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marketing-1

बीवी के साथ मार्केटिंग को जाना एक सुखद अनुभव है. .. मतलब अपने अपने बिबी के साथ. इस बात से कोई भी इन्कार नही कर सकता ... खासकर अगर उनके बीवी के सामने पुछा जाए तो.

मै और मेरी बीवी मार्केटिंग के लिए गए थे. जैसे की हमेशा होता है वह आगे चल रही थी और मै पिछे चल रहा था. कुछ लेने लायक है क्या यह मै देख रहा था. एक दुकान पर लगे एक इश्तेहार ने मेरा ध्यान खिंच लिया.

लिखा था, " लहसून छिलने का यंत्र.... सिर्फ दस रुपए में ' "यंत्र' इस शब्द ने मेरी उत्सुकता बढाई ... वैसेतो आजकल किसी भी बात का यंत्र मील जाता है... दुकानमालीक के पास गया मैने उसे वह "यंत्र' दिखाने के लिए कहा. देखता हूं तो 6 इंच लंबी और 3 इंच परिघ की एक रबड की ट्यूब थी. मै उसे उलट पुलटकर देखने लगा. असल मे मै उस यंत्र को शुरु करने का बटन ढूंढ रहा था.

"अजीब बेवकुफ है ...' इस अविर्भाव मे उस दुकानमालीक ने वह ट्यूब मेरे हाथ से छीन लिया. अब वह दुकानमालीक उस यंत्र का मुझे डेमॉस्ट्रेशन देने लगा. उसने एक लहसुन ट्यूब मे डाला और वह उस ट्यूब को जोर जोर से रगडने लगा. अगर इतने जोर से रगडो तो साला लहसून छीलने के बजाय अपना हाथ ना छील जाये और इतने जोर से उस ट्यूब को रगडने की बजाय अगर डायरेक्ट लहसून को रगडो तो इतनी देर में कम से कम आधा किलो लहसून छील जायेगा अब "अजीब बेवकुफ है ...' इस अविर्भाव मे देखने की मेरी बारी थी.

इतनेमें " अजी देखिए तो... कान के झुमके ... कैसे लग रहे है ' बाजू के दुकानसे मेरी पत्नीने कहा. मै वहा गया. मै थोडा अलर्ट होगया क्योंकी अब उस दुकानमालीक के मार्केटिंग स्कीलसे मेरी मार्केटिंग स्कीलका सच्चा इम्तेहान था. मैने उस दुकानमालीकसे दाम पुछा

" दो सौ रुपए... आप है इसलिए देडसोमे देंगे' उसने कहा.

" आप है इसलिए ...' मैने उसे घुरकर देखा. मै उसे नही जानता था. हो सकता है वह मुझे जानता हो...

शायद उसने मेरे मन की बात भांप ली.

" पिछले बार भी मैने आपसे जादा पैसे नही लिए थे' उसने कहा.

वह मुझे कितना जानता है यह मै समझ गया - क्योंकी मै पहली बार उसके दुकान मे गया था.

लेकिन उसने वह बात इतने कॉन्फीडंस से कही थी की उसे कुछ कहने की बजाय मैने ही अपने आपको को समझाया की शायद गलतीसे वह मुझे कोई और समझ रहा हो. बात झुमकोंकी बोलू तो वह झुमके खरीदने की मेरी बिलकुल इच्छा नही थी. अब तक के अनुभवसे मै अपनी बीवीकी मानसीकता अच्छी तरह से समझ चुका था. मै अगर झुमकोंको खराब कहूं तो वह उसे जरुर खरीद लेगी. इसलिए मैने कहा " बहुतअच्छे है ... कसमसे आपको बहुत जचेंगे'

" ठीक है ... मेरी बहन के लिए भी एक पेअर पॅक कर देना' उसने मुझे पैसे चुकाने के लिए इशारा करते हूए कहा.

अब करने लायक कुछ नही बचा था. चुपचाप पैसे निकालकर मैने दुकानमालीकको दिए. शायद मेरे बिवी की मानसीकता पहचाननेमें मैने देर लगा दी थी. उसकी मानसीकता पहचानके पहले उसनेही मेरी मानसीकता पहचान ली थी.
 
marketing-2

एक जगह रास्ते के किनारे एक ज्योतिषी बैठा था. वहां " हमारा पत्थर पहनीए और अपना भविष्य बदलीए'. ऐसा बोर्ड लगाया हूवा था. मेरी पत्नी ने मुझसे उसके पास चलने का आग्रह किया. आग्रह कैसा हठ किया. असल में वह हठ के सुनहरे मुलायम कपडेमे लपेटी हूई मीठी धमकी थी.

