Hariyanvi Kavitayen- Try to create your own

pavrahi

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मन्ने उसका नाम ना बेरा
घर के सामने रहया करती
चबूतरे पे बैठ के पढ़ा करती
उसकी माँ मेरी माँ ते बोल्या करती
उसके छोटी बेबे मेरे भाई के साथ खेल्या करती
मन्ने उसका नाम ना बेरा
घर के सामने रहया करती
स्कूल उसका मेरे स्कूल के सामने
में सुबह पढ़ा करता वो शाम ने जाया करती
रास्ते में रोज मिला करती
में उसने देखता वो रस्ते ने देखती
मन्ने उसका नाम ना बेरा
घर के सामने रहया करती
एक दिन आया वे घर खाले करगे
चबूतरा में कबूतर उड़न लागे
रास्ते में बीरानी बढ़ गी
अर जिंदगी में एक याद !!!
मन्ने उसका नाम ना बेरा
घर के सामने रहया करती !!
 
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college ke din

कॉलेज के वो दिन थे इंजीनियरिंग पढ्या करते
मज़े में हर बात ने लिया करते !!
घर की चिंता कोन्या माँ बाप का डर गायब
दोस्तों की यारी में हम रहया करते !!
हॉस्टल में थे कमरे तेरह
हर कमरे में नया बसेरा !!
होली आई रोला हो गया
आला पूरा बरांडा हो गया
सीनियर आये लत्ते फाड वाये
पोचा लगा के बरांडा सुख्वाए !
रागिंग हो गयी, फ्रेशर हो गयी
हम भी नए पुराने हो लिए !!
कॉलेज के वो दिन थे इंजीनियरिंग पढ्या करते
मज़े में हर बात ने लिया करते !!

कमरे में एक साथी आया
खबर जोर की साथ में ल्याया
छोरी एक तनने देख्या करे
पिकनिक आयी बस भी आयी
छोरिया सारी बस में बेठी
बैठे छोरे सारे
सीट बस एक थी खाली
साथ बैठी थी कन्या हमारे वाली
बस चली, बात बढ़ी,
दोस्ती हुई, प्यार भी
कॉलेज के वो दिन थे इंजीनियरिंग पढ्या करते
मज़े में हर बात ने लिया करते !!
 
कॉलेज के दिन (contd.)

हवा चला करती ते मज़ा आया करता
बारिश होया करती दुगना हो जाया करता
गर्मी में भी परेशानी न थी
प्यार की सारी निशानी थी
मिला करते घूमा करते पढ़ा करते
बाते तो मन्ने ना बेरा कितनी किया करते
एक दिन न मिले ते बरस लगया करता
हर मुलाक़ात ने इबादत समझा करते
कॉलेज के वो दिन थे इंजीनियरिंग पढ्या करते
मज़े में हर बात ने लिया करते !!
 
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कॉलेज के दिन (contd.)

फिर वो दिन आ गया
माँ ते उसकी मिला गया
हाँ भी थी ना भी थी
राजनीती की बसात सी थी
आख़री इम्तिहान आया
पढाई खतम सी होगी
हम कुछ और दिन रुक गए
और घर नहीं गए
मिले, नाचे , गाये
आखरी कॉलेज के दिन बिताए
कॉलेज के वो दिन थे इंजीनियरिंग पढ्या करते
मज़े में हर बात ने लिया करते !!
 
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कॉलेज के दिन (contd.)

मन्ने आज भी ना बेरा
मेरे ते गलती के हुई
मन्ने आज भी न बेरा
बात बदल क्युकर गयी
तीन साल बीत गे
इंतजार के
फोन के घंटी लाखो बार बजी
मनपसंद आवाज एक बार न आयी
ईमेल लिख लिख के थक गया
जवाब में रीड रिसेप्ट तक ना आयी
कॉलेज के वो दिन थे इंजीनियरिंग किया करते
मज़े में हर बात ने लिया करते !!
 
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कॉलेज के दिन खतम हो गए
अब मैं काम किया करता था
कुछ यार दोस्तों के साथ
आराम किया करता था
दफ्तर जाने का बेरा था
आने का कुछ पता नहीं
काम निबटने का बेरा था
खाने का कुछ पता नहीं
सूरज डूबे चाँद निकले
अर चाँद भी छुप जाए पता नहीं
याद आ ना जाए किसी की
दिमाग काम में लगया रह था
कॉलेज के दिन खतम हो गए
अब मैं काम किया करता था !!
 
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कॉलेज के दिन खतम हो गए
अब मैं काम किया करया था
कुछ यार दोस्तों के साथ
आराम किया करता था
दफ्तर जाने का बेरा था
आने का कुछ पता नहीं
काम निबटने का बेरा था
खाने का कुछ पता नहीं
सूरज डूबे चाँद निकले
अर चाँद भी छुप जाए पता नहीं
याद आ ना जाए किसी की
दिमाग काम में लगया रह था
कॉलेज के दिन खतम हो गए
अब मैं काम किया करया था !!

