Inspirational stories

narvir

New member
[h=2]तितली का संघर्ष [/h] एक बार एक आदमी को अपने garden में टहलते हुए किसी टहनी से लटकता हुआ एक तितली का कोकून दिखाई पड़ा. अब हर रोज़ वो आदमी उसे देखने लगा , और एक दिन उसने notice किया कि उस कोकून में एक छोटा सा छेद बन गया है. उस दिन वो वहीँ बैठ गया और घंटो उसे देखता रहा. उसने देखा की तितली उस खोल से बाहर निकलने की बहुत कोशिश कर रही है , पर बहुत देर तक प्रयास करने के बाद भी वो उस छेद से नहीं निकल पायी , और फिर वो बिलकुल शांत हो गयी मानो उसने हार मान ली हो.
इसलिए उस आदमी ने निश्चय किया कि वो उस तितली की मदद करेगा. उसने एक कैंची उठायी और कोकून की opening को इतना बड़ा कर दिया की वो तितली आसानी से बाहर निकल सके. और यही हुआ, तितली बिना किसी और संघर्ष के आसानी से बाहर निकल आई, पर उसका शरीर सूजा हुआ था,और पंख सूखे हुए थे.
वो आदमी तितली को ये सोच कर देखता रहा कि वो किसी भी वक़्त अपने पंख फैला कर उड़ने लगेगी, पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. इसके उलट बेचारी तितली कभी उड़ ही नहीं पाई और उसे अपनी बाकी की ज़िन्दगी इधर-उधर घिसटते हुए बीतानी पड़ी.
वो आदमी अपनी दया और जल्दबाजी में ये नहीं समझ पाया की दरअसल कोकून से निकलने की प्रक्रिया को प्रकृति ने इतना कठिन इसलिए बनाया है ताकि ऐसा करने से तितली के शरीर में मौजूद तरल उसके पंखों में पहुच सके और वो छेद से बाहर निकलते ही उड़ सके.
वास्तव में कभी-कभी हमारे जीवन में संघर्ष ही वो चीज होती जिसकी हमें सचमुच आवश्यकता होती है. यदि हम बिना किसी struggle के सब कुछ पाने लगे तो हम भी एक अपंग के सामान हो जायेंगे. बिना परिश्रम और संघर्ष के हम कभी उतने मजबूत नहीं बन सकते जितना हमारी क्षमता है. इसलिए जीवन में आने वाले कठिन पलों को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखिये वो आपको कुछ ऐसा सीखा जायंगे जो आपकी ज़िन्दगी की उड़ान को possible बना पायेंगे

Note: The story shared here is not my original creation.I have read it before and now I am just share here.

Thanks.
 


मेरी ताकत

जापान के एक छोटे से कसबे में रहने वाले दस वर्षीय ओकायो को जूडो सीखने का बहुत शौक था . पर बचपन में हुई एक दुर्घटना में बायाँ हाथ कट जाने के कारण उसके माता -पिता उसे जूडो सीखने की आज्ञा नहीं देते थे . पर अब वो बड़ा हो रहा था और उसकी जिद्द भी बढती जा रही थी .

