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hoodarajesh
Guest
इंसानों की इस भीड़ में जुदा जुदा से हम रहते है .
एक बार सोच के देखो हमें ही इंसान कहते है .
देखा वन में कोतर- कोत्रि को प्यार तो उनका होता है
एक बिछुड़ जाए तो दूसरा अपनी जान को खोता है
मैं भी कोतर बन ना चाहू बुरा कहे कोई लाख मुझे
एक दुसरे पर वे कोई भी दुःख नही सहते है
एक बार सोच के देखो हमें ही इंसान कहते है
मिशाल प्यार की मोर -मोरनी वो प्यार में जीते देखे है
तन को दूर रख एक दुसरे के आंशु पीते देखे है
मैं भी मोर बन ना चाहू आँखों से प्यार करूँगा मैं
तन से प्यार करते इन्सान सवार्थ के आंशु बहते है
एक बार सोच कर देखो हमें ही इंसान कहते है
जोड़ा देखो नाग -नागिन का प्यार प्यार उनका सरेआम होता है
अहित कर दे कोई उन में से एक जान से हाथ वो धोता है
मैं भी नाग बन ना चाहू जहरीला चाहे लोग कहे मुझे
इंसान तो अपने प्रियतम का ख़ुद अहित कर के सोते है
एक बार सोच के देखो हमें ही इंसान कहते है
कोतर -- एक पक्षी जिसे लोग अशुभ मानते है
एक बार सोच के देखो हमें ही इंसान कहते है .
देखा वन में कोतर- कोत्रि को प्यार तो उनका होता है
एक बिछुड़ जाए तो दूसरा अपनी जान को खोता है
मैं भी कोतर बन ना चाहू बुरा कहे कोई लाख मुझे
एक दुसरे पर वे कोई भी दुःख नही सहते है
एक बार सोच के देखो हमें ही इंसान कहते है
मिशाल प्यार की मोर -मोरनी वो प्यार में जीते देखे है
तन को दूर रख एक दुसरे के आंशु पीते देखे है
मैं भी मोर बन ना चाहू आँखों से प्यार करूँगा मैं
तन से प्यार करते इन्सान सवार्थ के आंशु बहते है
एक बार सोच कर देखो हमें ही इंसान कहते है
जोड़ा देखो नाग -नागिन का प्यार प्यार उनका सरेआम होता है
अहित कर दे कोई उन में से एक जान से हाथ वो धोता है
मैं भी नाग बन ना चाहू जहरीला चाहे लोग कहे मुझे
इंसान तो अपने प्रियतम का ख़ुद अहित कर के सोते है
एक बार सोच के देखो हमें ही इंसान कहते है
कोतर -- एक पक्षी जिसे लोग अशुभ मानते है