India Against Congress

subhashmahla

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क्या आपको इन प्रश्नों का ठीक से उत्तर मालूम है-

देश मे चुनाव जोरों पर है इसलिए यह जानना आवश्यक है की किसे वोट देने जा रहे है और क्यों ? उस परिवार के बारे मे जाने जिसने 55 वर्षो मे देश को विश्व मानचित्र पर कालिख से पोत दिया है .... यदि नहीं तो पता कीजिये, रहस्य ही शक्ति है जो दुश्मन को गुमराह करके रखता है. देश के जड़ जमाये दुश्मन भी यही कर रहे है, कोई रहस्य जनता को नहीं बताते है और फर्जी इतिहास लिख डालते है, ज़रा इन प्रश्नों के बारे में सोचे और दूसरो से पूछे:-


१-राजीव गाँधी के दादा जी का क्या नाम था,और वह क्या करते थे?

२-इंदिरा गाँधी का धर्म क्या था?

३-राहुल गाँधी का असली नाम क्या है और इनका धर्म क्या है?

४-सोनिया की असली जन्म तिथि क्या है?

५-राहुल ने एम् ए कब किया, एम्-फिल किस साल में किया और कितने विषय में फेल है?

६-सोनिया गाँधी का असली नाम क्या है और इनका धर्म क्या है?

७-विरोनिका किसकी गर्ल फ्रेंड है?

८-नेहरू जी के दादा जी का क्या नाम है और वह क्या काम करते थे और उनके पिताजी कौन थे.

९-सोनिया कितनी पढ़ी हैं और उनको प्रधान मंत्री बनाने से किसने रोका, और क्यों ?

१०-अफगानिस्तान में बाबर की मजार पर भारत का कौन प्रधानमंत्री बिना पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के गुपचुप गया था?

११-भारत किस प्रधानमंत्री को सौउदी अरब की सरकार ने हज यात्रा के लिए निमंत्रित किया था और उसका कारन क्या था?

१२-नेहरू जी किस बीमारी से मरे थे?

१३-"लिव इन रिलेशन" कानून क्या है, इसे किसके लिए बनाया गया था जब की इसकी मांग कोई नहीं किया था?

१४-भारत में २००५ में इटली और स्विस के कितने कितने बैंक गुपचुप खोले गए ?

१५-क्वात्रोची को किसने छुड़वाया था? उसके बेटे की कंपनी भारत में क्या करती है?

१६-किस प्रधानमंत्री के स्विस बैंक खाते में सबसे ज्यादा पैसा जमा है?

१७-मृत्यु के समय राजीव गाँधी का धर्म क्या था?

१८-राबर्ट बढेरा के परिवार में अब कौन कौन बचे है और उनका धर्म क्या है?

१९-भारत के हवाई अड्डो पर राबर्ट बढेरा के सामान की तलाशी क्यों नहीं ली जाती है?

२०- रूस की ख़ुफ़िया अजेंची के. जी. बी. ने किस भारतीय प्रधानमंत्री को पैसा देना स्वीकार किया है?

२१-सोनिया ने इटली की नागरिकता किस साल में छोड़ी? छोड़ी या नहीं?

२२-भारत की किस सांसद के पास दो दो पासपोर्ट है और किस देश के?

२३-भारत के किस सुरक्षा सलाहकार की बेटी इटली में ब्याही है?

24- सोनिया गाँधी की बहन सीबीआई के वांटेड लिस्ट मे थी उसका नाम क्यों हटा दिया गया ?
 
