Uncelji aapne 16 aane sach baat kahi hai,
ppl r running blindly after name, fame money in vein
as ultimate truth is this, One day we've to go empty hands....like we came!
Soul-satisfaction is the key thing!!
Salutations,
Rock on
Jit
ppl r running blindly after name, fame money in vein
as ultimate truth is this, One day we've to go empty hands....like we came!
Soul-satisfaction is the key thing!!
Salutations,
Rock on
Jit
dndeswal said:प्रथम पृष्ठ् पर मैने अपनी इच्छा लिखी थी - एक साधू का भाव । एक ख्वाहिश अवश्य है जिसे ईश्वर ही पूरी कर सकता है - यदि मुझे मनुष्य जन्म दुबारा मिले तो एक जाट के घर में ही मिले !
मनुष्य बनना चाह्ता है कुछ, और बन जाता है कुछ और ही । मैं चाह्ता था कि मैं किसी कालेज या विश्वविद्यालय में प्रोफेसर बनूं और कुछ बच्चों के कान ऐंठता रहूं । या फिर कर्नल मलिक की तरह फौज में कमांडर बनूं और एक दिन पूरी पलटन को सम्बोधित करूं - सावधान, तैयार हो जाओ, आज शाम तक लाहौर को फतह करना है !
पर आ गये सिविल नौकरी में ! कहते हैं भगवान जो करता है, ठीक ही करता है - सर्विस भी सरकारी, पैसे भी अच्छे मिलते हैं (विदेश में), सारी दुनियां भी घूम कर देख ली और थोड़ी बहुत सेवा आप लोगों की भी कर रहा हूं (हिन्दी मैं लिख कर) । मनुष्य को अधिक इच्छायें करनी भी नहीं चाहियें - यही दुख का मुख्य कारण होती हैं । इसलिये यह दोहा फिर लिख रहा हूं :
साईं इतना दीजिये जां में कुटुंब समाय ।
ना मैं भूखा रहूं, साधू खाली ना जाय ॥
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