मै उसे समझा बुझाने की कोशीश करने लगा. यहां समझा बुझाने के बजाय सिर्फ बुझाना ज्यादा तर्कसंगत लगता है1 " देखो जी ... वह रस्तेपर बैठनेवाला ज्योतिषी ... पहले तो भविष्य बदलने की जरुरत उसको खुद को है ... खुद अपना भविष्य बदल नही सकता वह अपना भविष्य क्या बदलेगा..1 '

" हां ... तुम्हारे होते हूए तो अपना भविष्य बदलने से रहा' वह तनकर बोली.

आगे वह कुछ नही बोली. वैसे इतना कुछ बोलने के बाद आगे बोलने का और क्या बचा था शायद उसने अपना हठ छोड दिया था या फिर उसे मेरी बात नही जची थी. सच्चाई घर जाकर ही पता चलनी थी.

फिर हम बस स्टॉप चले गए. बेंचपर बैठकर हम सिटी बस की राह देखने लगे. एक लंगडा, अंधा भिकारी गाना गाकर पैसे मांग रहा था. सबको उसपर दया आने लगी. बहुत लोगोंने उसे पैसे दिए इसलिए मैने भी दिए. और मैने दीए इसलिये हमारे बाजूवालेने भी दिए. नेबर टेडंसी1 पडोसीने गाडी ली ना फिर मैभी लेता हू ऐसे. उसके लिये भलेही कर्जमें डूबने नौबत क्योंना आये. थोडी देर में एक और भिखारी "मेरी मां बिमार है' कहते हूए हाथ फैलाने लगा. उसको किसीनेभी पैसे नही दिए इसलिए मैनेभी नही दिए. और मैने नही दिये इसलिये हमारे बाजुवालेने भी नही दिये वह जाता नही की उसके पिछे वे तालियां बजाने वाले आ गए .. तृतीय पंथी उनको पैसे ना देने की किसकी हिम्मत. सब लोगोंने चुपचाप उसे पैसे दे दिए. नही दोगे तो सिधा जेब मे हाथ डालकर पैसे लेने की उनकी मजाल. वैसे पैसे निकालने के लिए वे सामनेवाला आदमी देखकर अलग अलग नुस्खे अपनाते है.

" ए चिकने ...दे ना' किसीके गाल को हाथ लगायेंगे. या फिर " ए भिडू ...दे ना' कहकर कही और हाथ लगायेंगे.

" यहां अगर जादा देर बैठे तो थोडी देर बाद कही हमें भीख मांगने की नौबत ना आ जाए' मैने मेरे पत्नीसे उसके सामने हाथ फैलाने की चेष्टा करते हूए मजाक में कहां.

ऐसे मजाक की हवा निकालकर उसे कैसे भद्दा बनाना तो कोई मेरे बिवीसे सिखे... अपने गंभीर चेहरे को और गंभीर बनाते हूए झट से उसने अपने पर्स से अठन्नी निकाली और सब बैठे हूए लोगोंके सामने मेरे फैलाए हूए हाथपर थमा दी.

भिखारीयोंसे बचनेके लिए मै बगल के एक स्टॉल पर गया. वहां सामने एक शायद किसी खाने के चीज का पाकीट लटका हूवा था. उस पर लिखा हूवा था "अब पहले से बढिया स्वाद में'. स्वाद और वह भी बढीयां. मेरे मुंह मे पाणी आ गया . मैने पुछा "क्या है?'. उसने रुखे स्वर में कहां "कुत्ते का बिस्कीट' मेरे मुंह का पाणी उल्टे पांव लौट गया . कुत्ते का बिस्कुट ... अब पहले से बढिया स्वाद में. अब इसके पहले के स्वाद में और अब के स्वाद में फर्क है या नही ये देखनेके लिये या तो आदमी को कुत्ता बनना पडेगा. ... या फिर कुत्तेको पढना लिखना सिखना पडेगा