अंततः माता -पिता को झुकना ही पड़ा और वो ओकायो को नजदीकी शहर के एक मशहूर मार्शल आर्ट्स गुरु के यहाँ दाखिला दिलाने ले गए . गुरु ने जब ओकायो को देखा तो उन्हें अचरज हुआ कि , बिना बाएँ हाथ का यह लड़का भला जूडो क्यों सीखना चाहता है ? उन्होंने पूछा , “ तुम्हारा तो बायाँ हाथ ही नहीं है तो भला तुम और लड़कों का मुकाबला कैसे करोगे .”
“ ये बताना तो आपका काम है” ,ओकायो ने कहा . मैं तो बस इतना जानता हूँ कि मुझे सभी को हराना है और एक दिन खुद “सेंसेई” (मास्टर) बनना है ” गुरु उसकी सीखने की दृढ इच्छा शक्ति से काफी प्रभावित हुए और बोले , “ ठीक है मैं तुम्हे सीखाऊंगा लेकिन एक शर्त है , तुम मेरे हर एक निर्देश का पालन करोगे और उसमे दृढ विश्वास रखोगे .” ओकायो ने सहमती में गुरु के समक्ष अपना सर झुका दिया . गुरु ने एक साथ लगभग पचास छात्रों को जूडो सीखना शुरू किया . ओकायो भी अन्य लड़कों की तरह सीख रहा था . पर कुछ दिनों बाद उसने ध्यान दिया कि गुरु जी अन्य लड़कों को अलग -अलग दांव -पेंच सीखा रहे हैं लेकिन वह अभी भी उसी एक किक का अभ्यास कर रहा है जो उसने शुरू में सीखी थी . उससे रहा नहीं गया और उसने गुरु से पूछा , “ गुरु जी आप अन्य लड़कों को नयी -नयी चीजें सीखा रहे हैं , पर मैं अभी भी बस वही एक किक मारने का अभ्यास कर रहा हूँ . क्या मुझे और चीजें नहीं सीखनी चाहियें ?” गुरु जी बोले , “ तुम्हे बस इसी एक किक पर महारथ हांसिल करने की आवश्यकता है ” और वो आगे बढ़ गए. ओकायो को विस्मय हुआ पर उसे अपने गुरु में पूर्ण विश्वास था और वह फिर अभ्यास में जुट गया . समय बीतता गया और देखते -देखते दो साल गुजर गए , पर ओकायो उसी एक किक का अभ्यास कर रहा था . एक बार फिर ओकायो को चिंता होने लगी और उसने गुरु से कहा , “ क्या अभी भी मैं बस यही करता रहूँगा और बाकी सभी नयी तकनीकों में पारंगत होते रहेंगे ” गुरु जी बोले , “ तुम्हे मुझमे यकीन है तो अभ्यास जारी रखो ” ओकायो ने गुरु कि आज्ञा का पालन करते हुए बिना कोई प्रश्न पूछे अगले 6 साल तक उसी एक किक का अभ्यास जारी रखा . सभी को जूडो सीखते आठ साल हो चुके थे कि तभी एक दिन गुरु जी ने सभी शिष्यों को बुलाया और बोले ” मुझे आपको जो ज्ञान देना था वो मैं दे चुका हूँ और अब गुरुकुल की परंपरा के अनुसार सबसे अच्छे शिष्य का चुनाव एक प्रतिस्पर्धा के माध्यम से किया जायेगा और जो इसमें विजयी होने वाले शिष्य को “सेंसेई” की उपाधि से सम्मानित किया जाएगा.” प्रतिस्पर्धा आरम्भ हुई. गुरु जी ओकायो को उसके पहले मैच में हिस्सा लेने के लिए आवाज़ दी . ओकायो ने लड़ना शुर किया और खुद को आश्चर्यचकित करते हुए उसने अपने पहले दो मैच बड़ी आसानी से जीत लिए . तीसरा मैच थोडा कठिन था , लेकिन कुछ संघर्ष के बाद विरोधी ने कुछ क्षणों के लिए अपना ध्यान उस पर से हटा दिया , ओकायो को तो मानो इसी मौके का इंतज़ार था , उसने अपनी अचूक किक विरोधी के ऊपर जमा दी और मैच अपने नाम कर लिया . अभी भी अपनी सफलता से आश्चर्य में पड़े ओकयो ने फाइनल में अपनी जगह बना ली . इस बार विरोधी कहीं अधिक ताकतवर, अनुभवी और विशाल था . देखकर ऐसा लगता था कि ओकायो उसके सामने एक मिनट भी टिक नहीं पायेगा . मैच शुरू हुआ , विरोधी ओकायो पर भारी पड़ रहा था , रेफरी ने मैच रोक कर विरोधी को विजेता घोषित करने का प्रस्ताव रखा , लेकिन तभी गुरु जी ने उसे रोकते हुए कहा , “ नहीं , मैच पूरा चलेगा ” मैच फिर से शुरू हुआ . विरोधी अतिआत्मविश्वास से भरा हुआ था और अब ओकायो को कम आंक रहा था . और इसी दंभ में उसने एक भारी गलती कर दी , उसने अपना गार्ड छोड़ दिया !! ओकयो ने इसका फायदा उठाते हुए आठ साल तक जिस किक की प्रैक्टिस की थी उसे पूरी ताकत और सटीकता के साथ विरोधी के ऊपर जड़ दी और उसे ज़मीन पर धराशाई कर दिया . उस किक में इतनी शक्ति थी की विरोधी वहीँ मुर्छित हो गया और ओकायो को विजेता घोषित कर दिया गया . मैच जीतने के बाद ओकायो ने गुरु से पूछा ,” सेंसेई , भला मैंने यह प्रतियोगिता सिर्फ एक मूव सीख कर कैसे जीत ली ?” “ तुम दो वजहों से जीते ,” गुरु जी ने उत्तर दिया . “ पहला , तुम ने जूडो की एक सबसे कठिन किक पर अपनी इतनी मास्टरी कर ली कि शायद ही इस दुनिया में कोई और यह किक इतनी दक्षता से मार पाए , और दूसरा कि इस किक से बचने का एक ही उपाय है , और वह है वोरोधी के बाएँ हाथ को पकड़कर उसे ज़मीन पर गिराना .” ओकायो समझ चुका था कि आज उसकी सबसे बड़ी कमजोरी ही उसकी सबसे बड़ी ताकत बन चुकी थी .
मित्रों human being होने का मतलब ही है imperfect होना. Imperfection अपने आप में बुरी नहीं होती, बुरा होता है हमारा उससे deal करने का तरीका. अगर ओकायो चाहता तो अपने बाएँ हाथ के ना होने का रोना रोकर एक अपाहिज की तरह जीवन बिता सकता था, लेकिन उसने इस वजह से कभी खुद को हीन नहीं महसूस होने दिया. उसमे अपने सपने को साकार करने की दृढ इच्छा थी !
 