[h=2]नेहरू खानदान की असलियत- अवश्य पढ़ें
part 1:

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जम्मू-कश्मीर में आए महीनों हो गए थे, एक बात अक्सर दिमाग में खटकती थी कि अभी तक नेहरू के खानदान का कोई क्यों नहीं मिला, जबकि हमने किताबों में पढ़ा था कि वह कश्मीरी पंडित थे। नाते-रिश्तेदार से लेकर दूरदराज तक में से कोई न कोई नेहरू खानदान का तो मिलना ही चाहिए था। नेहरू राजवंश कि खोज में सियासत के पुराने खिलाडिय़ों से मिला लेकिन जानकारी के नाम पर मोतीलाल नेहरू के पिता गंगाधर नेहरू का नाम ही सामने आया। अमर उजाला दफ्तर के नजदीक बहती तवी के किनारे पहुंचकर एक दिन इसी बारे में सोच रहा था तो ख्याल आया कि जम्मू-कश्मीर वूमेन कमीशन की सचिव हाफीजा मुज्जफर से मिला जाए, शायद वह कुछ मदद कर सके।

अगले दिन जब आफिस से हाफीजा के पास पहुंचा तो वह सवाल सुनकर चौंक गई। बोली पंडित जी आप पंडित नेहरू के वंश का पोस्टमार्टम करने आए हैं क्या? कश्मीरी चाय का आर्डर देने के बाद वह अपने बुक रैक से एक किताब निकाली, वह थी रॉबर्ट हार्डी एन्ड्रूज कि किताब "ए लैम्प फार इंडिया- द स्टोरी ऑफ मदाम पंडित।" उस किताब मे तथाकथित गंगाधर का चित्र छपा था, जिसके अनुसार गंगाधर असल में एक सुन्नी मुसलमान थे जिनका असली नाम था गयासुद्दीन गाजी।
इस फोटो को दिखाते हुए हाफीजा ने कहा कि इसकी पुष्टि के लिए नेहरू ने जो आत्मकथा लिखी है, उसको पढऩा जरूरी है। नेहरू की आत्मकथा भी अपने रैक से निकालते हुए एक पेज को पढऩे को कहा। इसमें एक जगह लिखा था कि उनके दादा अर्थात मोतीलाल के पिता गंगाधर थे। इसी तरह जवाहर की बहन कृष्णा ने भी एक जगह लिखा है कि उनके दादाजी मुगल सल्तनत बहादुरशाह जफर के समय में नगर कोतवाल थे। अब इतिहासकारो ने खोजबीन की तो पाया कि बहादुरशाह जफर के समय कोई भी हिन्दू इतनी महत्वपूर्ण ओहदे पर नहीं था। और खोजबीन करने पर पता चला कि उस वक्त के दो नायब कोतवाल हिन्दू थे नाम थे भाऊ सिंह और काशीनाथ जो कि लाहौरी गेट दिल्ली में तैनात थे। लेकिन किसी गंगाधर नाम के व्यक्ति का कोई रिकार्ड नहीं मिला है। नेहरू राजवंश की खोज में मेहदी हुसैन की पुस्तक बहादुरशाह जफर और 1857 का गदर में खोजबीन करने पर मालूम हुआ। गंगाधर नाम तो बाद में अंग्रेजों के कहर के डर से बदला गया था, असली नाम तो था गयासुद्दीन गाजी। जब अंग्रेजों ने दिल्ली को लगभग जीत लिया था तब मुगलों और मुसलमानों के दोबारा विद्रोह के डर से उन्होंने दिल्ली के सारे हिन्दुओं और मुसलमानों को शहर से बाहर करके तम्बुओं में ठहरा दिया था। जैसे कि आज कश्मीरी पंडित रह रहे हैं। अंग्रेज वह गलती नहीं दोहराना चाहते थे जो हिन्दू राजाओं-पृथ्वीराज चौहान ने मुसलमान आक्रांताओं को जीवित छोडकर की थी, इसलिये उन्होंने चुन-चुन कर मुसलमानों को मारना शुरु किया। लेकिन कुछ मुसलमान दिल्ली से भागकर पास के इलाकों मे चले गये थे। उसी समय यह