" अजी सुनीये ... गाडी आ गई... नही तो हमेशा की तरह...' श्रीमतीजीकी आवाज आया. उसने आगे भी कुछ कहां.. वह मुझे सुनाई दिया नही ऐसा नही... बल्की वह मैने जानबुझकर सुना नही ... हमेशा की तरह... आदत के अनुसार.
 
marketing-3

आज ऑफिस जाने के लिए घरसे थोडा जल्दीही बाहर निकला. लेकीन एक आफत से छुटकारा पाओ तो वह दुसरा रुप अख्तीयार लेती है ... इसका मुझे थोडीही देरमें साक्षात्कार हूवा. बस आने के लिए आधा घंटा बाकी था. अब क्या किया जाए? सोचते सोचते याद आगया ...

" टाईम पास करने के लिए मार्केटिंगसे अच्छा दुसरा कोई तरीका नही ... कुछ खरीदने की जरुरत नही ... सिर्फ पूछ ताछ करते रहो ' किसी प्रसिध्द लेखक ने एक किताब मे लिख रखा है.

फिर क्या अगल बगल में देखा. बिना कुछ सोचे मै एक दुकान मे घुस गया. दुकानमालीक ने बडी मुस्कुराहट के साथ मेरा स्वागत किया. वहां लटकी हूई चिजे मै देखने लगा. लेकिन बहुत देर से सिर्फ मै चीजे निहार रहा हू ये देखकर उस दुकानमालीक की मुस्कुराहट ने अपना उग्र रुप अख्तीयार लिया.

" क्या चाहिये साब?' उसने पुछा.

फिरभी मै उसकी तरफ ध्यान नही दे रहा हू यह देखकर वह बोला " जल्दी बोलो साब ... सुबह सुबह टाईम खोटा मत करो'.

अब पाणी सर से उपर नही जाना चाहिए इसलिये मैने वहां लटके एक छातेका सहारा लिया.

" कितनेका है ?' मैने उस छाते को छूकर पुछा.

" दो सौ रुपए ...' उसने कहा

मैने अब छाता हाथ में लेकर निहारना शुरु किया. दुकान मालीक अंदर चला गया और उसके जगह उसका नौकर आकर खडा होगया.

मैने उस नौकर से पुछा " इसमें वे अलग-अलग रंग के होते है ना?'

कुछ ना बोलते हूए वह स्वयंचलीत खिलौने जैसा अंदर गया और चार पांच रंग के छाते ले आया.

मैने कहा "लेकिन इसपर सफेद रंग का डिजाईन भी होता है?'

" हां होता है ... लेकिन हमारे पास का वह माल खतम हो गया है' नौकरने कहा.

मैने चैन की सांस ली. चलो यहांसे खिसकने का यह अच्छा बहाना है.

दुकान से जाने के लिये पलटा तो अंदरसे दुकान मालीक की आवाज आई " क्यों क्या हूवा?'

मैने कहा, " मुझे नीले कलर का ... उसपर सफेद डिजाईनवाला छाता चाहिए था... लेकिन आपके यहां नहीं है शायद'

" कौन बोलता है नही है...' वह नौकर पे चिल्लाया. लेकिन नौकर वहां नही था. वह शायद अंदर गया था.

उसने नौकर को आवाज दिया, " टॉमी...'

पता नही इतने देरमे नौकर कहां गायब हो गया था.

उसने गुस्से से नौकर को आवाज दिया " कहा मर गया ... टॉमी...'

गलीमें घुमता हुवा एक आवारा कुत्ता दौडते हूये वहां आगया.

कुत्ते को देखकर तो दुकान मालीकको और गुस्सा आगया.

उसने वहां बैठे हूवे दूसरे एक लडके को पास बुलाया. शायद वह उसका नया ट्रेनी नौकर था.

" बगल के दूकानसे ब्लू कलरके और सफेद डिजाईनवाले चार पाच पीस लेके आना ... जल्दी' मालीकने आदेश दिया. वह लडका हिंन्दी मे शायद थोडा कच्चा था. इसका ज्ञान हमें थोडी ही देर में हूवा. उसको दूकान मालीकने जो भी कहा बराबर समझमें नही आया. लेकिन गुस्साये हूवे दूकान मालीकसे पुछनेकी उसकी हिम्मत नही बनी. वह भागते हूए वहांसे दो चार दूकान छोडके चला गया. उसको वहां एक सलून की दूकान दिखाई दी. उसने अपना दिमाग लगाया " बगल की दूकान यानी... बगल साफ करने की सलून की दूकान. उसको डाउट आया भी की यहां छाते कैसे होंगे. लेकिन मालिकने कहां तो जरुर होंगे. वह अंदर चला गया. अब उसने सलूनवालेसे छाते मांगने के बाद क्या हूवा होगा इसकी कल्पना ना करना ही अच्छा है. यह सब कहानी नौकरने वापस आकर जब अपना दाया गाल सहलाते हूए हमें बताई तब हमें मालूम पडी . इतनेमें दौडते हूवे वह पहलावाला नौकर वहां आगया.

