Ghantaghar

sandeep5

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घंटाघर भई घंटाघर,
घंटाघर में ४ घडी
चारो में जंजीर पड़ी
घंटा जब भी बजता था
खड़ा मुसाफिर हँसता था
हँसता था भाई बेधड़क
आगे देखो नई सड़क
नई सड़क पे बुआ बाजरा
आगे देखो शहर शाहदरा
शहर शाहदरा में लग गयी आग
आगे देखो गाज़ियाबाद
गाज़ियाबाद में हूई लड़ाई
उसमे से निकले ३ सिपाही
३ सिपाहियों ने बाँधी पुडिया
उसमे से निकली दद्दो बुढिया
दद्दो बुढिया ने काता सूत
उसमे से निकला कमला पूत
कमला पूत ने रेल चलाई
रेल चलेगी झटके से पैसा लेकी खटके से
और ये कविता ख़तम हो गयी फटके से


:boxing
 
jab ye chote baccho ke liye hai to aapko note karne ki kya jarurt hai yaad hi ho jani chiye fer to...........................:)



Baccho ke liye jo cheez hoti hain, aajkal unhe hi yaad karna mushkil hai baaki to yaad ho ja hain..............
nahi te ek bar try kar ke dekh lyo..... :)
 
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