एक बै अपने हरियाने का एक फौजी जवान आपने अफसर { सी. ओ. साहब } धोरे गया और बोल्या -- साहब मन्नै छुट्टी दे दयो, घर मैं बहुत जरुरी और अमरजंसी काम आ गया है.
सी. ओ. साहब बोल्या -- तन्नै अभी छुट्टी कोन्या मिल्लै, मैं पहले तेरे घर बात करूँगा फेर देखूंगा, तू सुबह १० बजे आना.
जवान सुबह १० बजे पहुँच लिया.
सी. ओ. साहब बोल्या -- तू झूठ बोलता है, मन्नै तेरे घर पै तेरी लुगाई तै बात करी थी, उसने कही के तन्नै घर पै कोई जरुरी काम नही है.
जवान बोल्या -- जी, छुट्टी दो या ना दो आपकी मर्ज़ी, पर झूठे तो आप मुझ से भी बड़े हो.
सी. ओ. साहब गुस्से मै बोल्या -- कैसे ?
जवान -- जी जब मेरी शादी ही ना होली है अब तक, तो आपने बात के अपणी बुआ तै करी थी.:rock
सी. ओ. साहब बोल्या -- तन्नै अभी छुट्टी कोन्या मिल्लै, मैं पहले तेरे घर बात करूँगा फेर देखूंगा, तू सुबह १० बजे आना.
जवान सुबह १० बजे पहुँच लिया.
सी. ओ. साहब बोल्या -- तू झूठ बोलता है, मन्नै तेरे घर पै तेरी लुगाई तै बात करी थी, उसने कही के तन्नै घर पै कोई जरुरी काम नही है.
जवान बोल्या -- जी, छुट्टी दो या ना दो आपकी मर्ज़ी, पर झूठे तो आप मुझ से भी बड़े हो.
सी. ओ. साहब गुस्से मै बोल्या -- कैसे ?
जवान -- जी जब मेरी शादी ही ना होली है अब तक, तो आपने बात के अपणी बुआ तै करी थी.:rock