ravinderjeet
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मन्नै तो या रानी तोमिरिस कित्तै भी जाट नहीं पढ़ी...याहड़ै भी कित्तै कोन्या लिख रह्या कि या जाट थी... Tomyris
हेरोडोटस ईसा के जन्म से लगभग 500 वर्ष पूर्व हुआ था...जाट भारत में उससे पहले से हैं... ये अंग्रेजों और मुसलमानों द्वारा जाटों को बरगलाने की साजिश है कि जाट एक-डेढ़ हजार साल पहले मध्य एशिया से यहां आए थे...हेरोडोटस की बातों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया...लगभग 5000 साल पहले श्रीकृष्ण के जन्म के समय यहां राजपूत (ठाकुर) थे, यादव थे, लेकिन जाट नहीं थे...हा....हा...हा...व्हाट ए जोक...श्रीकृष्ण तो पैदा ही जाटों में हुए थे...यादवों में तो वे पले-बढ़े थे...जो शीर्ष भारतीय विद्वान हुए हैं, वे सब इस बात को जानते भी हैं और मानते भी हैं...जाटों के ठाकुरों और कई अन्य जातियों से जो गोत्र मिलते हैं, क्या वह सिर्फ एक-डेढ़ हजार साल पहले से है....? शिवजी, हनुमान और अन्य हिंदू देवी-देवताओं के प्रति जो अगाध श्रद्धा जाटों के ह्रदयों में है, क्या वो सब बस एक-डेढ़ हजार साल पहले से है...? नहीं, नहीं...जाटों को विदेशी कहकर इनमें भारत वर्ष के खिलाफ नफरत भरने की साजिश को हमें समझना चाहिए...जैसे ही हम ये सुनते हैं कि हम तो मध्य एशिया से यहां आए थे, वैसे ही हम खुद को भारत से, महान हिंदू धर्म से दूर-सा करने का प्रयास करने लगते हैं...बस इसी बात को हमें समझना होगा...इस तरह की बातें अंग्रेजों और मुसलमानों द्वारा फैलाई गईं, ताकि भारतीयों और हिंदुओं की एकजुटता को तोड़ा जा सके, जिसमें वे कुछ हद तक कामयाब भी रहे...कुछ जाटों का मुसलमान और सिख बनना इस बात का सबूत है...
ऊपर एक और भ्रमित करने वाली बात पढ़ने को मिली कि राजस्थान में ठाकुरों से पहले जाटों का शासन था... History of Rajasthan
यो तागा इतिहास पे बहस करण खातर शुरू कोणी कर्या था | आप बहस करण खातर हिस्ट्री खंड में जा सकते हो | आप की जानकारी के लिए ---- ९ वि सदी से पहले ठाकुरों का और १२ वि सदी से पहले (माऊंट आबू का मशहूर यग्य) राजपूतों का कही भी जीकर नहीं मिलता | वास्तव में राजपूत कई सारी जातियों का समूह हे , और इनमे आपस में नीच उंच की भावना बहूत हे | आपस में लड़ाई में वे एक दुसरे की ओरिजनल जाती को गाली भी देते हैं | जो पहले राजपूत बना वो ऊंचा और बाद में राजपूत बना वो नीचा | ताजा उधाहरण हे डोग्राओं का , इन् को महाराजा रणजीत सिंह ने अपनी सेना में भारती किया था पहाड़ी रास्ते दीखाने बताने के लिए | ये गडरिये होते थे | बाद में इनको पहाड़ों की रियासत बख्सी गई थी | पिछले ५०-६० साल से ये अपने को डोगरा राजपूत लिखने लग गए | जाट मध्या एशिया से नहीं आये पर गए तो हैं | ५००० साल से भारत में और २-३००० हजार साल से मध्य एशिया ,अरबस्तान और यूरोप में जीकर मिलता हे |
हिन्दू कोई धरम नहीं हे | ये एक जीवन पद्धति हे | झूठे देवी देवताओं ने और बारह्म्नो ने हमेशा जट्टों का सत्या नाश ही किया हे| आज भी कर रहे हैं | अपने दुश्मनों को पहचानना सीखो |