" ... कहा मर गया था कुत्ते ...'

इतनी देर से जो दुकान मालीक को बडी आशा से निहार रहा था वह कुत्ता ... दूम दबाकर भाग गया.

" वो शर्माजीके दुकानसे ब्लू कलर के और सफेद डिजाईनवाले चार पांच पिस लेके आ ...' कहते हूवे मालीकने उसे दौडाया. नौकर दौडता हूवा चला गया. मै अब वहां से खिसकनेका दूसरा बहाना ढूंढने लगा. मैने कहा, " अगर टाईम लगता है तो रहने दो .. मै बादमे कभी आउंगा...वैसेभी बारीश को अभी बहुत टाईम है'

" टाईम कायका साब ... दो मिनट का काम है' उसने लगभग मेरी कलाई पकडते हूवे कहा. अब तो भागनेकाभी चांन्स नही था. वह नौकर दौडते हूये छाते लेकर आया. उसने सब छाते मेरे सामने रखे टेबलपर पटके. मुझे यकिन हैकी उसने पटकते वक्त उस टेबल को जरुर मेरा सर समझा होगा... और छातोंके बंडल को उस दुकान मालीक का सर. उसमें से एक लेकर मैने पुछा " ये कितने का है'

उसने वह छाता उलट पुलटकर देखा. एक जगह कुछ तो लिखा हूवा था. उसके साथ मै भी पढने की कोशीश करने लगा. एक जगह कुछ 1625 ऐसा लिखा हूवा देखकर तो मेरी धडकन ही तेज होगई.

" ढाईसौ रुपए..' दुकान मालिकने झट से कहां.

मै गौर करके देखने लगा की ढाईसौ कहां लिखा है. ढाईसौ कही भी नही लिखा था. फिर मै मन ही मन 1625 को 2 से 3 से 4 से डीव्हाईड करने की कोशीश करने लगा . जितनी मुझे आती थी उतनी सारी गणीती प्रक्रीयायें मैने 1625 पर करके देखी . लेकिन किसी भी सुरतमें ढाईसौ आने का नाम नही ले रहा था. शायद मेराही णीत कच्चा हो. इतनेमें एक दुसरे कस्टमर से दुकान मालीक का ध्यान बंट गया तो मै उस छाते को वहां वैसा ही रखकर वहांसे खिसकने लगा. पिछे से दुकान मालीककी आवाज आई "अब क्या हूवा?'

मैने जाते जाते पलटकर कहा " महंगा है'

" अरे तो आप बोलीये ना आपको कितने में चाहिये ' उसने कहां.

" जाने दो .. मुझे लेना ही नही' मेरे मुंह से निकल गया.

ये सुनते ही दुकान मालीक आग बबुला हो गया. वह गुस्से से बोला " अरे ऐसे कैसे लेने का नही...

... इतनी देर से हमारा टाईम खाया ... और अब बोलता है लेने का नही... इस दुकान को क्या बगीचा समझ रखा है ... बैठे तो बैठे नही तो चले गए.

मैने फिर अपने आपको संभालते हूए कहा "लेकिन बहुत महंगा है'

" तो तुम बोलो ना कितने मे चाहिए... देखुतो तुम्हारी हैसीयत क्या है?' वह "आप' से "तुम' पर आ गया था.

मैने डरते हूए आजूबाजू देखा. आखिर इज्जत का और हैसीयत का सवाल था.

मैने धिमेसे कहा " पचत्तर मे दो'

बुरासा मुंह बनाकर वह बोला "पचत्तर... रुपए या पैसे'

" पचत्तर रुपए' मेरे गलेसे अटकती हूई आवाज आई. वह गुस्सेसे सब छाते बटोरने लगा. वह आगे कुछ कहकर अपना और अपमान ना कर दे इसलिये मै जाने के लिए मुडा.