परिवार भी आगरा की तरफ कूच कर गया। नेहरू ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि आगरा जाते समय उनके दादा गंगाधर को अंग्रेजों ने रोककर पूछताछ की थी लेकिन तब गंगाधर ने उनसे कहा था कि वे मुसलमान नहीं हैं कश्मीरी पंडित हैं और अंग्रेजों ने उन्हें आगरा जाने दिया बाकी तो इतिहास है ही। यह धर उपनाम कश्मीरी पंडितों में आमतौर पाया जाता है और इसी का अपभ्रंश होते-होते और धर्मान्तरण होते-होते यह दर या डार हो गया जो कि कश्मीर के अविभाजित हिस्से में आमतौर पाया जाने वाला नाम है। लेकिन मोतीलाल ने नेहरू उपनाम चुना ताकि यह पूरी तरह से हिन्दू सा लगे। इतने पीछे से शुरुआत करने का मकसद सिर्फ यही है कि हमें पता चले कि खानदानी लोगों कि असलियत क्या होती है।
आनंद भवन नहीं इशरत मंजिल: एक कप चाय खत्म हो गयी थी, दूसरी का आर्डर हाफीजा ने देते हुए के एन प्राण कि पुस्तक द नेहरू डायनेस्टी निकालने के बाद एक पन्ने को पढऩे को दिया। उसके अनुसार जवाहरलाल मोतीलाल नेहरू के पुत्र थे और मोतीलाल के पिता का नाम था गंगाधर। यह तो हम जानते ही हैं कि जवाहरलाल की एक पुत्री थी इन्दिरा प्रियदर्शिनी नेहरू । कमला नेहरू उनकी माता का नाम था। जिनकी मृत्यु स्विटजरलैण्ड में टीबी से हुई थी। कमला शुरु से ही इन्दिरा के फिरोज से विवाह के खिलाफ थीं क्यों यह हमें नहीं बताया जाता। लेकिन यह फिरोज गाँधी कौन थे? फिरोज उस व्यापारी के बेटे थे जो आनन्द भवन में घरेलू सामान और शराब पहुँचाने का काम करता था। आनन्द भवन का असली नाम था इशरत मंजिल और उसके मालिक थे मुबारक अली। मोतीलाल नेहरू पहले इन्हीं मुबारक अली के यहाँ काम करते थे। सभी जानते हैं की राजीव गाँधी के नाना का नाम था जवाहरलाल नेहरू लेकिन प्रत्येक व्यक्ति के नाना के साथ ही दादा भी तो होते हैं। फिर राजीव गाँधी के दादाजी का नाम क्या था? किसी को मालूम नहीं, क्योंकि राजीव गाँधी के दादा थे नवाब खान। एक मुस्लिम व्यापारी जो आनन्द भवन में सामान सप्लाई करता था और जिसका मूल निवास था जूनागढ गुजरात में। नवाब खान ने एक पारसी महिला से शादी की और उसे मुस्लिम बनाया। फिरोज इसी महिला की सन्तान थे और उनकी माँ का उपनाम था घांदी (गाँधी नहीं) घांदी नाम पारसियों में अक्सर पाया जाता था। विवाह से पहले फिरोज गाँधी ना होकर फिरोज खान थे और कमला नेहरू के विरोध का असली कारण भी यही था। हमें बताया जाता है कि फिरोज गाँधी पहले पारसी थे यह मात्र एक भ्रम पैदा किया गया है। इन्दिरा गाँधी अकेलेपन और अवसाद का शिकार थीं। शांति निकेतन में पढ़ते वक्त ही रविन्द्रनाथ टैगोर ने उन्हें अनुचित व्यवहार के लिये निकाल बाहर किया था। अब आप खुद ही सोचिये एक तन्हा जवान लडक़ी जिसके पिता राजनीति में पूरी तरह से व्यस्त और माँ लगभग मृत्यु शैया पर पड़ी हुई हों थोड़ी सी सहानुभूति मात्र से क्यों ना पिघलेगी?
