arvind ji,
... I had taken up the issue of the term 'jaatyah' in yaska's nirukta, i.14,explained as 'aatnarah'. I had pointed out that the term here has no reference to our caste term 'jaata', but only refers to a roaming mendicant(with long hair locks). You may like to revisit my post on the issue.
...when friffith uses the term 'singer' we have to give him the allowance of limitations of a translator and interpret the term 'singer' (for jaritaa) in light of the nuances it conjures up in our mind. After all we do sing songs in praise of paramapitaa parameshvara. I believe in keeping a window open in my well protected house.
इस पर मेरा मत इस प्रकार है कि,
आटन शब्द से मुझे ध्यान आता है कि खैबर के दर्रे में रहने वाले मोमांद पठानों में मंगल पठान जाति जिसका वर्णन वेदों में मधुमंत के नाम से भी है, एक विशेष प्रकार की गायन शैली का प्रयोग करते हैं जिसे कि आटन कहा जाता है । मंगल पठानों कि विशेषता है कि वे साधारणतया लम्बे केश रखने के शोकीन रहे हैं । कई पठान जातियाँ लम्बे केश की शौकीन हैं, जैसे कि मेहसूद ।
इस गायन शैली की विशेषता यह है कि इसे अर्ध-चंद्राकार घेरे में केवल पुरुषों द्वारा गाया जाता है । तथा इसमें हाथों से ताली पीटने के साथ ही सिर को आगे की तरफ जोर से हवा में पटका जाता है, जिससे कि केश पीछे से आगे की तरफ जोर से झूल जाते हैं, फिर तुरंत ही सिर को पीछे की तरफ पटका जाता है ताकि केश पुनः पहले कि अवस्था में आ जाएं ।
एक मत के अनुसार पाणिनि का संबंध इन मंगल पठानों से है ।
धन्यवाद
अम्बरीष ढाका