Gangs of Najafgarh

jitender_singh

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देश की राजनीतिक सत्ता के केंद्र और आर्थिक-सामाजिक तरक्की की मिसाल राजधानी दिल्ली में एक ऐसा इलाका भी है, जहां 23 साल पहले लगी गैंगवॉर की आग आज तक नहीं बुझी है। जमीन-जायदाद के लिए खत्म हो चुके परिवारों का अंजाम देखने के बावजूद साउथ वेस्ट दिल्ली के नजफगढ़ इलाके के नौजवानों में अपने परिवार के सदस्यों की हत्याओं का बदला लेने का जुनून खत्म नहीं हो रहा है। करोड़ों की जमीन-जायदाद वाले लड़के सुकून भरी जिंदगी से ज्यादा तरजीह प्रतिशोध से भरी हत्याओं को दे रहे हैं।

1992 में हुई गैंगवॉर की शुरुआत
पूर्व एमएलए भरत सिंह हत्याकांड के बाद क्राइम ब्रांच ने बताया कि उनका मर्डर 2002 में सोनीपत में हुए ट्रिपल मर्डर का बदला था। दरअसल, इस खूनी जंग की शुरुआत 2002 में नहीं, बल्कि 1992 में हुई थी। उन दिनों जमीन के रेट बढ़ने शुरू हो गए थे। प्रॉपर्टी का बिजनस शुरू हो रहा था। फसलों की पैदावार बढ़ गई थी और यहां के खेत केशोपुर मंडी के आढ़तियों के ठिकाने भरने लगे थे, जिससे आने वाली रकम से गांवों की जिंदगी बदल रही थी।

दिचाऊं कलां में रहने वाले सूरजमल प्रधान और रामनिवास पहलवान उर्फ रामी के घर आसपास थे। दोनों के पास 100-150 बीघा जमीन थी। खेती के साथ दोनों प्रॉपर्टी का बिजनस भी कर रहे थे। रामी पहलवानी करते थे और कहा जाता है कि वह अकड़ से रहते थे। 1992 में नजफगढ़ में रामी पहलवान और उनके दोस्त रोहताश का गोलियां मार कर मर्डर कर दिया गया। यही वारदात गैंगवॉर की शुरुआत थी। इस डबल मर्डर ने हत्याओं और एनकाउंटरों का वह सिलसिला शुरू किया, जिसने दिल्ली, हरियाणा और यूपी में तीन दर्जन से ज्यादा नौजवानों के जीवन का अंत कर दिया और कितने परिवारों को एक-दूसरे का जानी दुश्मन बना दिया। दादाओं, पिताओं, भाइयों, मामाओं और फूफाओं की हत्याओं के बदले में मर्डर किए जा रहे हैं।



एक के बाद एक मर्डर
एनबीटी के पास मौजूद दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के सीक्रिट दस्तावेजों के मुताबिक, रामी के भतीजे कृष्ण पहलवान का झगड़ा सुल्तानपुरी के नजदीक स्थित कराला के जयबीर से हो गया था। जयबीर मितराऊं के बलराज का दोस्त था। कृष्ण पहलवान ने राजेश नाहरीवाला और जयबीर डोगरा के साथ जयबीर कराला का मर्डर कर दिया। स्पेशल सेल के रिकॉर्ड के अनुसार, अपने दोस्त की हत्या की वजह से बलराज ने कृष्ण पहलवान के चाचा रामी का मर्डर किया था।
 
दूसरी ओर, रामी पहलवान के भाई जयसिंह के परिवार को यकीन था कि रामी से जलन की वजह से उनकी हत्या उनके पड़ोसी सूरजमल प्रधान ने मितराऊं के बलराज, गुड़गांव के दिसोर खेडी के जग्गी और दिचाऊं कलां के पिन्नी को मुखबिरी देकर कराई है। जयसिंह का 21 साल का बड़ा बेटा कृष्ण कुमार इस वारदात से पहले बापरोला के पास सीआरपीएफ के बने कैंप में बलराज और इलाके के लड़कों के साथ पहलवानी किया करता था, इसलिए लोग उसे कृष्ण पहलवान कहने लगे थे।

बढ़ते गए दुश्मन
दिचाऊं कलां के दो परिवारों में जन्मी दुश्मनी में अब मितराऊं का ऐंगल भी जुड़ रहा था। रामी के मर्डर से पहले बलराज अपने गांव मितराऊं के लाला और ईसरहेडी निवासी ब्रह्म के साथ इस इलाके में भाईगीरी कर रहा था। उसने अरबिंदो कॉलेज के एक छात्र का भी मर्डर कर दिया था। बलराज के अविवाहित चाचा की जमीन में मितराऊं निवासी बलवान सिंह फसल बोते थे। बलराज के चाचा की मौत के बाद बलराज के पिता सूरत सिंह ने बलवान सिंह से वह 15 बीघा जमीन छोड़ने के लिए कहा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। दरअसल, ढांसा रोड पर स्थित यह जमीन उस समय बेशकीमती हो चुकी थी। स्पेशल सेल के रिकॉर्ड के मुताबिक, बलवान सिंह ने बलराज के साथ कृष्ण पहलवान की दुश्मनी में अपने लिए मौका देखा। उन्होंने कृष्ण पहलवान का साथ देने का फैसला किया। दोनों परिवारों में गैंगवॉर शुरू होने के सभी हालात अब बन चुके थे।