इंदिरा गांधी या मैमूना बेगम: इसी बात का फायदा फिरोज खान ने उठाया और इन्दिरा को बहला-फुसलाकर उसका धर्म परिवर्तन करवाकर लन्दन की एक मस्जिद में उससे शादी रचा ली। नाम रखा मैमूना बेगम। नेहरू को पता चला तो वे बहुत लाल-पीले हुए लेकिन अब क्या किया जा सकता था। जब यह खबर मोहनदास करमचन्द गाँधी को मिली तो उन्होंने नेहरू को बुलाकर समझाया। राजनैतिक छवि की खातिर फिरोज को मनाया कि वह अपना नाम गाँधी रख ले, यह एक आसान काम था कि एक शपथ पत्र के जरिये बजाय धर्म बदलने के सिर्फ नाम बदला जाये तो फिरोज खान घांदी बन गये फिरोज गाँधी। विडम्बना यह है कि सत्य-सत्य का जाप करने वाले और सत्य के साथ मेरे प्रयोग नामक आत्मकथा लिखने वाले गाँधी ने इस बात का उल्लेख आज तक नहीं नहीं किया। खैर, उन दोनों फिरोज और इन्दिरा को भारत बुलाकर जनता के सामने दिखावे के लिये एक बार पुन: वैदिक रीति से उनका विवाह करवाया गया ताकि उनके खानदान की ऊँची नाक का भ्रम बना रहे। इस बारे में नेहरू के सेकेरेटरी एम.ओ. मथाई अपनी पुस्तक प्रेमेनिसेन्सेस ऑफ नेहरू एज (पृष्ठ 94 पैरा 2 (अब भारत में प्रतिबंधित है किताब) में लिखते हैं कि पता नहीं क्यों नेहरू ने सन 1942 में एक अन्तर्जातीय और अन्तर्धार्मिक विवाह को वैदिक रीतिरिवाजों से किये जाने को अनुमति दी जबकि उस समय यह अवैधानिक था का कानूनी रूप से उसे सिविल मैरिज होना चाहिये था । यह तो एक स्थापित तथ्य है कि राजीव गाँधी के जन्म के कुछ समय बाद इन्दिरा और फि रोज अलग हो गये थे हालाँकि तलाक नहीं हुआ था। फिरोज गाँधी अक्सर नेहरू परिवार को पैसे माँगते हुए परेशान किया करते थे और नेहरू की राजनैतिक गतिविधियों में हस्तक्षेप तक करने लगे थे। तंग आकर नेहरू ने फिरोज के तीन मूर्ति भवन मे आने-जाने पर प्रतिबन्ध लगा दिया था। मथाई लिखते हैं फिरोज की मृत्यु से नेहरू और इन्दिरा को बड़ी राहत मिली थी। 1960 में फिरोज गाँधी की मृत्यु भी रहस्यमय हालात में हुई थी जबकी वह दूसरी शादी रचाने की योजना बना चुके थे।
संजय गांधी और इंदिरा: संजय गाँधी का असली नाम दरअसल संजीव गाँधी था अपने बडे भाई राजीव गाँधी से मिलता जुलता । लेकिन संजय नाम रखने की नौबत इसलिये आई क्योंकि उसे लन्दन पुलिस ने इंग्लैण्ड में कार चोरी के आरोप में पकड़ लिया था और उसका पासपोर्ट जब्त कर लिया था। ब्रिटेन में तत्कालीन भारतीय उच्चायुक्त कृष्ण मेनन ने तब मदद करके संजीव गाँधी का नाम बदलकर नया पासपोर्ट संजय गाँधी के नाम से बनवाया था, इन्हीं कृष्ण मेनन साहब को भ्रष्टाचार के एक मामले में नेहरू और इन्दिरा ने बचाया था। अफवाहें यह भी है कि संजय गांधी इंदिरा गांधी के उनके सचिव युनुस खान से संबंधों के सच थे यह बात संजय गांधी को पता थी। अब संयोग पर संयोग देखिये संजय गाँधी का विवाह मेनका आनन्द से हुआ। कहा जाता है मेनका जो कि एक सिख लड़की थी संजय की रंगरेलियों की वजह से उनके पिता कर्नल आनन्द ने संजय को जान से मारने की धमकी दी थी फि र