धारे र धारे
धर दे धरर -धरर
धार पे
एक किल्ला बाहिये
चार बे
किल्ले में गेहूँ हो घणा
फेर हांडइए बन्या- ठणा
( एक धारे था म्हारे गाम में , ऊह का ट्रेक्टर घणा खुड्का कर्या करदा , उहनू चिडाया करदे )
बोले मत रे बोले मत
बोले तो झिखे मत
झीखे तो चिडे मत
चिडे तो रोवे मत
रोवे तो मुंह धोवे मत
मुंह धोवे तो सोवे मत
सो गा तो ले जा गी पुलिस
पुलिस मारेगी डंडे
बोलेमत देवेगा अंडे
(म्हारे गाम में जितने बलमत(बलवंत सिंह ) थे उन् ने चिडाया करदे |
या देसवाल जी ने पहलम भी छाप राखी स ,थारी खातर फेर छापी जावे स |
आओ रै बाळको खेलांगे, दिल्ली जा कै बोलांगे
दिल्ली की दो रोटी, जीवैं म्हारी झोटी
झोटियां के पाळी, जीवैं म्हारे हाळी
हाळियां की जूत्ती, जीवैं म्हारी कुत्ती
कुत्तियां के पंजे, जीवैं म्हारे गंजे
गंज्यां के रोड़े, जीवैं म्हारे घोड़े
घोड़ां की काठी, जीवैं म्हारे हाथी
हाथियां के सूंड, जीवैं म्हारे भूंड
भूंड़ां की दांतरी. जीवैं म्हारी बांदरी
बांदरियां के चरखे, जीवैं म्हारे घरके
घरक्यां का राम, जीवै सारा गाम ॥
एक राजा था ,
एक राणी थी,
दोनु मरगे,
ख़तम हुई ,
कहाणी थी ,
तावली जो सो जा
वा बेटी श्यानी थी |
( जब छोटे बालक कहाणी सुणन की जिद्द करदे ,जब उन् ने भालोवन खातर कह्या करदे )
राजा जी की ,
चाली रेल ,
धक्कम पेल ,
धक्कम पेल ,
राजा जी ने जोड़े
ऊह में दो घोड़े ,
झटकम झटकाँ ,
चाली रेल ,
रानी बेठी ,
राजा बेठा ,
बेठा मंत्री ,
उनकी गेल ,
राजा जी के
लागी दाब
राजा उतर कें ,
लिया भाज ,
मंत्री भी हो लिया
गेल्याँ रेल ,
धक्कम पेल ,
धक्कम पेल ,
राजा जी की
चाली रेल