gulguley

ravinderjeet

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एक बे गोधू चमार आपने जमींदार के घरां गया एर उड़े ऊ ताहि जाटनी ने गुल गुले खावन ने दे दिए | घरां आके आपनी घराली नु बोल्या वे-ए बना | चमारी बोली वे-ए के बनाऊँ | पर चमार के गुल्गुल्याँ का नाँ याद कोणी आया एर छो में आके आपनी घर आली के करड़े मार दिए | एर ऊका मुंह सूज ग्या | जब चमार-चमारी खेताँ में ना पोंचे तो जाटनी उनके घरां आई अक के बात होई इब्ब ताहि वे क्यों नि आये | जाटनी ने चमारी नु देखतें-ए बिली आरे गोधू तने यो के कर राख्या स आपनी बहु का | मार -मार के ई के गाल गुल गुले से कर दिए | गोधू बोल्या --- अल जब में नु-ए तो कहू था गुल-गुले तार दे पल मेली सासू की ने तारे तो कोणी |
 
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