाया जाएगा।
 
लखनऊ। गन्ना समर्थन मूल्य बढ़ने की आस लगाए किसानों को लगातार दूसरे वर्ष भी मायूसी हाथ लगी। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता में बुधवार को आयोजित मंत्रिमडल की बैठक में गन्ने के दाम बढ़ाने की मांग को खारिज कर गत वर्ष के समर्थन मूल्य 275-280 रुपये प्रति क्विंटल को यथावत बनाए रखने का निर्णय किया गया। साथ ही चीनी मिल मालिकों की मांग मंजूर करते हुए दो किस्तों में भुगतान करने की इजाजत भी दे दी। इसमें भी किसानों की कटौती कर दी गई। पहली किस्त में किसान को 240 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान मिल सकेगा। धन लेने के लिए पेराई खत्म होने तक इंतजार करना होगा। यानि गत सत्र में गन्ना मूल्य की पहली किस्त में 260 रुपये की दर से भुगतान पाए किसान इस मर्तबा प्रति क्विंटल 40 रुपये कम नगद रकम पा सकेंगे।
सरकार के फैसले की जानकारी देते हुए चीनी विकास के प्रमुख सचिव राहुल भटनागर ने पत्रकारों को बताया कि चीनी मिलों की खराब वित्तीय स्थिति व किसान हित ध्यान में रखते हुए इस बार गन्ना मूल्य नहीं बढ़ाया जा सका। गत पेराई सत्र के समर्थन मूल्य को यथावत रखते हुए सामान्य प्रजाति के गन्ने का मूल्य 280, अगेती-290 व अनुपयुक्त प्रजाति का गन्ना 275 रुपये प्रति क्विंटल की दर से ही खरीदा जाएगा। मिलों को दो किस्तों में गन्ना मूल्य भुगतान की सुविधा मिलेगी। पहली किस्त में 240 रुपये प्रति क्विंटल दर से 14 दिन में भुगतान करना होगा वरना ब्याज लगाया जाएगा।
पता नही कब प्रदेश की जनता को सपा के कुशासन से मुक्ति मिलेगी| यह लगातार दूसरा साल है जब सरकार ने गन्ने के लिए एक धेल्ला नही दिया| पूरी सरकार शुगर लॉबी के हाथो में खेल रही है| वैसे भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जाट बेल्ट में में सपा का जनाधार ना के बराबर है| पर दुर्गत तो जाटो की होने वाली है जो पूरी तरह गन्ने के ऊपर ही निर्भर है| ऐसा लगता है सरकार को फ़िक्र भी नही है किसानो की| राजनीति में अंधी हो चुकी सरकार को क्या फ़र्क पड़ता है|
रोणा तो इस बात का है यहाँ कोई ढंग जाट नेता भी तो ना बचा| टिकैत होत्ता तो माडै मोट्टे खड़दू तो उतरते| म्हारे अजीत साहब तै तो कुछ उम्मीद राखणा ही बेकार है| के बेरा इब लौ हारण के सदमें तै बाहर लिकडा के नही| बस बैठ्ठे रहो इब कान दैब कै|
 
पता नही कब प्रदेश की जनता को सपा के कुशासन से मुक्ति मिलेगी| यह लगातार दूसरा साल है जब सरकार ने गन्ने के लिए एक धेल्ला नही दिया| पूरी सरकार शुगर लॉबी के हाथो में खेल रही है| वैसे भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जाट बेल्ट में में सपा का जनाधार ना के बराबर है| पर दुर्गत तो जाटो की होने वाली है जो पूरी तरह गन्ने के ऊपर ही निर्भर है| ऐसा लगता है सरकार को फ़िक्र भी नही है किसानो की| राजनीति में अंधी हो चुकी सरकार को क्या फ़र्क पड़ता है|
रोणा तो इस बात का है यहाँ कोई ढंग जाट नेता भी तो ना बचा| टिकैत होत्ता तो माडै मोट्टे खड़दू तो उतरते| म्हारे अजीत साहब तै तो कुछ उम्मीद राखणा ही बेकार है| के बेरा इब लौ हारण के सदमें तै बाहर लिकडा के नही| बस बैठ्ठे रहो इब कान दैब कै|
My friend not only SP, we must also get rid of BJP. Farmer in Gujarat are suffering as a result of lower prices for cotton.
 
My friend not only SP, we must also get rid of BJP. Farmer in Gujarat are suffering as a result of lower prices for cotton.
Man,Why are you dragging BJP here...Gujarti people are there to punish them if they are doing anything wrong with farmers.
 
