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HONEY – The Super Medicine
Honey is the wonderful gift of nature. Its qualities are described in earliest known books including the Rigveda. Apart from India, other regions of the world also have the requisite knowledge about this sweet liquid. In Russian language, honey is called ‘Med’. Russian word ‘medved’ means “the honey-eater” (the wild bear/ grizzly). And ‘meditsin’ means "the honey product”. This word (‘meditsin’) was later absorbed into English as ‘medicine’
Our rural folk have more traditional knowledge about honey than our city elite. It is a common knowledge among villagers that pure Desi ghee and pure honey always carry the same selling-rate.
The following excerpts have been picked up from the book “Madhu” written by late Swami Omanand, the great Jat leader and an Ayurvedic doctor of repute.
This thread is the last in this series (after NEEM , PEEPAL, BADD and AAK.)
(If you do not see Devanagari script below this line, you need to install ‘Mangal’ font on your computer. See my thread Tips for use of Hindi on your computer in Tech Talk forum or download it from this link.)
ॐ
मधु (शहद)
परमपिता परमात्मा की कृपा से अनेक गुणकारी वस्तुऐं हमें ऐसी प्राप्त हुईं हैं जिन्हें हम अमृत नाम दे सकते हैं । जैसे मधु (शहद) जीवन में सबको अमृतपान करा देता है । यह आबाल, वृद्ध, सभी आयु वर्ग के लिए समान रूप से सुपाच्य और शक्तिवर्धक है । स्वास्थ्यप्रद होने से मधु में रोग निवारण शक्ति भी विद्यमान है । इसी कारण आयुर्वैदिक चिकित्सा पद्धति में मधु को विशेष स्थान दिया गया । भगवान ने छोटी मधुमक्खियों को जन्म दिया और उनको वह शक्ति प्रदान की कि सहस्रों फूलों से रस चूस-चूसकर उन्होंने एक स्वादिष्ट सन्तुलित आहार की रचना कर डाली । उसने जहां मधु को स्वास्थ्यवर्धक बनाया, साथ ही मधु में रोग निवारण की अद्भुत शक्ति उसने प्रदान कर डाली । शहद का रंग-रूप और गंध भी आकर्षक है । इसमें शक्तिप्रद शर्करा, अतिरिक्त लोहा, तांबा, फासफोरस, पोटाशियम, कैल्सियम सहित अनेक खनिज तत्त्वों, प्रोटीन तथा विटामिन बी एवं सी सहित कुछ अन्य विटामिनों का ऐसा विशिष्ट अनुपात डाल दिया कि विज्ञान का दम भरने वाले वैज्ञानिकों के लिए ऐसा खाद्य पदार्थ बनाना असंभव नहीं तो सहज भी नहीं है । यह कौशल परमात्मा ने विशेष रूप से मधुमक्खियों को ही प्रदान किया है । इन्हीं नन्हीं-नन्हीं मधुमक्खियों द्वारा सहस्रों फूलों का रस चूसकर प्राणिमात्र के लिए कल्याणकारी औषध मधु व शहद के रूप में तैयार कर डाली ।
भारतीय भाषाओं में इसके मधु, माक्षिक, मौ, जेनतुष्प, मद्य, तेनी, आदि नाम हैं । रूसी –Med,फारसी - शहद, अगबीन । अंग्रेजी Honey, लैटिन Meil, अरबी असलुल, नहल इत्यादि ।
धन्वन्तरि निघन्टु में मधु के आठ नाम व पर्याय दिये गए हैं :
मधु क्षौद्रं तु माक्षीकं माक्षिकं कुसुमासवम् ।
पुष्पासवं सारघं च तच्च पुष्परसं स्मृतम् ॥
