arunshokeen
Banned
एक बार इक लड़के ने लड़की से कहाँ की ,साहिबा, मेरे नहीं कुछ कसूर की मैं तुझ पर मारता हूँ, बता क्या मैं कुछ बुरा करता हूँ, दिल ने जो तुझे मन रुब हैं, कैसे मैं चुपैऊ की तू ही मेरा रब हैं, ओह साहिबा, तेरा इक दीदार भर मुझे जिंदगी का अहसास दिलाता हैं, दिन होता हैं सुरु तुझसे ही और तुझ पर ही ढल जाता हैं ,ओह साहिबा सच कहूँ तो , तुझे hi हैं मेरी जिंदगी तुझे से ही मेरी बन्दंगी ,हैं जो तुह तो मेरा वजूद हैं, वरना जिंदगी बस इक बिना लाश का ताबूत हैं, ओह साहिबा क्या तुझसे मैं कहन तू मेरी क्या हैं, जो हैं तेरा साथ तो जिंदगी हैं जिंदगी वरना विराना हैं ,तुझ से दूर होकर मुझे कहाँ जी पाना हैं, साहिबा मेरे दिल का बस येही फ़साना हैं, ab तुझे अपना फैसला सुनना hain.
कहते हैं की साहिबा ने कुछ ऐसा कहाँ की हस्ते हस्ते साहिब ने अपनी जान कुर्बान कर दी, और उफ़ तक नहीं करी, " हैं सच मेरे साहिब की मैं भी तुजसे प्यार करती हूँ, मैं सर्रे बाज़ार साडी दुनिया के सामने इकरार करती हूँ, ,की जिस तरह जलती हैं समां उस्सी तरह मैं तेरी याद मैं जलती हूँ , की जल जाता हैं परवाना चंद लम्हों मैं पर मैं सारी रात जलती हूँ, की हैं सच मेरे साहिब की मैं भी तुझे प्यार करती हूँ, पर मैं कैसे तुझे हे बताऊ की हैं जिंदगी बड़ी छोटी और मैं चंद लम्हों की ही मेहमान हूँ, मैं कैसे कहूँ की मैं खुद ही अनजान हूँ, की न जाने कब जिंदगी ने साथ छोड़ दिया, is लम्हे मैं देखो मेरा हाथ छोड़ दिए, की मौत हैं सामने खड़ी और जिंदगी पुकारती हैं, अब कैसे मैं कहूँ ki eh साहिब मैं तुमसे प्यार करती हूँ, लोग देते हैं वादा जिंदगी साथ निबाहने का मैं इक वदा करती हूँ, की इस बार न सही हर बार तेरे ही साथ रहूंगी, इस लम्हे देती हूँ, जान उस लम्हे जिंदगी दूंगी, इस लम्हे की बस इक ही बात याद हैं साहिब की तू मेरे पास हैं, की तू मेरे पास हैं, और उसने जान दे दी, साहिब के आखरी शब्द की मैं आपसे उम्मीद करता हूँ,
कहते हैं की साहिबा ने कुछ ऐसा कहाँ की हस्ते हस्ते साहिब ने अपनी जान कुर्बान कर दी, और उफ़ तक नहीं करी, " हैं सच मेरे साहिब की मैं भी तुजसे प्यार करती हूँ, मैं सर्रे बाज़ार साडी दुनिया के सामने इकरार करती हूँ, ,की जिस तरह जलती हैं समां उस्सी तरह मैं तेरी याद मैं जलती हूँ , की जल जाता हैं परवाना चंद लम्हों मैं पर मैं सारी रात जलती हूँ, की हैं सच मेरे साहिब की मैं भी तुझे प्यार करती हूँ, पर मैं कैसे तुझे हे बताऊ की हैं जिंदगी बड़ी छोटी और मैं चंद लम्हों की ही मेहमान हूँ, मैं कैसे कहूँ की मैं खुद ही अनजान हूँ, की न जाने कब जिंदगी ने साथ छोड़ दिया, is लम्हे मैं देखो मेरा हाथ छोड़ दिए, की मौत हैं सामने खड़ी और जिंदगी पुकारती हैं, अब कैसे मैं कहूँ ki eh साहिब मैं तुमसे प्यार करती हूँ, लोग देते हैं वादा जिंदगी साथ निबाहने का मैं इक वदा करती हूँ, की इस बार न सही हर बार तेरे ही साथ रहूंगी, इस लम्हे देती हूँ, जान उस लम्हे जिंदगी दूंगी, इस लम्हे की बस इक ही बात याद हैं साहिब की तू मेरे पास हैं, की तू मेरे पास हैं, और उसने जान दे दी, साहिब के आखरी शब्द की मैं आपसे उम्मीद करता हूँ,