Gazals "The Finest Ever"

Jagjit Singh ki kuchh behtreen gazal. specialy no. 4

1. jaao na tum en khushk aakhon par hum raaton mein ro le hain..

http://www.youtube.com/watch?v=ow-PxFsPp7c

2. Mere Dil Mein tu hi tu hai...

http://www.youtube.com/watch?v=ynQ98TMoLXQ

3. KABHI YUN BHI AA MERI AANKH MEIN...

http://www.youtube.com/watch?v=N2wCU8Jaen8

4. Koi Samjhe Ga Kya Raze Gulshan

http://www.youtube.com/watch?v=PD862561WxQ

Bhai maza aagaya .. weekend pe to intana badhiya time-pass kabhi nahi hua !! :)
 
कोई झंकार है, नग़मा है, सदा है क्या है ?
तू किरन है, के कली है, के सबा है, क्या है ?

तेरी आँख़ों में कई रंग झलकते देख़े
सादगी है, के झिझक है, के हया है, क्या है ?

रुह की प्यास बुझा दी है तेरी क़ुरबत ने
तू कोई झील है, झरना है, घटा है, क्या है ?

नाम होटों पे तेरा आए तो राहत-सी मिले
तू तसल्ली है, दिलासा है, दुआ है, क्या है ?

होश में लाके मेरे होश उड़ाने वाले
ये तेरा नाज़ है, शोख़ी है, अदा है, क्या है ?

दिल ख़तावार, नज़र पारसा, तस्वीरे अना
वो बशर है, के फ़रिश्ता है, के ख़ुदा है, क्या है ?

बन गई नक़्श जो सुर्ख़ी तेरे अफ़साने की
वो शफ़क है, के धनक है, के हिना है, क्या है ?
 