Last edited:
एक बार हजरत बुस्तामी अपने कुछ दोस्तों के साथ दरिया के किनारे बेठे थे, उनकी नज़र एक बिच्छू पर पड़ी जो पानी में डूब रहा था. हजरत ने उसे डूबने से बचाने के लिए पकड़ा तो उसने डंक मार दिया. कुछ देर बाद वो दोबारा पानी में जा गिरा , इस बार फिर हज़रत उसे बचने के लिए आगे बढे, पर उसने फिर डंक मार दिया. चार बार ऐसा ही हुआ, तब एक दोस्त से रहा न गया तो उसने पूछा हुजुर आपका ये काम हमारी समझ के बाहर है, ये डंक मार रहा है और आप इसे बचaने से बाज़ नहीं आते. उन्होंने बहुत तकलीफ में मुस्कुराते हुए कहा कि जब ये बुराई से बाज़ नहीं आता तो मैं अच्छाई से क्यूँ बाज़ आऊं?
 
Awesome !!!!!!

एक बार हजरत बुस्तामी अपने कुछ दोस्तों के साथ दरिया के किनारे बेठे थे, उनकी नज़र एक बिच्छू पर पड़ी जो पानी में डूब रहा था. हजरत ने उसे डूबने से बचाने के लिए पकड़ा तो उसने डंक मार दिया. कुछ देर बाद वो दोबारा पानी में जा गिरा , इस बार फिर हज़रत उसे बचने के लिए आगे बढे, पर उसने फिर डंक मार दिया. चार बार ऐसा ही हुआ, तब एक दोस्त से रहा न गया तो उसने पूछा हुजुर आपका ये काम हमारी समझ के बाहर है, ये डंक मार रहा है और आप इसे बचaने से बाज़ नहीं आते. उन्होंने बहुत तकलीफ में मुस्कुराते हुए कहा कि जब ये बुराई से बाज़ नहीं आता तो मैं अच्छाई से क्यूँ बाज़ आऊं?
 
