'Narsingh Bhajni' of village Bhaaproda (Rohtak - now Jhajjar) had composed the famous raagni "Ghar dekhya jab Haali ka" in 1950s. Here is another ragni composed by him which is true in today's times. May his soul rest in peace !
बस देख ली आजादी हामनै म्हारे हिन्दुस्तान की ।
सबसे बुरी हालत सै आज मजदूर और किसान की ।।
न्यूं कहो थे हाळियां नै सब आराम हो ज्यांगे -
खेतों में पानी के सब इंतजाम हो ज्यांगे ।
घणी कमाई होवैगी, थोड़े काम हो ज्यांगे -
जितनी चीज मोल की, सस्ते दाम हो ज्यांगे ।
आज हार हो-गी थारी कही उलट जुबान की ।
सबसे बुरी हालत सै आज मजदूर और किसान की ॥
जमींदार कै पैदा हो-ज्यां, दुख विपदा में पड़-ज्यां सैं -
उस्सै दिन तैं कई तरहां का रास्सा छिड़-ज्या सै ।
लगते ही साल पन्द्रहवां, हाळी बणना पड़-ज्या सै -
घी-दूध का सीच्या चेहरा कती काळा पड़-ज्या सै ।
तीस साल में बूढ़ी हो-ज्या आज उमर जवान की ।
सबसे बुरी हालत सै आज मजदूर और किसान की ॥
पौह-माह के महीने में जाडा फूक दे छाती -
पाणी देती हाणां मारां चादर की गात्ती ।
चलैं जेठ में लू, गजब की लगती तात्ती -
हाळी तै हळ जोड़ै, सच्चा देश का साथी ।
फिर भी भूखा मरता, देखो रै माया भगवान की ।
सबसे बुरी हालत सै आज मजदूर और किसान की ॥
बेईमानी तै भाई आज धार ली म्हारे लीडर सारों नै -
रिश्वत ले कै जगहां बतावैं आपणे मिन्तर प्यारों नै ।
कर दिया देश का नाश अरै इन सारे गद्दारों नै -
आज कुछ अकल छोडी ना हाळी लोग बिचारों मैं ।
आज तो कुछ भी कद्र नहीं है एक मामूली इंसान की ।
सबसे बुरी हालत सै आज मजदूर और किसान की ॥
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बस देख ली आजादी हामनै म्हारे हिन्दुस्तान की ।
सबसे बुरी हालत सै आज मजदूर और किसान की ।।
न्यूं कहो थे हाळियां नै सब आराम हो ज्यांगे -
खेतों में पानी के सब इंतजाम हो ज्यांगे ।
घणी कमाई होवैगी, थोड़े काम हो ज्यांगे -
जितनी चीज मोल की, सस्ते दाम हो ज्यांगे ।
आज हार हो-गी थारी कही उलट जुबान की ।
सबसे बुरी हालत सै आज मजदूर और किसान की ॥
जमींदार कै पैदा हो-ज्यां, दुख विपदा में पड़-ज्यां सैं -
उस्सै दिन तैं कई तरहां का रास्सा छिड़-ज्या सै ।
लगते ही साल पन्द्रहवां, हाळी बणना पड़-ज्या सै -
घी-दूध का सीच्या चेहरा कती काळा पड़-ज्या सै ।
तीस साल में बूढ़ी हो-ज्या आज उमर जवान की ।
सबसे बुरी हालत सै आज मजदूर और किसान की ॥
पौह-माह के महीने में जाडा फूक दे छाती -
पाणी देती हाणां मारां चादर की गात्ती ।
चलैं जेठ में लू, गजब की लगती तात्ती -
हाळी तै हळ जोड़ै, सच्चा देश का साथी ।
फिर भी भूखा मरता, देखो रै माया भगवान की ।
सबसे बुरी हालत सै आज मजदूर और किसान की ॥
बेईमानी तै भाई आज धार ली म्हारे लीडर सारों नै -
रिश्वत ले कै जगहां बतावैं आपणे मिन्तर प्यारों नै ।
कर दिया देश का नाश अरै इन सारे गद्दारों नै -
आज कुछ अकल छोडी ना हाळी लोग बिचारों मैं ।
आज तो कुछ भी कद्र नहीं है एक मामूली इंसान की ।
सबसे बुरी हालत सै आज मजदूर और किसान की ॥
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