बशीर बद्र



अब तेरे मेरे बीच कोई फ़ासला भी हो
हम लोग जब मिले तो कोई दूसरा भी हो

तू जानता नहीं मेरी चाहत अजीब है
मुझको मना रहा हैं कभी ख़ुद खफ़ा भी हो

तू बेवफ़ा नहीं है मगर बेवफ़ाई कर
उसकी नज़र में रहने का कुछ सिलसिला भी हो

पतझड़ के टूटते हुए पत्तों के साथ-साथ
मौसम कभी तो बदलेगा ये आसरा भी हो

चुपचाप उसको बैठ के देखूँ तमाम रात
जागा हुआ भी हो कोई सोया हुआ भी हो

उसके लिए तो मैंने यहाँ तक दुआएँ कीं
मेरी तरह से कोई उसे चाहता भी हो

इतरी सियाह रात में किसको सदाएँ दूँ
ऐसा चिराग़ दे जो कभी बोलता भी हो


 
साग़र सिद्दीकी

है दुआ याद मगर हर्फ़-ए-दुआ याद नहीं
मेरे नग़्मात को अंदाज़-ए-नवा याद नहीं

मैं ने पलकों से दर-ए-यार पे दस्तक दी है

मैं वो साहिल हूँ जिसे कोई सदा याद नहीं

मैं ने जिन के लिये राहों में बिछया था लहू

हम से कहते हैं वही अहद-ए-वफ़ा याद नहीं

कैसे भर आईं सर-ए-शाम किसी की आँखें

कैसे थर्राए चराग़ों की ज़िया याद नहीं

सिर्फ़ धुंधलाई सितारों की चमक देखी है

कब हुआ कौन हुआ किस से ख़फ़ा याद नहीं

ज़िन्दगी जब्र-ए-मुसलसल की तरह कटती है

जाने किस जुर्म की पाई है सज़ा याद नहीं

आओ इक सज्दा करें आलम-ए-मदहोशी में

कहते हैं के "साग़र" को ख़ुदा याद नहीं
 
मोमिन

असर उसको ज़रा नहीं होता ।
रंज राहत-फिज़ा नहीं होता ।।

बेवफा कहने की शिकायत है,
तो भी वादा वफा नहीं होता ।

जिक़्रे-अग़ियार से हुआ मालूम,
हर्फ़े-नासेह बुरा नहीं होता ।

तुम हमारे किसी तरह न हुए,
वर्ना दुनिया में क्या नहीं होता ।

उसने क्या जाने क्या किया लेकर,
दिल किसी काम का नहीं होता ।

नारसाई से दम रुके तो रुके,
मैं किसी से खफ़ा नहीं होता ।

तुम मेरे पास होते हो गोया,
जब कोई दूसरा नहीं होता ।

हाले-दिल यार को लिखूँ क्यूँकर,
हाथ दिल से जुदा नहीं होता ।

क्यूं सुने अर्ज़े-मुज़तर ऐ ‘मोमिन’
सनम आख़िर ख़ुदा नहीं होता ।

राहत फ़िज़ा--शांति देने वाला, ज़िक्र-ए-अग़यार--दुश्मनों की चर्चा
हर्फ़-ए-नासेह--शब्द नासेह (नासेह-नसीहत करने वाला)
यार--दोस्त-मित्र, चारा-ए-दिल--दिल का उपचार,
नारसाई--पहुँच से बाहर, अर्ज़ेमुज़्तर--व्याकुल मन का आवेदन
 
Kayee dino bad yaha aaya hu, or aate hi yeh sab dekhkar ji saa aa gaya.
Shukriya is mehfil ko rangeen banane ke liye!!
असर उसको ज़रा नहीं होता ।
रंज राहत-फिज़ा नहीं होता ।।

बेवफा कहने की शिकायत है,
तो भी वादा वफा नहीं होता ।

जिक़्रे-अग़ियार से हुआ मालूम,
हर्फ़े-नासेह बुरा नहीं होता ।

तुम हमारे किसी तरह न हुए,
वर्ना दुनिया में क्या नहीं होता ।

उसने क्या जाने क्या किया लेकर,
दिल किसी काम का नहीं होता ।

नारसाई से दम रुके तो रुके,
मैं किसी से खफ़ा नहीं होता ।

तुम मेरे पास होते हो गोया,
जब कोई दूसरा नहीं होता ।

हाले-दिल यार को लिखूँ क्यूँकर,
हाथ दिल से जुदा नहीं होता ।

क्यूं सुने अर्ज़े-मुज़तर ऐ ‘मोमिन’
सनम आख़िर ख़ुदा नहीं होता ।

राहत फ़िज़ा--शांति देने वाला, ज़िक्र-ए-अग़यार--दुश्मनों की चर्चा
हर्फ़-ए-नासेह--शब्द नासेह (नासेह-नसीहत करने वाला)
यार--दोस्त-मित्र, चारा-ए-दिल--दिल का उपचार,
नारसाई--पहुँच से बाहर, अर्ज़ेमुज़्तर--व्याकुल मन का आवेदन
 
इस्मत ज़ैदी

है दुनिया की कुछ परवा ,न कुछ अच्छा बुरा जाने
कोई समझे क़लंदर(फ़क़ीर)उस को और कोई गदा(भिखारी)जाने

मदद से असलहों की जो दुकां अपनी चलाता है
मुहब्बत, दोस्ती, एहसास, जज़्बा, फ़िक्र क्या जाने?

जिया जो दूसरों के वास्ते है बस वही इंसां
कि अपने वास्ते जीने को वो अपनी क़ज़ा(मृत्यु) जाने

फ़राएज़ (कर्तव्य) की जगह ऊँची न होगी जब तलक हक़ से
तो दुनिया भी तेरी बातों को गूंगे की सदा जाने

सऊबत(कष्ट) http://www.kavitakosh.org/kk/index.php?title=...जीने_की_अदा_जाने_/_इस्मत_ज़ैदी#cite_note-5 ज़िंदगी का हर सबक़ ऐसे सिखाती है
कि नादारी(ग़रीबी) में भी इंसान जीने की अदा जाने

नज़र में उन की गर मज़हब है इक शतरंज का मोहरा
तो फिर अंजाम कैसा, क्या, कहाँ होगा ख़ुदा जाने

वफ़ादारी ही जिस की ज़ात का हिस्सा रही बरसों
मगर ये क्या हुआ कि आज वो इस को सज़ा जाने

न जाने किस ज़माने में ’शेफ़ा’ वो शख़्स जीता है
जो ख़ुद्दारी, रवादारी(उदारता), मिलनसारी, वफ़ा जाने
 
Gulaam ali


http://www.youtube.com/watch?v=gi-hS8K1NBk

Sochtay aor jagtay saanso ka Eik dariya hoo mein

Apnay Gum Gashta Kinaro kay liya behta hoo main


Jal gaya saara badan inn mausamon ki aag mein,
ek mausam rooh ka hai, jismein ab zinda hoon main