उनकी शादी हुई और मेनका का नाम बदलकर मानेका किया गया क्योंकि इन्दिरा गाँधी को यह नाम पसन्द नहीं था। फिर भी मेनका कोई साधारण लडकी नहीं थीं क्योंकि उस जमाने में उन्होंने बॉम्बे डाईंग के लिये सिर्फ एक तौलिये में विज्ञापन किया था। आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि संजय गाँधी अपनी माँ को ब्लैकमेल करते थे और जिसके कारण उनके सभी बुरे कामो पर इन्दिरा ने हमेशा परदा डाला और उसे अपनी मनमानी करने कि छूट दी।
सन्यासिन का सच: एम.ओ.मथाई अपनी पुस्तक के पृष्ठ 206 पर लिखते हैं - 1948 में वाराणसी से एक सन्यासिन दिल्ली आई जिसका काल्पनिक नाम श्रद्धा माता था। वह संस्कत की विद्वान थी और कई सांसद उसके व्याख्यान सुनने को बेताब रहते थे। वह भारतीय पुरालेखों और सनातन संस्कृत की अच्छी जानकार थी। नेहरू के पुराने कर्मचारी एस.डी. उपाध्याय ने एक हिन्दी का पत्र नेहरू को सौंपा जिसके कारण नेहरू उस सन्यासिन को एक इंटरव्यू देने को राजी हुए। चूँकि देश तब आजाद हुआ ही था और काम बहुत था। नेहरू ने अधिकतर बार इंटरव्य़ू आधी रात के समय ही दिये। मथाई के शब्दों में एक रात मैने उसे पीएम हाऊस से निकलते देखा वह बहुत ही जवान खूबसूरत और दिलकश थी। एक बार नेहरू के लखनऊ दौरे के समय श्रध्दामाता उनसे मिली और उपाध्याय जी हमेशा की तरह एक पत्र लेकर नेहरू के पास आये नेहरू ने भी उसे उत्तर दिया और अचानक एक दिन श्रद्धा माता गायब हो गईं किसी के ढूँढे से नहीं मिलीं।
नवम्बर 1949 में बेंगलूर के एक कान्वेंट से एक सुदर्शन सा आदमी पत्रों का एक बंडल लेकर आया। उसने कहा कि उत्तर भारत से एक युवती उस कान्वेंट में कुछ महीने पहले आई थी और उसने एक बच्चे को जन्म दिया। उस युवती ने अपना नाम पता नहीं बताया और बच्चे के जन्म के तुरन्त बाद ही उस बच्चे को वहाँ छोडकर गायब हो गई थी। उसकी निजी वस्तुओं में हिन्दी में लिखे कुछ पत्र बरामद हुए जो प्रधानमन्त्री द्वारा लिखे गये हैं पत्रों का वह बंडल उस आदमी ने अधिकारियों के सुपुर्द कर दिया। मथाई लिखते हैं। मैने उस बच्चे और उसकी माँ की खोजबीन की काफी कोशिश की लेकिन कान्वेंट की मुख्य मिस्ट्रेस जो कि एक विदेशी महिला थी बहुत कठोर अनुशासन वाली थी और उसने इस मामले में एक शब्द भी किसी से नहीं क हा लेकिन मेरी इच्छा थी कि उस बच्चे का पालन-पोषण मैं करुँ और उसे रोमन कथोलिक संस्कारो में बड़ा करूँ चाहे उसे अपने पिता का नाम कभी भी मालूम ना हो लेकिन विधाता को यह मंजूर नहीं था। नेहरू राजवंश की कुंडली जानने के बाद घड़ी की तरफ देखा तो शाम पांच बज गए थे, हाफीजा से मिली ढेरों प्रमाणिक जानकारी के लिए शुक्रिया अदा करना दोस्ती के वसूल के खिलाफ था, इसलिए फिर मिलते हैं कहकर चल दिए।
नोट--(दिनेश चंद्र मिश्र लखनऊ में रहनेवाले पत्रकार हैं। यह खोजबीन उन्होंने अपनी कश्मीर यात्रा के दौरान की है जिसे वे क्रमश: अपने ब्लाग पर प्रकाशित कर रहे है)
 
