Hariyanvi Rhymes for children ( hariyanvi ) please contribute...

जा पहलम जा
गिल्मे आली में
मुंह धो कें आ
गिल्मे आली ताहि
कर भाजम दौड़
गिल्मे आली में
सड़ें गाम के पौड
श्ड्या-श्डाया
मुंह ले कें आ
गिल्मे आली में
मुंह धो कें आ
( गिल्मे आली म्हारे गाम का एक जोहड़ था,जिह में सारा गाम पौड षडाया करदा अर उह में तें भुंडी बांस आया करदी ,जब कोए बालक किम्मे खावन की चीज मंगदा तो उह ताहि या कह दिया करदे ,फेर वो कोणी मंगदा )
 
सांवलिया बाणिया
रूँगा दे ,
चाहे साबत दे
चाहे टुंडा दे
अच्छा दे
चाहे भुंडा दे
सांवलिया बाणिया
रूँगा दे
(म्हारे गाम में एक सांवलिया बाणिया था उह पे रूँगा मांग्या करदे ,इह में सांवालिये की थां होर किस्से का नाँ भी धर कें कह सके सें )
 
बाणीये की छोरी
गोल मटोल
बानिया करे
सौदे में रोल
बानियाँ की हेल्ली
में बड्डा झोल
छोटी ईंट अर
बाहरना गोल
बहरने में फंस्गी
गोल मटोल


( म्हारे गाम में एक बणिया था शायद उह का नाम हरिया था ,उह की छोरी ने देख कें ने चीडाया करदे,वा घणी मोटी थी )
 
सांप की-ए भाम्णी
भाम्णी ए भाम्णी
चितली आंगली लागण दे
बेड़ा पार लागण दे
जा पास हो जावांगे
लाडू पड़े ल्यावांगे
छिक-छिक के
तन्ने खुवावांगे


( जब पेपर दे के ने आया करदे तो इह के धिन्ग्ताने आंगली लावण की कोशिश कर्या करदे न्यू कह्या करदे अक जा सांप की भाम्णी के चितली आंगली ला दे तो पास हो जा )
 
ताई री ताई मेरा ताऊ बलाव!

सौड म ले क आऊ सा लैङाव!!
 
आटडे बाटडे
कान के काटडे
आड़े सी हाग्या
आड़े सी मुत्या
योह पा गया !!!!!
(ये कविता छोटे बाल्कां नु हाथां पे गुद-गुदी कर कें हँसान खातर कह्या करें )

A slightly changes version of the above:

आटे बाट्टे दही चट्ठाके गोरी माँ के काले बाछे
 
खेताँ में जावांगे
भाम्भोले खूब खावांगे
किते कचरी
अर किते फूट
जाम्न्याँ की माचरी लूट
मिट्ठी शक्कार्कंदी
काची-काची भिन्डी
कुकड़ीयाँ भी भुन्दी
कोंधरा तोड़ ल्यावांगे
खेताँ में जावांगे
भाम्भोले खूब खावांगे
 
तकती पे तकती
तकती पे आडू
तावला ले भाज
ना तेरे घुषंड पाडूँ


( बालक लड़दी हान आपस में दुसरे ने डरआण खातर कह्या कर दे )
 
ठाड़ा-ठाड़ा मिंह आया |
भर-भर चाले खाल |
कागज़ का जहाज बनाया |
मकोड़ा कप्तान बिठाया |
नदी बण गी गाल |
 
भुभलिया आया -भुभलिया आया
भुभलिये में मन्ने जूत बगाया
जूत में मन्ने पिस्सा पाया
पिस्से का मन्ने लाडू खाया




(जब भुभलिया आंदा तो उह में हाम जूती बगाया करदे ,न्यू कहाया करदे अक जा रेत की भरी जूती उह में मूधी पड़ जा तो उह रेत का पिस्सा बन जा गा ,पर इस्सा कदे भी होया कोणी )
 
चाचा ने
चाची को
चांदनी चौक में
चांदी की
चमच से
चपा चप
चने की
चटपटी
चटनी
चटाई
 
म्हारे बगड़ में लाकड
उह पे बेठा माकड
माकड खावे केला
बालक ने मार्या ढेला
माकड ने घाली घुड़की
बालक गये दुडकी
 
