Wah bhai, jitne sunder aap ke vichar hain, utni hi sundar aap ki Hindi hai. Dil ki bhwnayen likhne ka dhanyavad.
मैंने जाटलैंड को ज्वाइन पहले तो जाटो से मिलने के लिए की थी. फिर धीरे-धीरे जाट लोगो के बारे में जान-ने , देस विदेश में रहने वाले जाटों के विचारो के आदान प्रदान के लिए.. जाटों के समाज के बारे में जानने, उनके विभिन्न कार्य कलापों, व्यवसायों, आदि के बारे में जानने और उनके अनुभव सुनने का मन था.
यहाँ आने के बाद बहुत अच्छा लगा... अक्षय, समर और राकेश से मिला भी..... और भी बहुत अनुभव बटोरा ... आखिर एक जाट जाटो से मिलने के बहाने ही तो ढूढ़ता है... चाहे रिश्ते बनाने के लिए.. चाहे दोस्ती के लिए.. चाहे चोपाल के हसी ठठो के लिए....
और ये अनुभव समय के साथ बढ़ता ही रहेगा...![]()