पहला हमला मार्च 1997 में बलराज और उसके बड़े भाई अनूप पहलवान ने किया। नजफगढ़ पुलिस के रिकॉर्ड के मुताबिक, इन दोनों ने अपने खानदानी भाई सम्पूरण सिंह के साथ मिलकर, दिचाऊं कलां जा रहे बलवान सिंह और उनके साले अनिल निवासी धूलसिरस को गोलियां मार दी। अनिल की मौत हो गई और बलवान सिंह बुरी तरह घायल हो गए। अनूप, बलराज और सम्पूरण सिंह गिरफ्तार हुए। बलवान सिंह का बड़ा बेटा कपिल गहलोत यह वारदात सहन नहीं कर पाया। उसने बलराज के दुश्मन कृष्ण पहलवान से हाथ मिला लिया। तीन अप्रैल 1998 को वेस्ट दिल्ली के ककरोला में बलराज सिंह की हत्या कर दी गई। तब यह इलाका जनकपुरी थाने के तहत था। बलराज के मर्डर में कृष्ण पहलवान गिरफ्तार किए गए।

पुलिस के एनकाउंटर
अब बलराज गैंग की कमान उसके बड़े भाई अनूप पहलवान ने अपने हाथ में लेकर 12 जुलाई 1998 को कपिल गहलोत के पिता बलवान सिंह का मर्डर मितराऊं में कर दिया। उसने कृष्ण पहलवान के रिश्तेदारों और दोस्तों समेत छह और बेगुनाह मार डाले। कपिल जमानत पर बाहर आया। उसने आधुनिक हथियार खरीदे और गिरोह में नौजवान शामिल किए, लेकिन 13 सितंबर 1999 को अनूप गिरोह ने कपिल के भाई कुलदीप उर्फ गुल्लू की हत्या कर दी।
 
कपिल गहलोत ने इसका बदला उसी दिन चुकाया। उसने अनूप के भतीजे यशपाल उर्फ बबलू का मर्डर कर दिया। अनूप सिंह गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन भाई की मौत के बाद बदले की आग से भरे कपिल गहलोत ने लगातार हत्याएं करना शुरू कर दिया। उसका मामा ऋषिपाल 1989 में दिल्ली पुलिस में भर्ती होकर 1992 में बर्खास्त हो चुका था। उसकी गिरफ्तारी पर 15 हजार रुपए का इनाम था। उसके भाई अनिल का मर्डर कर अनूप-बलराज ने गैंगवॉर की शुरुआत की थी। 1999 में स्पेशल सेल में राजबीर सिंह एसीपी बनाए गए थे। उनकी टीम ने 25 मई 2000 को ऋषिपाल और जितेंद्र जीतू निवासी झडौदां कलां को कथित एनकाउंटर में मार दिया। उन्होंने 10 अगस्त 2000 की रात मोदी नगर में अपने जानकार के घर में सो रहे कपिल गहलोत को भी कथित एनकाउंटर में मार डाला।

अभी सुलग रही है चिंगारी
अनूप सिंह जेल में बंद था। 2003 में रोहतक कोर्ट में पेशी पर आए अनूप की हत्या पुलिस कस्टडी में कर दी गई। स्पेशल सेल का दावा है कि उसे कृष्ण पहलवान के शूटर महावीर डॉन और उसके साथियों ने मारा था। माना जा रहा था कि अब गैंगवॉर रुक जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 2002 में सोनीपत में शादी में गए दिचाऊं कलां के सूरजमल प्रधान, उनके बेटे सुखबीर और नारायण सिंह का मर्डर कर दिया गया था। सूरजमल के बेटे उदयवीर के परिवार का दावा है कि यह ट्रिपल मर्डर भरत सिंह ने अपने भाई कृष्ण पहलवान के शूटरों से कराया था, क्योंकि वह दोनों अपने चाचा रामी पहलवान का बदला लेना चाहते थे। अब 29 मार्च को सुखबीर के बेटे हेमंत ने भरत सिंह की हत्या कर दी है। पुलिस और इस इलाके के लोगों को आशंका है कि इस गैंगवॉर में आइंदा भी वारदात हो सकती हैं।
 
aakhira kab khatam hoga yeh gangwar jsimain ab tak kitne hi JAT bhai maare ja chuke hain , I think Palam khap of delhi should intervene in resolving it.

ar yeh acp rajbir singh woh hi hai rewari waala rajbhir singh yadav jiska property dealer ne gurgaon main murder kar diya tha .
 
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