एक बार हजरत बुस्तामी अपने कुछ दोस्तों के साथ दरिया के किनारे बेठे थे, उनकी नज़र एक बिच्छू पर पड़ी जो पानी में डूब रहा था. हजरत ने उसे डूबने से बचाने के लिए पकड़ा तो उसने डंक मार दिया. कुछ देर बाद वो दोबारा पानी में जा गिरा , इस बार फिर हज़रत उसे बचने के लिए आगे बढे, पर उसने फिर डंक मार दिया. चार बार ऐसा ही हुआ, तब एक दोस्त से रहा न गया तो उसने पूछा हुजुर आपका ये काम हमारी समझ के बाहर है, ये डंक मार रहा है और आप इसे बचaने से बाज़ नहीं आते. उन्होंने बहुत तकलीफ में मुस्कुराते हुए कहा कि जब ये बुराई से बाज़ नहीं आता तो मैं अच्छाई से क्यूँ बाज़ आऊं?

या काहणी असली किः की स बेरा ना , महार्षि दयानद पे भी इस्सी-ए कहाणी स , गुरु नानक पे भी न्यू-की न्यू कहाणी स ,अर एक और किहे ऋषि के नाम पे भी सुणी थी | एक कहाणी ने सब आपणे-आपणे धर्मगुरु के चेप देवें सें, इस्सा लागे स |
 
[h=2] आप हाथी नहीं इंसान हैं ![/h] एक आदमी कहीं से गुजर रहा था, तभी उसने सड़क के किनारे बंधे हाथियों को देखा, और अचानक रुक गया. उसने देखा कि हाथियों के अगले पैर में एक रस्सी बंधी हुई है, उसे इस बात का बड़ा अचरज हुआ की हाथी जैसे विशालकाय जीव लोहे की जंजीरों की जगह बस एक छोटी सी रस्सी से बंधे हुए हैं!!! ये स्पष्ठ था कि हाथी जब चाहते तब अपने बंधन तोड़ कर कहीं भी जा सकते थे, पर किसी वजह से वो ऐसा नहीं कर रहे थे.
उसने पास खड़े महावत से पूछा कि भला ये हाथी किस प्रकार इतनी शांति से खड़े हैं और भागने का प्रयास नही कर रहे हैं ? तब महावत ने कहा, ” इन हाथियों को छोटे पर से ही इन रस्सियों से बाँधा जाता है, उस समय इनके पास इतनी शक्ति नहीं होती की इस बंधन को तोड़ सकें. बार-बार प्रयास करने पर भी रस्सी ना तोड़ पाने के कारण उन्हें धीरे-धीरे यकीन होता जाता है कि वो इन रस्सियों नहीं तोड़ सकते,और बड़े होने पर भी उनका ये यकीन बना रहता है, इसलिए वो कभी इसे तोड़ने का प्रयास ही नहीं करते.”
आदमी आश्चर्य में पड़ गया कि ये ताकतवर जानवर सिर्फ इसलिए अपना बंधन नहीं तोड़ सकते क्योंकि वो इस बात में यकीन करते हैं!!

इन हाथियों की तरह ही हममें से कितने लोग सिर्फ पहले मिली असफलता के कारण ये मान बैठते हैं कि अब हमसे ये काम हो ही नहीं सकता और अपनी ही बनायीं हुई मानसिक जंजीरों में जकड़े-जकड़े पूरा जीवन गुजार देते हैं.