नेहरू खानदान की असलियत
Part 2

कांग्रेसिओं के प्रिय अय्याश चचा जान नेहरु की गलतियों से आज भी जल रहा है कश्मीर |
अलीगढ़ मुस्लिम विश्विद्यालय से शिक्षा प्राप्त कर कश्मीर में अध्यापन कर रहे शेख अब्दुल्ला को ऐसा समय अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा की पूर्ति करने का अच्छा अवसर
नजर आया। शेख अब्दुल्ला ने ‘मुस्लिम कांफ्रेंस’ नामक संस्था का गठन कर साम्प्रदायिकता की राजनीति करने लगे।
अब्दुल्ला ने कश्मीर में हिन्दी भाषा की शिक्षा और गौहत्या पर प्रतिबंध जैसे कई आन्दोलन चलाकर मुस्लिम युवकों में अपनी पैठ बढ़ाई। कुछ समय बाद कांग्रेसिओं से नजदीकी बढ़ने पर अब्दुल्ला ने अपनी पार्टी का नाम ‘मुस्लिम कांफ्रेंस’ से बदलकर ‘नेशनल कांफ्रेंस’ कर दिया। फिर 1946 में शेख अब्दुल्ला ने महाराजा के खिलाफ कश्मीर छोड़ो आन्दोलन चलाया।
गांधी जी ने इसका समर्थन नहीं किया, फिर भी जवाहर लाल नेहरू ने गांधी की बात न मानते हुए इस आंदोलन को समर्थन देने के लिए श्रीनगर जाने का कार्यक्रम बनाया। कश्मीर के महाराजा ने नेहरु की इस नीच हरकत से क्रोधित होकर चचा को कोहाला पुल पर बंदी बना लिया।
नेहरू ने इसे अपने अपमान के रूप में लिया और इस अपमान को आजीवन याद रखा। और इसी अपमान का बदला लेने के लिए नेहरू पृथ्वी के स्वर्ग कश्मीर को आंतकवाद की आग में झोंक दिया |
श्री सरदार पटेल कश्मीर के भारत में विलय के लिए लगातार प्रयत्न कर रहे थे। महाराजा भारत में विलय के लिए तैयार भी हो गए। उधर कबाइलियों के वेश में पाकिस्तानी सेना गिलगित, बाल्टिस्तान से बहुत अंदर पुंछ और उड़ी सेक्टर तक आ गईं।
यह जानते ही आगबबूला हुए जिन्ना ने मौके की नजाकत का फायदा उठाते हुए कश्मीर के गांवों में पाकिस्तानी सैनिकों से कबाइलियों के वेश में 20 अक्टूबर 1947 से हमले प्रारम्भ करा दिए । 25 अक्टूबर को भारत के रियासती मंत्रालय के सचिव वी.पी. मेनन श्रीनगर पहुंचे। 26 अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर के महाराजा ने अपने राज्य का भारतीय गणराज्य में विलय कर दिया। विलय की सारी प्रक्रिया वैसे ही पूरी की गई थी जैसे देश की अन्य 529 रियासतों की पूरी हुई थी।
महाराजा चाहते थे कि भारतीय सेना जल्द से जल्द श्रीनगर पहुंचे, लेकिन भारतीय सेना अगले दिन 27 अक्टूबर को पहुंचकर, पाकिस्तानियों को श्रीनगर में ईद मनाने से रोक दिया। श्रीनगर तो भारत के पास ही रहा, लेकिन कश्मीर का एक बड़ा भाग मीरपुर, मुजफ्फराबाद, बाल्टिस्तान आदि पर पाकिस्तान ने नेहरू की गलतियों के कारण कब्जा कर लिया |
इसी कांग्रेसी अयाशी में डूबे रहने वाले नेहरु की वजह से आजतक कश्मीर विकट आग में झुलस रहा है,
इसी चचा की वजह से घाटी में में लाखों घर बर्बाद हो गए, ना जाने कितने हजार बच्चे यतीम हो गए, और ना जाने कितने औरतें बेवा हो गई |
और ये आज भी बदस्तूर जारी है |
और यदि इसी तरह कांग्रेस देश पर राज करती रही, तो जल्दी ही देश कई टुकड़ों में कश्मीर की तरह सिसकियाँ ले रहा होगा |
जब शायद हमारी आने वाली नस्लें हमें बैठ कर कोस रही होंगी |
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गौमांस खाने वाला ..... ,शराब पीने वाला ..... ,सिगरेट पीने वाला .... ,जिसके उस समय की कई ख़ूबसूरत महिलाओं के साथ अनैतिक सम्बन्ध थे ...एडविना , बैजन्तीमाला,,सन्यासिन श्रधा और पदमजा नायडू तो सर्व विदित है ही पर कहा जाता है की ये महाशय आज के दिग्विजय सिंह के बाप और कश्मीर के फारुक अब्दुल्ला के बाप के घर बहुतायत जाया करते थे ;हिन्दू धर्मं में ऐसे व्यभिचारी व्यक्ति को क्या कहा जाना चाहिए ?...हाँ ,फूटे करम के करम चाँद गाँधी के प्रिय एवम कांग्रेस्सियो के चाचा जवाहर लाल नेहरु को सनातनी मुर्ख हिन्दू 'पंडित जी ....पंडित जी ...कहते नहीं अघाते थे ... जिसका रामायण , गीता और वैदिक संस्कृति से दूर दूर तक रिश्ता ही नहीं था .... वर्षों तक हिन्दू धर्म की जड़ खोदने वाला गयासुद्दीन गाजी के वंशज जव्हार लाल को मुर्ख हिन्दु सत्ता में बिठा कर खुश भी होते रहे और लोगो के चाचा भी बनाते रहे ...आजादी के बाद भारत की गरीब जनता रोती, बिलखती रही बेचारी में बेबसी के आसू में और ये श्रीमान जी कथित कांग्रेस्सियो के चाचा जी अपने अचकन में गुलाब लगा कर गुल्चर्रे उड़ाते रहे ...मज़े लेते रहे !धन्य है हिन्दू और और उनकी अंध धितरास्ट्रा भक्ति !....अब तो जागो कुंभकर्णी हिन्दुओ ...कांग्रेस भगाओ देश बचाओ ...
 
