ravinderjeet
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नीलगाय का शिकार करते हुए ,भेडिये | १८८६ का एक दुर्लभ चित्र |
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गावड़ी नु चुचकार्दी एक जाटनी | सन --१९४५ |
Bahut Badhia Ravinderjeet.
Bhiwani side mein isane Bahal Manjholi kahya karde jab sadaken nahin thee us zamane mein yo badi mazedar aur shan ka pratik sawari ka sadhan mana jata tha!
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दुधाँ नहाओ , पुत्तां फलो |
सभी छोटे -बड़े भाईओं का ह्रदय की गहराइओं से धन्यवाद | में एक बात कहना चाहूँगा की ,में जाटलैंड को एक सामाजिक संस्था मानता हूँ और किसी भी सामाजिक संस्था में कभी भी उसके कार्यकर्ताओं में किसी भी तरह की प्रतियोगिता नहीं होनी चाहिए | प्रतियोगिता होने पर कार्य के निष्पादन पर गलत प्रभाव पड़ता हे | कोई भी सामाजिक संस्था उसके कार्यकर्ताओं के अपने सामर्थ्य और रूचि के अनुसार काम करने पर अधिक सफल होती हे और सुचारू रूप से चलती हे | ---- साद भावनाओं सहित |
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