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पता नही कब प्रदेश की जनता को सपा के कुशासन से मुक्ति मिलेगी| यह लगातार दूसरा साल है जब सरकार ने गन्ने के लिए एक धेल्ला नही दिया| पूरी सरकार शुगर लॉबी के हाथो में खेल रही है| वैसे भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जाट बेल्ट में में सपा का जनाधार ना के बराबर है| पर दुर्गत तो जाटो की होने वाली है जो पूरी तरह गन्ने के ऊपर ही निर्भर है| ऐसा लगता है सरकार को फ़िक्र भी नही है किसानो की| राजनीति में अंधी हो चुकी सरकार को क्या फ़र्क पड़ता है|
रोणा तो इस बात का है यहाँ कोई ढंग जाट नेता भी तो ना बचा| टिकैत होत्ता तो माडै मोट्टे खड़दू तो उतरते| म्हारे अजीत साहब तै तो कुछ उम्मीद राखणा ही बेकार है| के बेरा इब लौ हारण के सदमें तै बाहर लिकडा के नही| बस बैठ्ठे रहो इब कान दैब कै|

वो जो पुलिस कप्तान बनाया था सांसद अर डॉ बाल्यान ,उनके कोई ब्यान नहीं इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर ? बाकी सुनी स अक किसान संघठन हरयाने आले मुख्यमंत्री क पाछे लाग रे ह स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करवाने पर !
 
वो जो पुलिस कप्तान बनाया था सांसद अर डॉ बाल्यान ,उनके कोई ब्यान नहीं इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर ?
ye too delhi gumman tahi bejh rakhe h .................arr bole bhi kyukar nu kah kay jitte theey ki bjp atee hi gannaya kissan ki problem khatham ho jya gi...........
 
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ye too delhi gumman tahi bejh rakhe h .................arr bole bhi kyukar nu kah kay jitte theey ki bjp atee hi gannaya kissan ki problem khatham ho jya gi...........

yeh eibb aagle 3 saal ki baat dekh re hai...kah re hai pehle UP main bhi sarkaar aawan to mahrri..fer dekhenge..to yeh to bhai fer jitane padenge haamne vidhansabha main bhi..jibhe todd paatega inka..saare ustaaz hai ghaat koi ni......hahahahah
 
वो जो पुलिस कप्तान बनाया था सांसद अर डॉ बाल्यान ,उनके कोई ब्यान नहीं इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर ? बाकी सुनी स अक किसान संघठन हरयाने आले मुख्यमंत्री क पाछे लाग रे ह स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करवाने पर !
अभी तक तो कुछ सुनाई न दिया। वैसे टिकैत के बाळक तो रूक्का तैर रै। पर उनकी सुण कौण रहा। वो भी खानापूर्ति कर रे। राजनिति करण खात्तर मिल के गेट लो तो पहुंच जा पर होत्ता कुछ नी।अब देक्खो म्हारे नए नेता के करांगै। दिल्ली तै फुर्सत मिले तो कुछ बोल सुणाइ दे।
 
अभी तक तो कुछ सुनाई न दिया। वैसे टिकैत के बाळक तो रूक्का तैर रै। पर उनकी सुण कौण रहा। वो भी खानापूर्ति कर रे। राजनिति करण खात्तर मिल के गेट लो तो पहुंच जा पर होत्ता कुछ नी।अब देक्खो म्हारे नए नेता के करांगै। दिल्ली तै फुर्सत मिले तो कुछ बोल सुणाइ दे।

भाई वे भी आजकल धरना केवल रुपये लें की लिए दे हैं. धरना सुरु करे हैं आरर मिल वालू ते पैसे ले हैं.

भाई यहाँ सारे नेता इस सीजन के गन्ने के भाव कु ले के रुका मर राहे हैं. पर हम मलकपुर मिल वालो को तो पिछले साल का भी न मिला इब्ब तक। हाई कोर्ट भी बोल बोल का थक गया. पर न तो पुलिस के थोरे टाइम हैं. आरर न नेता क थोरे.
पर जब कोई किसान भाई आत्महत्या कर ले हैं मज़बूरी आरर गरीबी के कारण फेर साले सरे रों आजा हैं.

ये तो सरे क सरे लाठो के यार हैं
 
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पूँजीपतियों के 'ड्रीम' पूरे करने के लिए जमींदारों के 'ड्रीम' से खिलवाड़ क्यों ?
इन हालातों पर अन्नदातों के लिए इकबाल की ये लाईने .....

बंदा-ए-मजबूर को जाकर मेरा पैग़ाम दे।
ख़िज्*र का पैग़ाम क्*या है, यह पयामे-क़ायनात ।।

ऐ कि तुझको खा गया सरमायादारे-हीलागर ।
शाख़े-आहू पर रही सदियों तलक तेरी बरात ।।

कट मरा नादां ख़याली देवताओं के लिए।
सुक्र की लज़्ज़त में तू लुटवा गया नक़्दे-हयात ।।

मक्र की चालों से बाज़ी ले गया सरमायादार।
इन्तिहा-ए-सादगी में खा गया मज़दूर मात।।

उठ कि अब बज़्में-जहां का और ही अंदाज़ है।
मशरिक़-ओ-मग़रिब में तेरे दौर का आग़ाज़ है।।

