ये जितने भी जाट भाई हिन्दू और हिंदुत्व का संखनाद फूंकते फिरते हैं और गुणगान करते नहीं छकते, कहीं पे हिन्दू यूनिटी तो कहीं पे हिन्दू बराबरी की बात करते हैं; क्या वो मुझे बता पाएंगे, कि कौन तिलकधारी या तराजूधारी, हिंदुओं का ट्रस्ट या कौनसे मंदिर की समिति ने मुज़फ्फरनगर दंगों के बाद, कौनसे जाट भाइयों या तथाकथित हिन्दू भाइयों के उजड़े और लुटे घरों और लोगों के पुनर्वास हेतु आगे आये? एक-से-एक पैसे वाले हिन्दू ट्रस्ट बैठे हैं, एक-से-एक बड़े मंदिरों वाले बैठे हैं, एक से एक आर-एस-एस से ले विश्व हिन्दू परिषद वाले बैठे हैं; और करोड़ों-खरबों के चंदे हमारे जैसे घरों से ही रोज आते हैं इनको| तो क्या किसी ने आगे बढ़ के एक भी जाट भाई के उजड़े घर का पुनर्वास तो छोड़ो, खाने-पीने तक की सामग्री भी भीड़ पड़ी यानि मुज़फ्फरनगर दंगों के दौरान या अभी तक भी पहुंचाई किसी के पास?
जबकि मुस्लिमों को सरकारी मदद से कई गुना मदद पहुंची मदरसों और मस्जिदों से| आँखें खोलो जाट युवा, और नहीं तो अपने बुजुर्गों के पास बैठ के ही बतला लो कुछ| कौनसे हिन्दू और हिंदुत्व पे बावले हुए फिरते हो तुम? करी किसी तथाकथित हिंदुओं के ठेकेदार बनने वाले तिलकधारियों और तराजूधारियों में से किसी ने तुम्हारी पूछ? दंगों के बाद आर्थिक सहायता बारे भी तुम्हारे लिए कुछ नहीं किया| और तो और नरेंद्र मोदी की आगरा रैली में सम्मान तक नहीं दिलवाया या कहो कि दिया| इसी से लगा लो अपनी औकात का अंदाजा कि ये हम जाटों को कितने भाई मानते हैं अपने| और फिर मीडिया में जो हिन्दू-बनाम-मुस्लिम बना के दिखाना था वो जब जाट-बनाम-मुस्लिम बना के दिखाया, उसपे तो यह कुछ बोले ही नहीं थे, वो भी बावजूद इसके कि नब्बे % से ज्यादा मीडिया तिलकधारी और तराजूधारियों के हाथों में है|| क्या ऐसे बिना किसी आदर, सम्मान, सहायता और पूछ के, सूखे ही हिंदुत्व की सूली पे टंग के मरोगे क्या?
नी आखिर कमी क्या है तुम्हारे पास? और क्या भीड़ पड़ी है तुम्हें इन लोगों की, कि ये ना तुम्हारा सम्मान करें, जिस हिंदुत्व के लिए तुम लोग मरे जा रहे हो, उस हिंदुत्व का आज का सबसे बड़ा पैरोकार बना नरेंद्र मोदी तक तुमको उसकी उपस्थिति (आगरा रैली) तक में तुम्हें सम्मान नहीं दिलवा पाया, तो साफ़ दिखाता है कि तिलकधारियों और तराजूधारियों के आगे उसकी खुद की नहीं चलती और उसको (यानि एक ओबीसी) सिर्फ ये लोग सत्ता हथियाने का हथियार बनाये हुए हैं ताकि वोट लें और फिर खुद राज करें|
अरे किसान के नाम पे तो तुम लोगों को क्या देंगे ये बीजेपी और तथाकथित हिंदुत्व वाले, इन्होनें तो हिंदुत्व की रक्षा करने के बदले में ही तुम्हें वो मान-सम्मान तक नहीं दिया, जिसके कि तुम सीधे-सीधे हकदारी थे, बाकी इनके ट्रस्टों और मंदिरों की तरफ से जैसे मुस्लिमों को आर्थिक सहायता मिली, ऐसी तो भूल ही जाओ|
क्या इनका फर्ज नहीं था अपने खजानों के मुंह खोलने का कि लो हमारे हिन्दू भाइयो, आप लोगों ने हिंदुत्व के लिए इतना किया है तो हम तुम्हारे खाने-पीने और इलाज का वैसा ही सामूहिक ख्याल रखेंगे, जैसा कि मस्जिदों और मदरसों वालों ने मुस्लिमों का रखा| आखिर ये तिलकधारी ऐसी भीड़ पड़ी में भी ट्रस्टों और मंदिरों के खजानों का मुंह नहीं खोलेंगे तो क्या बाद में तुम लोगों के कल्चर और खापों को मीडिया में बदनाम करवाने हेतु प्रयोग करेंगे?
यानि सम्मान भी नहीं, आर्थिक सहायता भी नहीं और फिर भी इनके पीछे बावले हुए फिर रहे हो| जागो जाट युवा जागो, नहीं तो तुम्हारी आगे वाली पीढ़ियां मूर्ख कहेंगी तुमको| और फिर जाट को तो इतिहास में कभी तिलकधारी और तराजूधारी की जरूरत ही नहीं थी, और आज भी हमें इनकी नहीं बल्कि इनको हमारी जरूरत है| इसीलिए तो ये हिन्दू बराबरी और यूनिटी का राग अलापते फिर रहे हैं| सारे हिंदुस्तान में मुस्लिमों से पिट के, और जाटों का इतिहास को देखते हुए ये समझ चुके हैं कि इतिहास में भी जाट ने ही इनका पीछे छुड़वाया मुस्लिमों से और अब भी जाट ही छुड़वा सकते हैं| लेकिन बदले में तुम्हें मिल क्या रहा है? ना मान-सम्मान और ना आर्थिक सहायता, और बात करते हैं हिन्दू बराबरी और यूनिटी की| कहाँ है ये हिन्दू बराबरी और यूनिटी, मुझे धरती पे प्रक्टिकलिटी में तो कहीं दिख नहीं रही|
इसलिए जाट भाइयो पार्टी और कट्टरता के पीछे वोट खराब मत करना, जहां भी डालो सिर्फ और सिर्फ जाट उम्मीदवार को जिताने हेतु डालना और अगर एक ही सीट पे दो या अधिक जाट खड़े हों तो उनमें यह जरूर देख लेना कि कौनसे को डालने से जाट राजनीती की चौधर बढ़ेगी या दूसरों के हाथों में जा के पिटेगी|
- पगड़ी सम्भाल जट्टा और दुश्मन पहचान जट्टा