याद रखिये असफलता जीवन का एक हिस्सा है ,और निरंतर प्रयास करने से ही सफलता मिलती है. यदि आप भी ऐसे किसी बंधन में बंधें हैं जो आपको अपने सपने सच करने से रोक रहा है तो उसे तोड़ डालिए….. आप हाथी नहीं इंसान हैं.

 
या काहणी असली किः की स बेरा ना , महार्षि दयानद पे भी इस्सी-ए कहाणी स , गुरु नानक पे भी न्यू-की न्यू कहाणी स ,अर एक और किहे ऋषि के नाम पे भी सुणी थी | एक कहाणी ने सब आपणे-आपणे धर्मगुरु के चेप देवें सें, इस्सा लागे स |
Sir,

story does'nt matter that it is characterized on maharshi dayanand,gurunanak,etc..the main things is the moral of the story which gives us inspiration to understand and do something better in our life.


If we can learn something from these stories,its better.
otherwise in my view there is no need for much argument on this topic .


Thanks
With Regards
 
Last edited:
या काहणी असली किः की स बेरा ना , महार्षि दयानद पे भी इस्सी-ए कहाणी स , गुरु नानक पे भी न्यू-की न्यू कहाणी स ,अर एक और किहे ऋषि के नाम पे भी सुणी थी | एक कहाणी ने सब आपणे-आपणे धर्मगुरु के चेप देवें सें, इस्सा लागे स |

Friend,

Aapne theek bataya.

Sabhi dharamacharya burai ke sthan per achai phalane ka prayas karate hein aur is tarah kee kahaniyan sarvavyapi mahatav kee hone ke karan naya naya rup lekar bar baar prgat hoti rahti hein.

Thanks
 
नरवीर भाई,

आपकी कहानियां बहुत अच्छी लगी.

कृपया लिखते रहें ...
 
Friend,

Aapne theek bataya.

Sabhi dharamacharya burai ke sthan per achai phalane ka prayas karate hein aur is tarah kee kahaniyan sarvavyapi mahatav kee hone ke karan naya naya rup lekar bar baar prgat hoti rahti hein.

Thanks

Ek baar fir aap Sir, How are you ?
 
[h=2]Things are not always as they appear[/h]
There was once a man who was ship-wrecked and stranded on an island. Every day he prayed asking God to send someone to rescue him, but to his disappointment, no one ever came.


Months passed and this man learned how to survive on the island. During this time, he accumulated things from the island and stored them in a hut that he constructed. One day after hunting for food and returning back to his hut, much to his dismay he saw that his hut was on fire along with everything else he owned!


All of his possessions were going up in smoke! The only thing he had left were the clothes on his back. Initially he was in shock, and then he was consumed with anger and rage!

In his fury he threw a fist into the air and began cursing God and yelling, “God, how could you let this happen to me? I’ve been praying everyday for months about being rescued and no one has come, and now everything that I have is on fire! How could you do to this to me! Why did you let this happen?”

Later the man was on his hands and knees weeping heavily when he happened to look up and catch sight of a ship coming in his direction. The man was rescued and as they were heading back to civilization the man asked the captain, “How were you able to find me?”


The captain responded, “We were voyaging across the ocean when we noticed on the horizon a column of smoke going up. We decided to go check it out and when we did, that’s when we found you!”

In life we are going to be confronted with challenges, problems, and disasters. But keep in mind that what the devil has meant for bad, God can transform into your good!
 
A good story Narvir and there is another story with the same theme. Hope you will like it.

