ravinderjeet
New member
chutkala badiya hai
(non-jaat chutkale allowed s ke ib
"policy" change kar di ke)
ye jattan key-a chutkaley sein.
(non-jaat chutkale allowed s ke ib
ye jattan key-a chutkaley sein.
चुटकला आंडी था । इसा-ए किस्सा नीचै लिक्खूं सूं (लिंक मत ढूंढियो, यो पहल्यां भी हाड़ै लिख राख्या सै ) ।
दीवा
एक जाट कै बाळक ना होवैं थे । एक दिन एक भाठ आ-ग्या अर जाटणी नै आपणा रोणा रो दिया । बाहमण बोल्या - बेटी, रोवै मतना, मैं परसों बद्रीनाथ जाऊँ सूँ, ऊड़ै तेरे नाम का दीवा जळा दूंगा - अर भगवान सब भली करैंगे, चिन्ता ना करियो ।
वो बाहमण दस साल पाच्छै उस जाट कै घरां आया, तै देख्या अक ऊड़ै आठ-नौ बाळक हांडैं थे । उसनै पड़ौसी तैं बूझी अक ये बाळक किसके सैं ? पड़ौसी बोल्या अक महाराज ये उस्सै के सैं जिसका तू दस साल पहल्यां बद्रीनाथ में दीवा बाळ-कै आया था ।
बाहमण बोल्या - रै, यो जाट कित सै ?
पड़ौसी बोल्या - महाराज, वो तै कल बद्रीनाथ चल्या गया - तेरे दीवे नै बुझावण !!!
.
यो चुटकला सुन क एक चुटकला और याद आ गया ...
एक बार बनिए का ब्याह होगया .........उसने क्यां ऐ का न बेर था ....थोड़े दिन पाछे उसके घर आले कहन लाग गे की बेटा बालक बुलक कर ले ........तो बनिए का एक बढ़िया जाट दोस्त था ....वो उस धोरे चला गया और बोल्या भाई ये बालक क्यूकर होया करे ......तो जाट बोल्या भाई तू रात ने अपनी बाननी ने ले क म्हारे घेर में आज जाइये अर्र दिवा लियईये ....
रात ने बनिया पहुच जा है बाननी ने ले क.....तो जाट बनिए ते दिवा पकड़ा दे है और बनिए ने सुथरी ढाल समझा दे है की क्यूकर होया करे बालक ......
कई साल बाद बनिए क घर आवे है जाट....देखे है की बनिए क ५-६ बालक हो रहे थे ......तो जाट पूछे है की आखिर तन्ने लाग ऐ गया बेरा की बालक क्यूकर होया करे ....तो बनिया बोल्या हाँ इसमें के करना था ....बस दिवा ऐ पकड़ना था ........
चुटकला आंडी था । इसा-ए किस्सा नीचै लिक्खूं सूं (लिंक मत ढूंढियो, यो पहल्यां भी हाड़ै लिख राख्या सै ) ।
दीवा
एक जाट कै बाळक ना होवैं थे । एक दिन एक भाठ आ-ग्या अर जाटणी नै आपणा रोणा रो दिया । बाहमण बोल्या - बेटी, रोवै मतना, मैं परसों बद्रीनाथ जाऊँ सूँ, ऊड़ै तेरे नाम का दीवा जळा दूंगा - अर भगवान सब भली करैंगे, चिन्ता ना करियो ।
वो बाहमण दस साल पाच्छै उस जाट कै घरां आया, तै देख्या अक ऊड़ै आठ-नौ बाळक हांडैं थे । उसनै पड़ौसी तैं बूझी अक ये बाळक किसके सैं ? पड़ौसी बोल्या अक महाराज ये उस्सै के सैं जिसका तू दस साल पहल्यां बद्रीनाथ में दीवा बाळ-कै आया था ।
बाहमण बोल्या - रै, यो जाट कित सै ?
पड़ौसी बोल्या - महाराज, वो तै कल बद्रीनाथ चल्या गया - तेरे दीवे नै बुझावण !!!
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बहुत बढ़िया !!!
हा हा हा हा हा हा हा लूची बात !!! :rock :rock
Jatland ki policy chage to hui hai LUCHHA sauda geran lag liye
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