Congress party--------congress party------------congress party
1. यह पार्टी पूरी तरह से एक मुस्लमान परस्त पार्टी हैं.
2. अपने जन्म से ही यह पार्टी हिंदु विरोधी पार्टी हैं.
3. भगत सिंह को फांसी लगानेका विरोध नहीं किया.
4. खिलाफत आन्दोलन को समर्थन किया.
5. क्रांतिकारियों को आतंकवादी बताते थे.
6. सुभाष चन्द्र बोस को कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटने को मजबूर किया.
7. देश का बंटवारा मंज़ूर किया.
8. यदि बंटवारा हो ही गया था तो पूरी तरह से होना चाहिए था, परन्तु नेहरु-गाँधी के कारन से नहीं हो पाया.
9. कश्मीर समस्या नेहरु परिवार की दें हैं.
10. धारा 370 नेहरु परिवार की देन हैं.
11. जब भारतीय सेना आगे बढ़रही थी तो युद्ध विराम घोषित किया.
12 पूरा कश्मीर भारत के पास आ रहा था, तो नेहरु ने पाकिस्तान के पास एक हिस्सा छोड़ दिया.
13एक हिस्सा चीन के पास जाने दिया.
14. तिब्बत तश्तरी में उठा के चीन को दे दिया.
15. पाकिस्तान को 56 करोड़ रूपये दिए.
16. देश के विभाजन की जिम्मेदार मुस्लिम लीग को सरकार में साझा किया.
17. कश्मीर में श्यामा प्रसाद मुखर्जी को जेल मेंडाल दिया, जहाँ पर उनकी संदेहास्पद अवस्था में मौत हो गयी.
18. 1962 में चीन के सामने शर्मनाक रूप में समर्पण किया.
19. 1971 की जीत को इंदिरा ने 1973 में भुट्टो के सामने हार में बदल दिया.
20. देश में आपातकाल लागू किया.
21. इंदिरा के मरने प् देश में 2०००० सिक्खों का दर्दनाक क़त्ल कर दिया गया.
22. स्वर्ण मंदिर पर हमला किया, और उसे नस्ट कर दिया गया.
23. राजीव गाँधी ने अपने हीतमिल/हिंदु भाइयो पर हमला करने के लिए
श्रीलंका में सेना भेजी, जिसमे हमारे 3००० जवान मारे गए.
24. मुस्लिमो को आरक्षण देना शुरू किया.
25. रामजन्म भूमि का विरोध शुरू किया.
26. राम सेतु को तुडवाना चाहा.
27. साधू संतो का व हिंदु प्रतीकों का अपमान करना शुरू किया.
28 हिंदु को गाली और दुसरे को समर्थन किया.