" ए रुक... जाता किधर है ... ' वह तुच्छतासे बोला.

" ये ले ... सुबह सुबह बहुनीका टाईम है इसलिए... नही तो पचत्तर रुपएमें इसका डंडा भी नही आता ... वैसे भी हम सुबह आये भिखारी को भी तो खाली जाने नही देते...' ऐसा कहते हूए उसने वह छाता लगभग मेरी ओर फेंक दिया. मैने क्रिकेटर की चपलता से उस छाते को कॅच किया. कॅच भी मैने ही किया और आऊट भी मै ही हुवा था चुपचाप 75 रुपए निकालकर दुकान मालिकके हाथ में थमा दिए और अपने मस्तक का पसीना पोछते हूए दुकान से बाहर निकला. असलमें पसीना पोंछनेसे अपने चेहरेके भाव छिपानेकी जरुरत मुझे ज्यादा महसुस हूई थी. ऍग्रेसीव मार्केटिंग किसे कहते है वह आज मुझे अच्छी तरह से समझ में आया था.
 
marketing-4

उस दुकान से बाहर निकलते वक्त बाहर सामने एक जुते की दुकान दिखी. वहां बोर्ड लगा था "एक के उपर एक फ्री' . अब दायें जुते के उपर बाया जूता फ्री ... या फिर बाये जूते के उपर दाया जुता फ्रि... या फिर एक पेअर के साथ दूसरी पेअर फ्री...ये उस दुकान मालिक को पुछने की मेरी प्रबल इच्छा हूई. लेकिन अभी अभी आये ताजा अनुभवसे मेरी उस दुकान में जानेकी हिम्मत नही बनी.

रस्तेसे जाते हूए अपनी झेंप छीपाने के लिये उस छाते को कभी जेबमें तो कभी कॉलर मे लटकाने की कोशीश करने लगा. गले मे लटकाते हूए एक विचार मेरे मन मे आया ... अरे यह तो जबरदस्ती गले पडा हूवा छाता है इसको और गले मे लटकाने की क्या जरुरत.

अनायास ही एक पतली गलीमें मेरा ध्यान गया. वहां कोने मे उस दिन मिला अंधा, लंगडा भिखारी मस्त खडा होकर सिगार पीता हूवा दिखाई दिया. इसका मतलब वह लंगडा नही था और शायद अंधा भी नही था. मुझे तो विश्वास ही नही हो रहा था. उसने हम सबको उल्लू बनाया था. उल्लू सी सुरत लेकर मै थोडा और आगे निकल गया . वहां रस्तेके किनारे लोगोंकी भीड जमा हूई थी. कभी कभी भीड ऐसे ही जमा हो जाती है. दो लोग जमा हो जाते है. वे दो क्यों जमा हूए ये देखने के लिये और तिन जाते है...और तिन के पिछे और छे... ऐसे मै भी भीड मे घुस गया... देखता हू तो उस दिन मिला दुसरा भिखारी जो "मेरी मां बिमार है' कहकर भिख मांग रहा था .. वह किसी वृध्द महिला का सर अपने गोद में लेकर जोर जोर से रो रहा था. वह महिला मर गई थी ... शायद उसकी मां थी. उस दिन कितनी विवशता से पैसे मांग रहा था बेचारा. उसको कोई समझ नही पाया था ... या फिर वह अपनी जरुरत की ठीक ढंग से मार्केटिंग नही कर पाया था.

इतने मे वह दुसरा झुठा लंगडा अंधा भिखारी लंगडता हूवा वहां आया. उसकी मौके की नजाकत को पहचानने की काबीलीयत तो देखो. झट से उसने एक कॅप उलटी की और लडखडाता हूवा " उसकी मां को जलाने को पैसे दो' करके भीख मांगने लगा ... ही इज अ परफेक्ट मार्केटींग मॅन ... यहां अगर कोई मार्केटिंग के लोग बैठे हो तो माफ कर देना भाई.