[FONT=Tahoma, Calibri, Verdana, Geneva, sans-serif]भडभुज्याँ के जावांगे [/FONT]
[FONT=Tahoma, Calibri, Verdana, Geneva, sans-serif]खील भुग्ड़े ल्यावांगे [/FONT]
[FONT=Tahoma, Calibri, Verdana, Geneva, sans-serif]उह तें दयांगे बस एक मुट्ठी [/FONT]
[FONT=Tahoma, Calibri, Verdana, Geneva, sans-serif]ना ते कर दयां उह की छुट्टी [/FONT]
[FONT=Tahoma, Calibri, Verdana, Geneva, sans-serif]फोड़ दयांगे उह का भाड़[/FONT]
[FONT=Tahoma, Calibri, Verdana, Geneva, sans-serif]तोड़ दयांगे उह की जाड [/FONT]
[FONT=Tahoma, Calibri, Verdana, Geneva, sans-serif][/FONT]
[FONT=Tahoma, Calibri, Verdana, Geneva, sans-serif][/FONT]
[FONT=Tahoma, Calibri, Verdana, Geneva, sans-serif]( कई बे जब भडभुजन घणे चने काढ लेंदी तो उह के सामी-ए गाण लाग जांदे ,तो वा धमका दिया करदी अर पर कम दाणे काढती )[/FONT]
[FONT=Tahoma, Calibri, Verdana, Geneva, sans-serif][/FONT]
 
झुजाँ के
रामलू के दादा
रलदू पे बुझांगे |


झुजाँ के
रामलू के काका
रामफल पे बुझांगे |



झुजाँ के
रामलू की काकी
बीरो पे बुझांगे |



झुजाँ के
रामलू के ताऊ
धीरे पे बुझांगे |



(या लोरी छोटे-छोटे बालकां ने पायां पे बिठा के झुलांदी हाण सुनाया करदे , बालक खेल भी लेन्दा अर उह के घर्क्याँ की पिछान भी हो जांदी उह ने ,अक कुण उह का के लागे स )
 
आपणी काण ,
घरां ले जा |
गु का ढोल,
भर्या ले जा ||


(जब कोए बालक झीख के ने आपने घरां चाल पड़े अर आपणी काण गेल्याँ ले जा ,तो उह ने गा के चीडाया करदे )
 
हार गा
पुकार गा
बिल्ली का गु
चाट गा




( या जब कह्या करदे जब कोए हार मान के ने खेलना छोड़ देंदे )
 
[FONT=Verdana, Arial, Tahoma, Calibri, Geneva, sans-serif]अमर सिंह मन्ने मरदा देख्या [/FONT]
[FONT=Verdana, Arial, Tahoma, Calibri, Geneva, sans-serif]धन सिंह मांगे भीख [/FONT]
[FONT=Verdana, Arial, Tahoma, Calibri, Geneva, sans-serif]आपां ते बुद्धू सिंह ही ठीक [/FONT]
[FONT=Verdana, Arial, Tahoma, Calibri, Geneva, sans-serif]आपां ते बुद्धू सिंह ही ठीक [/FONT]
[FONT=Verdana, Arial, Tahoma, Calibri, Geneva, sans-serif]
[/FONT]
[FONT=Verdana, Arial, Tahoma, Calibri, Geneva, sans-serif](असल में या एक कहावत स जो नाम में किम्मे नि धरया पे चाली होड़ स ,बालक ऊँए गाया करदे )[/FONT]
 
शक्कर भीजी
शक्कर भीजी
भिज्या गुड अर तेल
तेरा जोड़िया भाजता हंडे
भुंडी बणगी तेरी गेल
इतने काण ना उतरे थारी
तू घोड़ी बण म्हारी |

या कविता 'शक्कर भीजी " खेल खेल्दी हान कह्या करदे ( देखिये म्हारे जट्टू खेल तागा )
 
ताखी-ए ताखी
किम्मे छोड़े ना बाकी
चाहे चुहला हो
चाहे चाक्की
( या कह के ने ताखी (भेंगी ) छोरियां नु चिडाया करदे )
 
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