Mere honton ka tabassum de gaya dhoka tujhe,
tu ne mujhko baag jaana, dekh le sehera hoon main

Dekhiye meri pazeerai ko ab aata hai kaun
lamha bhar ko waqt ki dehleez par aaya hoon main
​
 
तुफ़ैल चतुर्वेदी

1.
काश उससे मेरा फ़ुरकत का ही रिश्ता निकले
रास्ता कोई किसी तरह वहाँ जा निकले

लुत्फ़ लौटायेंगे अब सूखते होठों का उसे
एक मुद्दत से तमन्ना थी वो प्यासा निकले

फूल-सा था जो तेरा साथ, तेरे साथ गया
अब तो जब निकले कभी शाम को तन्हा निकले

हम फ़क़ीराना मिज़ाजों की न पूछो भाई
हमने सहरा में पुकारा है तो दरिया निकले

पहले इक घाव था अब सारा बदन छलनी है
ये शिफ़ा बख्शी, ये तुम कैसे मसीहा निकले

मत कुरेदो, न कुरेदो मेरी यादों का अलाव
क्या खबर फिर वो सुलगता हुआ लम्हा निकले

हमने रोका तो बहुत फिर भी यूँ निकले आँसू
जैसे पत्थर का जिगर चीर के झरना निकले


2.
किसी को अपना करीबी शुमार क्या करते
वो झूठ बोलते थे, एतबार क्या करते
पलट के लौटने में पीठ पर लगा चाकू
वो गिर गया था तो फिर उस पे वार क्या करते
गुज़ारनी ही पड़ी साँसें पतझड़ों के बीच
जो तू नहीं था तो जाने-बहार क्या करते
दीये जलाना मुहब्बत के अपना मज़हब है
हम ऐसे लोग अँधेरे शुमार क्या करते
खयाल ही नहीं आया, है जख़्म-जख़्म बदन
जो चाहते थे तुझे खुद से प्यार क्या करते
मिज़ाज अपना है तूफ़ाँ को जीतना लड़कर
उतर गया था वो दरिया तो पार क्या करते
कुछ एक दिन में ग़ज़ल से लड़ा ही लीं आँखें
तमाम उम्र तेरा इंतजार क्या करते
 
Last edited:
Everyone listened Mohd. Rafi's filmi song.here I am sharing some gazals sung by Mohd. Rafi.

1. muddat howe hai....

http://www.youtube.com/watch?v=erKSQbejxU0

2. kitni raahat hai dil toot jaane ke baad....

http://www.youtube.com/watch?v=oKvCmyEVSsM

3. diya hai dil agar....

http://www.youtube.com/watch?v=0Fo_p2xMGu0

4. tod do ahad e mohabbat...

http://www.youtube.com/watch?v=X__tCQvQ04A

5. ek hi baat jamane ki...

http://www.youtube.com/watch?v=XC09jIESHU8

6. Pyar kisi ka gaata hai....

http://www.youtube.com/watch?v=i4uZpXPzmR4

7. dard e minnat kash e dawa na hua....

http://www.youtube.com/watch?v=8c213rkrQfA
 
mehandi hasan--- Ranjish hi sahi

http://www.youtube.com/watch?v=cgKDqh2ccuU


रंजिश ही सही, दिल ही दुखाने के लिए आ
आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ

कुछ तो मेरे पिन्दार-ए-मोहब्बत (प्रेम का गर्व) का भरम रख
तू भी तो कभी मुझको मनाने के लिए आ

पहले से मरासिम (प्रेम-व्यहवार ) न सही, फिर भी कभी तो
रस्मों-रह दुनिया ही निभाने के लिए आ

किस किस को बताएँगे जुदाई का सबब हम
तू मुझ से ख़फ़ा है, तो ज़माने के लिए आ

इक उम्र से हूँ लज़्ज़त-ए-गिरिया ( रोने का स्वाद ) से भी महरूम
ऐ राहत-ए-जाँ मुझको रुलाने के लिए आ

अब तक दिल-ए-ख़ुशफ़हम को तुझ से हैं उम्मीदें
ये आखिरी शमएँ भी बुझाने के लिए आ
 
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