मै और मेरी बीवी मार्केटिंग निपटाकर घर लौट रहे थे. उस भिखारी की मां को मरे हूए 7 - 8 दिन हो गए होंगे. तो भी वह चित्र मेरी आंखो के सामनेसे हटते नही हट रहा था. उस झुठे लंगडे अंधे भिखारी ने सबको बेवकुफ बनाया था. जिसे असली जरुरत उसको किसीने भी पैसे नही दिए थे. आज इस भडकीले ऍड्वर्टाइज, भडकिले मार्केटिंग के युग में क्या सचमुछ अपनी समझ खत्म होती जा रही है. मै अपनी सोच में डूबा चला जा रहा था.

" वह कॉफी सेट बहुत ही सुंदर था है न?' मेरी बिवीने मेरी विचारोंकी श्रुंखला को तोडा.

मैभी अपने आप को नॉर्मल बतानेके प्रयास मे मजाक पर उतर आया.

" हां बहुत ही सुंदर था ... लेकिन एक चीज उस कॉफी सेट की सुंदरता बिगाड रही थी...' मैने कहा.

" कौनसी?' मेरी बिवीने पुछा.

" उसपर लगा हुवा प्राईज टॅग' मैने कहा.

थोडी देर अंधेरे मे हम चूपचाप ही चलते रहे.

" उधर देखो ... उधर गलीमें' मेरी पत्नी एक गली की ओर निर्देश करते हूवे बोली.

मैने उत्सुकतावश उस गली मे देखा. जहां उस दिन वह झूठा लंगडा भिखारी मजेसे सिगार पी रहा था. आज वहां दो लोग थे. वह झूठा लंगडा अंधा भिखारी और दूसरा जिसकी मां मरी थी वह. दोनो मजे से मस्त होकर सिगार पी रहे थे. जिसकी मां मर गई थी वह एक हाथ से सिगार पी रहा था और दूसरे हाथ से किसी राजा की तरह पैसे गीन रहा था

.... शायद वह मार्केटिंग सीख गया था.
 
दूर से देखा तो एक सुंदरी के बाल लहरा रहे थे

पास जाकर देखा तो सरदारजी नहा रहे थे.
 
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isme 1 missing hai?
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2 baar padthe ho sharam nahi aati?
ABC me (1 ) kahan ata hai?
 
My Teacher Pointed At Me With A Stick & Said:
"At The End Of This Stick Is An Idiot"
I Still Dont Get Why I Got Rusticated.
I Only Asked Him,
"Which End Sir?"
 
And that's how the fight started

My wife and I were sitting at a table at her high school reunion, and she
kept staring at a drunken man swigging his drink as he sat alone at a nearby table.
I asked her, "Do you know him?"
"Yes", she sighed,
"He's my old boyfriend.... I understand he took to drinking right after we
split up those many years ago, and I hear he hasn't been sober since."
"My God!" I said, "Who would think a person could go on celebrating that long?"
And that's how the fight started...


One year, I decided to buy my mother-in-law a cemetery plot as a Christmas gift...
The next year, I didn't buy her a gift.
When she asked me why, I replied,
"Well, you still haven't used the gift I bought you last year!"
And that's how the fight started.....


My wife and I were watching Who Wants To Be A Millionaire while we were in bed.
I turned to her and said, 'Do you want to have Sex?'
'No,' she answered. I then said,
'Is that your final answer?'
She didn't even look at me this time, simply saying, 'Yes..'
So I said, "Then I'd like to phone a friend."
And that's when the fight started...
 
A woman from Toronto speaking at an International Womens Lib Conference said “My husband and I both work and for over 20 years I have cooked him a meal when I arrived home from work. I thought to myself this is not fair, so I stopped. For 3 days I saw nothing and the on the 4th day I arrived home and my husband had prepared a great meal for both of us. That’s progress.”

A woman from Paris said “I can go better. My husband and I both work and for over 20 years I have cooked him a meal and ironed his clothes when I arrived home from work. I thought to myself this is not fair, so I stopped. For 3 days I saw nothing and the on the 4thday I arrived home and my husband had prepared a great meal and ironed clothes for both of us. That’s progress.”

An Jatni from Rohtak said “I can go even better. My husband and I both work and for over 20 years I have cooked him a meal and ironed his clothes and let him make love to me when I arrived home from work. I thought to myself this is not fair, so I stopped. For 3 days I saw nothing and the on the 4th day I could just about see out of my left eye. That’s progress.”
 
An Jatni from Rohtak said “I can go even better. My husband and I both work and for over 20 years I have cooked him a meal and ironed his clothes and let him make love to me when I arrived home from work. I thought to myself this is not fair, so I stopped. For 3 days I saw nothing and the on the 4th day I could just about see out of my left eye. That’s progress.”