[h=1]Things Aren't Always as They Seem.[/h]
Two traveling angels stopped to spend the night in the home of a wealthy family. The family was rude and refused to let the angels stay in the mansion's guestroom. Instead the angels were given a small space in the cold basement. As they made their bed on the hard floor, the older angel saw a hole in the wall and repaired it. When the younger angel asked why, the older angel replied, "Things aren't always what they seem."The next night the pair came to rest at the house of a very poor, but very hospitable farmer and his wife. After sharing what little food they had, the couple let the angels sleep in their bed where they could have a good night's rest. When the sun came up the next morning the angels found the farmer and his wife in tears. Their only cow, whose milk had been their sole income, lay dead in the field.The younger angel was infuriated and asked the older angel "How could you have let this happen? The first man had everything, yet you helped him," she accused. "The second family had little but was willing to share everything, and you let the cow die.""Things aren't always what they seem," the older angel replied. "When we stayed in the basement of the mansion, I noticed there was gold stored in that hole in the wall. Since the owner was so obsessed with greed and unwilling to share his good fortune, I sealed the wall so he wouldn't find it. Then last night as we slept in the farmers bed, the angel of death came for his wife. I gave him the cow instead."Things aren't always what they seem."​
 


The 7 Habits of Happy People

​

खुश
रहने वाले लोगों की 7 आदतें

​
Friends, खुश रहना मनुष्य का जन्म जात स्वाभाव होता है . आखिर एक छोटा बच्चा अक्सर खुश क्यों रहता है ?
क्यों हम कहते हैं कि childhood days life के best days होते हैं ? क्यों कि हम पैदाईशी HAPPY होते हैं ; पर जैसे -जैसे हम बड़े होते हैं हमारा environment, हमरा समाज हमारे अन्दर impurity घोलना शुरू कर देता है ….और धीरे -धीरे impurity का level इतना बढ़ जाता है कि happiness का natural state sadness के natural state में बदलने लगता है .

पर ऐसा सबके साथ नहीं होता है दुनिया में ऐसे बहुत से लोग हैं जो अपनी Happy रहने की natural state को बचाए रख पाते हैं और Life-time खुशहाल रहते हैं .
तो क्या ऐसे व्यक्ति हमेशा खुश रहते हैं ? नहीं , औरों की तरह उनके जीवन में भी दुःख-सुख का आना जाना लगा रहता है , पर आम तौर पर ऐसे व्यक्ति व्यर्थ की चिंता में नहीं पड़ते और अक्सर हँसते -मुस्कुराते और खुश रहते हैं .
तो सवाल ये उठता है कि जब ये लोग खुश रह सकते हैं तो बाकी सब क्यों नहीं ?

आखिर उनकी ऐसी कौन सी
आदतें हैं जो उन्हें दुनिया भर की टेंशन के बीच भी खुशहाल बनाये रखती हैं ?
आज इस लेख के जरिये मैं आपके साथ खुशहाल लोगों की 7 आदतें share करने जा रहा हूँ जो शायद आपको भी खुश रहने में मदद करें .तो आइये जानते हैं उन सात आदतों को :

Habit 1: खुश रहने वाले अच्छाई खोजते हैं बुराई नहीं :

Human beings
की natural tendency होती है कि वो negativity को जल्दी catch करते हैं . Psychologists इस tendency को “Negativity bias” कहते हैं . अधिकतर लोग दूसरों में जो कमी होती है उसे जल्दी देख लेते हैं और अच्छाई की तरफ उतना ध्यान नहीं देते पर खुश रहने वाले तो हर एक चीज में , हर एक situation में अच्छाई खोजते हैं , वो ये मानते हैं कि जो होता है अच्छा होता है .
किसी भी व्यक्ति में अच्छाई देखना बहुत आसान है ,बस आपको खुद से एक प्रश्न करना है , कि , “ आखिर क्यों यह व्यक्ति अच्छा है ?” , और यकीन जानिये आपका मस्तिष्क आपको ऐसी कई अनुभव और बातें गिना देगा की आप उस व्यक्ति में अच्छाई दिखने लगेगी .

एक
बात और , आपको अच्छाई सिर्फ लोगों में ही नहीं खोजनी है , बल्कि हर एक situation में आपको positive रहना है और उस मे क्या अच्छा है ये देखना है .