29. एक लाख औरतो और बच्चो पर रात के समय लाठी व गोली चलवाई.

30. भृष्टाचार के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए.

31. महंगाई ने लोगो से भोजनभी छीन लिया.

32. एक विदेशी औरत को हमारेसर पर बैठा दिया.

33. प्रधानमंत्री की कुर्शी पर एक ही परिवार का राज हो गया.

34. ओसामा को ओसामा जी व संतो को ठग बताते हैं.

35. मुस्लिम्परस्ती के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए.

36. हिंदु होना इस देश में एक गाली के समान हो गया हैं.
 
Congress party--------congress party------------congress party


36. हिंदु होना इस देश में एक गाली के समान हो गया हैं.

kaangressi honaa bhi tou ek gaali ke smaan ho gayaa he ,par koi-koi tou wo gaali khaa ke bhi khush he.
 
सुभाष लेख बहुत बढ़िया ढूंढ के लाया पर यह एक हिन्दू वादी सोच वाले ने लिखा हैं और अधूरा लिखा हैं क्योंकि अगर वो इसे पूरा लिखता तो इसमे जाट नाहर सिंह का भी नाम आता | जाट का नाम लेने से या जाट के बारे मे लिखने इन लोगो को छिंक आती हैं | और यह हिन्दू लेख लिखने मे बेईमानी कर गया राजा हरी सिंह ने लठ आए लिख के दिया था उससे पहले वो कभी हिंदुस्तान मे शामिल नहीं होना चाहता था |
राजपाल जी आपको तो इस लेख से खुशी होनी चाहिए की इसमे एक मुसलमान परिवार हिन्दू बना
:)
 
सुभाष लेख बहुत बढ़िया ढूंढ के लाया पर यह एक हिन्दू वादी सोच वाले ने लिखा हैं और अधूरा लिखा हैं क्योंकि अगर वो इसे पूरा लिखता तो इसमे जाट नाहर सिंह का भी नाम आता | जाट का नाम लेने से या जाट के बारे मे लिखने इन लोगो को छिंक आती हैं | और यह हिन्दू लेख लिखने मे बेईमानी कर गया राजा हरी सिंह ने लठ आए लिख के दिया था उससे पहले वो कभी हिंदुस्तान मे शामिल नहीं होना चाहता था |
राजपाल जी आपको तो इस लेख से खुशी होनी चाहिए की इसमे एक मुसलमान परिवार हिन्दू बना
:)
bhai tere mathe pe khangress ki patti bandh ri s tere samaj koni aav
 
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