Dil ko jhanjhod ke rakh de aisi tu kavita likhe.

Teri kavita ka sad end hoya dikhe.

.....cheers for new haryanvi poet pawan rathi.......keep it up .......
 
hey kuldeep thanks buddy for cheering up... but this is not ending..." कविता अभी बाकी है मेरे दोस्त"
कुछ तो गडबड है
समझ नहीं आता
बारिश का पानी
अब भिगोता तो है
पर हम आले क्यों नहीं होते
हवा भी चलती है
ठंडी कभी कभी
पर माथे का पसीना सूखता क्यों नहीं
दर्द अक्सर होता है जोरो से कहीं
पर बेरा क्यों मन्ने चालता नहीं
लोग आस पास होते हैं सारे
अकेलापन लेकिन छूटता क्यूँ नहीं
कुछ तो गडबड है
समझ नहीं आता !!
 
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फिर एक दिन उसका फोन आया
दर्द इ दिल उसने अपना सुनाया
जब दर्द दे के गयी थी
ते खुश कैसे रहती
सारी खुशियाँ रहते भी
दिल में उसके भी गम था
शादी हो गी थी बच्चे हो गे थे
फिर भी एहसास कम था
बाते हुई गिले शिकवे दूर हो गए
अच्छा होया हम मशहूर न हो गए
भर आया दिल इंतजार खतम हो गया
ज़ख्मो के समंदर का पतन हो गया
निशान बाकी हैं ज़ख्मों के दिल पे
तो शायरी निकल रही है.
कुछ तो होता है प्यार में दम
की जिंदगी निकल रही है !!
 
बारिश की बूंदों में यादों का सफर हो
टिप टिप की गूंजो में साथ हमसफर हो !!
पानी के साथ ही बह जाएँ गम सारे
कुछ ऐसा पानी के बहने का नियम हो !!
जहाँ गिर जाये काया पे सिला कर जाए
ज़ख्मों से ठंडा जिंदगी का रंग हो
न चिंता न फिकर हो न कोई डर हो
प्यार की दुनियां में अपना भी घर हो !!
 
दिल किसी से लगा के तो देखो !!

हाँ भाई ये इश्क है ,
फरमा के तो देखो
किसी को अपना
बना के तो देखो
दिल किसी से
लगा के तो देखो

हर रात किसी के सपनो में आओ
और किसी रात उन्हें भी बुलाओ
बनेगी ज़माने की दीवार बीच में
दीवारों को प्यार से गिरा के तो देखो

जहाँ में गर जीना हो जाए मुश्किल
अलग एक जहाँ बना के तो देखो
मज़ा जिंदगी का आएगा एक दिन
दिल किसी से लगा के तो देखो !!
 
इक बार दामन दागदार हो गया
मन्ने किये ते प्यार हो गया

फ़साना कुछ न्यू चाल्या
की भाई मन्ने बुखार हो गया

मिले और इकट्टे हो लिए
कुछ दिन हमने बीज बो लिए

फिर एक दिन ऐसा आया
सूरज उग्या ते सही पर ढल न पाया

हमसफ़र हमारे सफर में न था
मंजिलें गायब हो गयी

हम जो हो गए जुदा उनसे
दीपक से जैसे रौशनी खो गयी !!
 
कॉलेज के वो दिन थे इंजीनियरिंग पढ्या करते
मज़े में हर बात ने लिया करते !!
घर की चिंता कोन्या माँ बाप का डर गायब
दोस्तों की यारी में हम रहया करते !!
हॉस्टल में थे कमरे तेरह
हर कमरे में नया बसेरा !!
होली आई रोला हो गया
आला पूरा बरांडा हो गया
सीनियर आये लत्ते फाड वाये
पोचा लगा के बरांडा सुख्वाए !
रागिंग हो गयी, फ्रेशर हो गयी
हम भी नए पुराने हो लिए !!
कॉलेज के वो दिन थे इंजीनियरिंग पढ्या करते
मज़े में हर बात ने लिया करते !!

कमरे में एक साथी आया
खबर जोर की साथ में ल्याया
छोरी एक तनने देख्या करे
पिकनिक आयी बस भी आयी
छोरिया सारी बस में बेठी
बैठे छोरे सारे
सीट बस एक थी खाली
साथ बैठी थी कन्या हमारे वाली
बस चली, बात बढ़ी,
दोस्ती हुई, प्यार भी
कॉलेज के वो दिन थे इंजीनियरिंग पढ्या करते
मज़े में हर बात ने लिया करते !!




very nice .keep on posting
 
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