शहीदों का पैगाम
आज ही के दिन जब आसमान में तिरंगा लहराया
हम सबको अपने हिन्दुस्तानी होने पर नाज आया ॥
शहीदों ने अपने लहू से लिख डाले पन्ने इतिहास के
तब कहीं जाके हमने आज़ादी का हसीं मुकाम पाया ॥
उनकी दीवानगी की भी हद थी वतन की मोहब्बत में
फांसी के तख्ते पर जिन्होंने तराना-ऐ-इंकलाब गाया ॥
भारत माँ के आंचल पर जब भी पड़ी कोई बुरी नज़र
सरहद पर जांबाज़ जवानों के खून का सैलाब आया ॥
आँख उठा कर न देखने पाये कोई हिन्दुस्तान की तरफ़
'विजय' आज देश के नाम शहीदों का ये पैगाम लाया ॥
स्वतंत्रता दिवस पर सबको बहुत बहुत बधाई !