एक बै एक फौजी जाट छुट्टी काट कै मद्रास जाण लागरया था .उसकै साथ आली सीट सरदार की थी;
सरदार बोल्या ;भाई मैं सोंऊ सूं जब आगरा आज्या तो मैंने जगा दिए /
जाट बोल्या ; ठीक सै सो जया /
इब सरदार सो गया अर जाट का टेम पास ना हो ; जाट नै टेम पास करण खातर सरदार के सुते -सुते के बाल एर दाढ़ी काट दिए /
जब आगरा आया तो जाट नै सरदार जगा दिया ;जब सरदार उतरण लाग्या तो खिड़की धोरै सीसे मै अपना मुह देख्या अर उल्टा आया अर जाट तै बोल्या ;आरै तनै सरदार जग!ना था , मैं क्यूँ जगा दिया/
सरदार बोल्या ;भाई मैं सोंऊ सूं जब आगरा आज्या तो मैंने जगा दिए /
जाट बोल्या ; ठीक सै सो जया /
इब सरदार सो गया अर जाट का टेम पास ना हो ; जाट नै टेम पास करण खातर सरदार के सुते -सुते के बाल एर दाढ़ी काट दिए /
जब आगरा आया तो जाट नै सरदार जगा दिया ;जब सरदार उतरण लाग्या तो खिड़की धोरै सीसे मै अपना मुह देख्या अर उल्टा आया अर जाट तै बोल्या ;आरै तनै सरदार जग!ना था , मैं क्यूँ जगा दिया/
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