फ़ौजी का नया नया ब्याह होया था , छोरी नीरी अनपढ थी.
गाम मै १०-१२ दिन लिकड गये रिश्तेदारी मैं, छोरी ने सारे घर का काम भी सम्भाल लिया.
एक दिन फ़ौजी सवेरे सवेरे अपनी लुगयी ते बोल्या , चाल तन्ने हनीमून पे ले चालू,
छोरी बोली.. रह्न दे भैंस की सानी भेनी सै, तेरे बाबू की रोटी करनी सै, घणे ए काम सै
तु न्यू कर अक दादी ने ले जा पडी पडी दुखी हो जा सै अकेली, उसने कद्दे हनीमून देखा भी ना होगा....
गाम मै १०-१२ दिन लिकड गये रिश्तेदारी मैं, छोरी ने सारे घर का काम भी सम्भाल लिया.
एक दिन फ़ौजी सवेरे सवेरे अपनी लुगयी ते बोल्या , चाल तन्ने हनीमून पे ले चालू,
छोरी बोली.. रह्न दे भैंस की सानी भेनी सै, तेरे बाबू की रोटी करनी सै, घणे ए काम सै
तु न्यू कर अक दादी ने ले जा पडी पडी दुखी हो जा सै अकेली, उसने कद्दे हनीमून देखा भी ना होगा....