अर्थात् क्षौद्र, माक्षीक, माक्षिक कुसुमासव, पुष्पासव, सारघ और पुष्परस - ये मधु के पर्याय हैं ।
धन्वन्तरि निघन्टु में मधु की आठ जातियां दीं हैं । इन जातियों के भेद निम्न प्रकार से दिये हैं-
माक्षिकं तैलवर्णं स्यात्क्षौद्रं तु कपिलं भवेत् ।
पौत्तिकं घृतवर्णं तु श्वेतं भ्रामरमुच्यते ॥
आपीतवर्णं छात्राख्यं पिङ्गलं चार्घ्यनामकम् ।
औद्दालं स्वर्णसदृशं दालं च पाटलं स्मृतम् ॥
अर्थ - माक्षिक मधु तैल के समान, क्षौद्र मधु कपिल वर्ण का, पौत्तिक मधु घी के समान, भ्रामर मधु श्वेत वर्ण का, छात्र मधु ईषत् पीत वर्ण का, आर्घ्य मधु पिङ्गल वर्ण का, औद्दालक मधु स्वर्ण के समान तथा दाल मधु पाटलवर्ण (गुलाबी रंग का) होता है ।
मधु के सामान्य गुण
मधु कषायानुरस, रूक्ष, शीतवीर्य, मधुर, अग्नि दीपन, लेखन, बलवर्धक, व्रणरोपण, सन्धानजनन, लधु, नेत्रों के लिए हितकर, स्वर को उत्तम करने वाला, हृदय के लिए हितकर, त्रिदोषहर्ता, वमन, हिचकी, विष, श्वास, कास, शोथ, अतिसार और रक्तपित्त को नष्ट करने वाला, ग्राही, कृमि, तृष्णा तथा मूर्छा को दूर करने वाला है ।
मधु के विशिष्ठ गुण
१. भ्रामर मधु - पिच्छिलता तथा माधुर्य के कारण भ्रामर मधु गुरु होता है । यह अत्यन्त मधुर होता है तथा जड़ता (जकड़न) उत्पन्न करता है ।
२. क्षौद्र मधु - यह विशेषत: शीतल, लघु और लेखन होता है
३. माक्षिक मधु - यह क्षौद्र मधु की अपेक्षा लघुतर, रूक्ष तथा सभी प्रकार के मधुओं में श्रेष्ठ होता है ।
४. पौत्तिक मधु - इसका निर्माण पुत्तिका नामक मक्खियों के द्वारा किया जाता है । यह गाढा और घी के रंग जैसा होता है । यह उष्णवीर्य, किञ्चित् कसैला, वातवर्धक, रक्तपित्त को पैदा करने वाला, भेदक, मदकारक, मधुर और कुछ विषैला होता है ।
Continued...
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HONEY – The Super Medicine
Honey is the wonderful gift of nature. Its qualities are described in earliest known books including the Rigveda. Apart from India, other regions of the world also have the requisite knowledge about this sweet liquid. In Russian language, honey is called ‘Med’. Russian word ‘medved’ means “the honey-eater” (the wild bear/ grizzly). And ‘meditsin’ means "the honey product”. This word (‘meditsin’) was later absorbed into English as ‘medicine’
Our rural folk have more traditional knowledge about honey than our city elite. It is a common knowledge among villagers that pure Desi ghee and pure honey always carry the same selling-rate.
The following excerpts have been picked up from the book “Madhu” written by late Swami Omanand, the great Jat leader and an Ayurvedic doctor of repute.
This thread is the last in this series (after NEEM , PEEPAL, BADD and AAK.)
(If you do not see Devanagari script below this line, you need to install ‘Mangal’ font on your computer. See my thread Tips for use of Hindi on your computer in Tech Talk forum or download it from this link.)