For example ,
अगर आप किसी job interview में select नहीं हुए तो आपको ये सोचना चाहिए कि शायद भागवान ने आपके लिए उससे भी अच्छी job रखी है जो आपको देर-सबेर मिलेगी, और आप किसी अनुभवी व्यक्ति से पूछ भी सकते हैं, वो भी आपको यही बताएगा .
 
Last edited:
Habit 3: खुश रहने वाले लोग अपने चारो तरफ एक strong support system develop करते हैं :

ये support system दो pillars पे टिका होता है Family and Friends( F&F). ज़िन्दगी में खुश रहने के लिए F&F का बहुत बड़ा योगदान होता है .

भले
आपके पास दुनिया भर की दौलत हो , शोहरत हो लेकिन अगर F&F नहीं है तो आप ज्यादा समय तक खुश नहीं रह पायेंगे .

हो
सकता है ये आपको बड़ी obvious सी बात लगे , ये लगे की आपके पास भी बड़े अच्छे दोस्त हैं और बहुत प्यार करने वाला परिवार है , लेकिन इस पर थोडा गंभीरता से सोचिये . आपके पास ऐसे कितने friends हैं , जिन्हें आप बिना किसी झिझक के रातके 3 बजे भी phone करके उठा सकें या कभी भी financial help ले सकें?
Family and friends को कभी भी for granted नहीं लेना चाहिए , एक strong relationship बनाने के लिए आपको अपने हितों से ऊपर उठ कर देखना होता है . , दूसरे की care करनी होती है , और उन्हें genuinely like करना होता है .

जितना हो सके अपने रिश्तों को बेहतर बनाएं , छोटी -छोटी चीजें जैसे कि Birthday wish करना, बधाई देना , सच्ची प्रशंशा करना , मुस्कुराते हुए मिलना , गर्म जोशी से हाथ मिलाना , गले लगना आप के संबंधों को प्रगाढ़ बनता है .

और जब आप ऐसा करते हैं तो बदले में आपको भी वही मिलता है और आपकी ज़िन्दगी को खुशहाल बनाता है .
 
Last edited:
Habit 4: खुश रहने वाले अपने मन का काम करते हैं या जो काम करते हैं उसमे मन लगाते हैं :

यदि
आप अपने interest का, अपने मन का काम करते हैं तो definitely वो आपके Happiness Quotient को बढ़ाएगा , लेकिन ज्यादातर लोग इतने lucky नहीं होते , उन्हें ऐसी job या business में लगना पड़ता है जो उनके interest के हिसाब से नहीं होतीं .

पर
खुश रहने वाले लोग जो काम करते हैं उसी में अपना मन लगा लेते हैं , भले ही parallely वो अपना पसंदीदा काम पाने का प्रयास करते रहे . मैंने कई बार लोगों को जहाँ job करते हैं उस company की बुराई करते सुना है , अपने काम को दुनिया का सबसे बेकार काम कहते सुना है , ऐसा करना आपकी life को और भी difficult बनता है .
खुश रहने वाले अपने काम की बुराई नहीं करते , वो उस के सकारात्मक पहलुओं पर focus करते हैं और उसे enjoy करते हैं .

मगर
, यहाँ मैं यह ज़रूर कहना चाहूँगा कि यदि हम दुनिया के सबसे खुशहाल लोगों को देखें तो वो वही लोग होंगे जो अपने मन का काम करते हैं , इसलिए यदि आप जो कर रहे हैं उसे enjoy करना , उससे सीखना अच्छी बात है पर याद रखिये: ”आपका काम आपकी जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा होगा, और truly-satisfied होने का एक ही तरीका है की आप वो करें जिसे आप सच-मुच एक बड़ा काम समझते हों…और बड़ा काम करने का एक ही तरीका है की आप वो करें जो करना आप enjoy करते हों.”
 
Last edited:
Back
Top