{ प्यामे-कायनात - जीवन प्रदान करने वाला संदेश , सरमायादारे-हिलागर ---बहानो से लूटने वाला पूंजीपति , शाखे-आहु --दोषपूर्ण शाखा , बरात--भाग्य से बंधा भाग , सुक्र--नशे , नकदे-हयात -- जीवन की नकदी , मशरिक़-ओ-मगरिब -- दुनिया भर मे }

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जिसके मर जा राजा उसके रूल जा वजीर , किसान कमेरों के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ हैं |

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मत सता गरीब को वह रो देगा ,
सुनेगा उसकी खुदा तुम्हें जड़ा मूल से खो देगा ।



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वह बोता है और रोता है, यह किसान की गाथा है।
गद्दी पर बैठी सरकार व बिचोलिया आज उसका विधाता है॥


यह कैसा दस्तूर हैं ? " डॉलर के मुक़ाबले रुपया मजबूत '' होने से शेयर मार्केट यानि व्यापारियों की दिवाली हैं तो किसानों की बदहाली हैं ! समझ नहीं आता की इसके लिए सरकार की शान मे कसीदे काढ़े या उसे कोसे ?
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मैं मीडिया का ऐसी महत्वपूर्ण जानकारी देने के लिए धन्यवाद करता हूँ | अगर मीडिया ऐसी जानकारी न दे तो हम ऐसे महत्वपूर्ण ज्ञान से महरूम रह जाए | मुझे समझ नहीं आता की यह मीडिया ऐसी खबरों से हमे क्या सबक देना चाहती हैं ?


ऐसी खबरों से ही पता चलता हैं की पूंजीवाद कितना हावी हैं | देश मे किसान कहीं धान की कीमत को ले कर आंदोलन कर रहा हैं तो कहीं गन्ने की बकाया रकम को ले कर परंतु उन मज़लूमों की लिखते वक़्त इस षड्यंत्रकारी मीडिया की स्याही सूख जाती हैं ....

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सत्ता मे आने से पहले स्वामीनाथन रिपोर्ट को ले कर पूरा ड्रामा किया गया था और अब सत्ता मे आने पर संसाधनो की कमी का ड्रामा शुरू कर दिया | चलो इनकी मान ली की पिछली सरकार खजाना खाली कर गई और इस सरकार के पास अभी इतना धन नहीं हैं की इस रिपोर्ट को लागू किया जा सके | पर सवाल यह हैं की सरकारी खज़ानो की भरपाई किसान कब तक करता रहेगा ? इसमे किसान का क्या कसूर हैं ? ये संसाधन जिनका रोना मंत्री जी रो रहे हैं इन्हे जुटाने के लिए क्या मंत्री जी के पास कोई तदवीर हैं ? मंत्री जी यह और बता दे की ये संसाधन वह कैसे और कब तक जुटा लेंगे ? वैसे नेता जी चुनाव से पहले यह कहते रहे हैं की हरियाणा सरकार पर कर्जा हैं खजाना खाली हैं , उस वक़्त तो नेता जी ने किसान को यह नहीं बताया की यदि हम सत्ता मे आए तो यह रिपोर्ट हम संसाधन जुटाने के बाद ही लागू कर पाएंगे |
हरियाणा मे चुनाव से पहले जब पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने धान की कीमत के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखा था तो इस पर प्रधानमंत्री मोदी ने उल्टा राज्य सरकार को इसके लिए ज़िम्मेवार बताया था | कहा था की राज्य सरकार की 4% मार्केट फीस इसके लिए ज़िम्मेवार हैं | चुनाव के बाद राज्य मे भाजपा की सरकार आई तो सोचा की यह सरकार अपनी पहली कैबिनेट मीटिंग मे सबसे पहला फैसला मार्केट फीस खत्म कर किसान के हक मे लेगी | परंतु नई सरकार की पहली कैबिनेट मीटिंग मे किसान के हक मे जो फैसला लिया वो बड़ा ही अजीब था | मीडिया मे आया की " सरकार ने कैबिनेट मीटिंग मे धान की कीमत को ले कर लिया बड़ा फैसला , अगली कैबिनेट मीटिंग मे इस पर विचार कर लिया जाएगा फैसला " ! यह कैसा बड़ा फैसला था ? अब अगली मीटिंग तक बेचारे किसान को इनकी तरफ मुह बाए ताकना पड़ेगा | इस बीच यदि बरसात आने से मंडियो मे पड़ा धान खराब हो जाए तो उसके नुकसान का ज़िम्मेवार कौन होगा ? किसान को उसकी भरपाई कैसे और कौन करेगा ?

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यहाँ अगर अभी भी कुछ मोदी समर्थक भाइयो का अपने किसानो की दयनीय स्थिति पर खून नहीं खोलता तो बड़े शर्म की बात है ! ऐसे तो देश का विकास हो ना हो पर किसानो का विनाश तय है !
 
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