मधु (शहद)
परमपिता परमात्मा की कृपा से अनेक गुणकारी वस्तुऐं हमें ऐसी प्राप्त हुईं हैं जिन्हें हम अमृत नाम दे सकते हैं । जैसे मधु (शहद) जीवन में सबको अमृतपान करा देता है । यह आबाल, वृद्ध, सभी आयु वर्ग के लिए समान रूप से सुपाच्य और शक्तिवर्धक है । स्वास्थ्यप्रद होने से मधु में रोग निवारण शक्ति भी विद्यमान है । इसी कारण आयुर्वैदिक चिकित्सा पद्धति में मधु को विशेष स्थान दिया गया । भगवान ने छोटी मधुमक्खियों को जन्म दिया और उनको वह शक्ति प्रदान की कि सहस्रों फूलों से रस चूस-चूसकर उन्होंने एक स्वादिष्ट सन्तुलित आहार की रचना कर डाली । उसने जहां मधु को स्वास्थ्यवर्धक बनाया, साथ ही मधु में रोग निवारण की अद्भुत शक्ति उसने प्रदान कर डाली । शहद का रंग-रूप और गंध भी आकर्षक है । इसमें शक्तिप्रद शर्करा, अतिरिक्त लोहा, तांबा, फासफोरस, पोटाशियम, कैल्सियम सहित अनेक खनिज तत्त्वों, प्रोटीन तथा विटामिन बी एवं सी सहित कुछ अन्य विटामिनों का ऐसा विशिष्ट अनुपात डाल दिया कि विज्ञान का दम भरने वाले वैज्ञानिकों के लिए ऐसा खाद्य पदार्थ बनाना असंभव नहीं तो सहज भी नहीं है । यह कौशल परमात्मा ने विशेष रूप से मधुमक्खियों को ही प्रदान किया है । इन्हीं नन्हीं-नन्हीं मधुमक्खियों द्वारा सहस्रों फूलों का रस चूसकर प्राणिमात्र के लिए कल्याणकारी औषध मधु व शहद के रूप में तैयार कर डाली ।
भारतीय भाषाओं में इसके मधु, माक्षिक, मौ, जेनतुष्प, मद्य, तेनी, आदि नाम हैं । रूसी –Med,फारसी - शहद, अगबीन । अंग्रेजी Honey, लैटिन Meil, अरबी असलुल, नहल इत्यादि ।
धन्वन्तरि निघन्टु में मधु के आठ नाम व पर्याय दिये गए हैं :
मधु क्षौद्रं तु माक्षीकं माक्षिकं कुसुमासवम् ।
पुष्पासवं सारघं च तच्च पुष्परसं स्मृतम् ॥
अर्थात् क्षौद्र, माक्षीक, माक्षिक कुसुमासव, पुष्पासव, सारघ और पुष्परस - ये मधु के पर्याय हैं ।
धन्वन्तरि निघन्टु में मधु की आठ जातियां दीं हैं । इन जातियों के भेद निम्न प्रकार से दिये हैं-
माक्षिकं तैलवर्णं स्यात्क्षौद्रं तु कपिलं भवेत् ।
पौत्तिकं घृतवर्णं तु श्वेतं भ्रामरमुच्यते ॥
आपीतवर्णं छात्राख्यं पिङ्गलं चार्घ्यनामकम् ।
औद्दालं स्वर्णसदृशं दालं च पाटलं स्मृतम् ॥
अर्थ - माक्षिक मधु तैल के समान, क्षौद्र मधु कपिल वर्ण का, पौत्तिक मधु घी के समान, भ्रामर मधु श्वेत वर्ण का, छात्र मधु ईषत् पीत वर्ण का, आर्घ्य मधु पिङ्गल वर्ण का, औद्दालक मधु स्वर्ण के समान तथा दाल मधु पाटलवर्ण (गुलाबी रंग का) होता है ।
मधु के सामान्य गुण
मधु कषायानुरस, रूक्ष, शीतवीर्य, मधुर, अग्नि दीपन, लेखन, बलवर्धक, व्रणरोपण, सन्धानजनन, लधु, नेत्रों के लिए हितकर, स्वर को उत्तम करने वाला, हृदय के लिए हितकर, त्रिदोषहर्ता, वमन, हिचकी, विष, श्वास, कास, शोथ, अतिसार और रक्तपित्त को नष्ट करने वाला, ग्राही, कृमि, तृष्णा तथा मूर्छा को दूर करने वाला है ।
मधु के विशिष्ठ गुण
१. भ्रामर मधु - पिच्छिलता तथा माधुर्य के कारण भ्रामर मधु गुरु होता है । यह अत्यन्त मधुर होता है तथा जड़ता (जकड़न) उत्पन्न करता है ।
२. क्षौद्र मधु - यह विशेषत: शीतल, लघु और लेखन होता है
३. माक्षिक मधु - यह क्षौद्र मधु की अपेक्षा लघुतर, रूक्ष तथा सभी प्रकार के मधुओं में श्रेष्ठ होता है ।
४. पौत्तिक मधु - इसका निर्माण पुत्तिका नामक मक्खियों के द्वारा किया जाता है । यह गाढा और घी के रंग जैसा होता है । यह उष्णवीर्य, किञ्चित् कसैला, वातवर्धक, रक्तपित्त को पैदा करने वाला, भेदक, मदकारक, मधुर और कुछ विषैला होता है ।
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