Jatni from Rohtak ki chokhi service ho gi..!!!
chothe din aankhya ki soyi utri..!!!
 
Rajikant did his KG from 7 different places……….
Those 7 places are the present IITs in INDIA.


Rajani went for morning walk.
After 1 hour, the police arrested him.
Why??

Bcos He reached USA without VISA!!


Once Rajani bunked a whole day from school..
Since then that day is Known as Sunday..


Rajnikanth can see himself sleeping..


Rajnikanth once put a bonfire and that place is now known as SAHARA DESERT..!!


The “Rajnikant” award goes to OSCAR!!!


Rajni sentences the judge in the court


He can red-card a soccer match refree.

spelling of rajnikant is "Rajnikant" because there is nothing like RajniCan't


Rajni doesn’t find bugs in any code, because ‘Bugs’ come to watch his movie & they’re caught.. J
They have found ‘Bugs’ in Da Vinci code in similar fashion.. J

Rajnikant can make his girlfriend admit her mistake!..

Rajini’s favourite SQL query...
Select * from ORACLE;


Once Rajnikant Donated blood to a very small, sick and thin child.,
Today that child is known as "The Great Khali".


The pyramids in Egypt are actually ........
.......Rajinikant's primary school crafts project


My cell phone is full of Rajnikanth messages
And now
I don’t need a charger
 
Rajikant did his KG from 7 different places……….
Those 7 places are the present IITs in INDIA.


Rajani went for morning walk.
After 1 hour, the police arrested him.
Why??

Bcos He reached USA without VISA!!


Once Rajani bunked a whole day from school..
Since then that day is Known as Sunday..


Rajnikanth can see himself sleeping..


Rajnikanth once put a bonfire and that place is now known as SAHARA DESERT..!!


The “Rajnikant” award goes to OSCAR!!!


Rajni sentences the judge in the court


He can red-card a soccer match refree.

spelling of rajnikant is "Rajnikant" because there is nothing like RajniCan't


Rajni doesn’t find bugs in any code, because ‘Bugs’ come to watch his movie & they’re caught.. J
They have found ‘Bugs’ in Da Vinci code in similar fashion.. J

Rajnikant can make his girlfriend admit her mistake!..

Rajini’s favourite SQL query...
Select * from ORACLE;


Once Rajnikant Donated blood to a very small, sick and thin child.,
Today that child is known as "The Great Khali".


The pyramids in Egypt are actually ........
.......Rajinikant's primary school crafts project


My cell phone is full of Rajnikanth messages
And now
I don’t need a charger
http://www.citehr.com/300042-rajni-more-n-more.html
 
A husband and wife are shopping in their local Tesco.
The husband picks up a case of Stella and puts it in their trolley

'What do you think you're doing?' asks the wife.
'They're on sale, only £7.50 for 24 cans he replies.
'Put them back, we can't afford them’ demands the wife, and so they carry on shopping.
A few aisles further on along the woman picks up a £15 jar of face cream and puts it in the trolley.
What do you think you're doing?' asks the husband.
'It’s my face cream. It makes me look beautiful,' replies the wife.
Her husband retorts: 'So do 24 cans of Stella and they’re half the price
 
A husband and wife are shopping in their local Tesco.
The husband picks up a case of Stella and puts it in their trolley

'What do you think you're doing?' asks the wife.
'They're on sale, only £7.50 for 24 cans he replies.
'Put them back, we can't afford them’ demands the wife, and so they carry on shopping.
A few aisles further on along the woman picks up a £15 jar of face cream and puts it in the trolley.
What do you think you're doing?' asks the husband.
'It’s my face cream. It makes me look beautiful,' replies the wife.
Her husband retorts: 'So do 24 cans of Stella and they’re half the price
Then finally what did they purchased?
 
A police officer attempts to stop a car for speeding and the guy gradually increases his speed until he's topping 100 mph. He eventually realizes he can't escape and finally pulls over.

The cop approaches the car and says, "It's been a long day and my tour is almost over, so if you can give me a good excuse for your behavior, I'll let you go."

The guy thinks for a few seconds and then says, "My wife ran away with a cop about a week ago. I thought you might be that officer trying to give her back!"
 
2 Monks and a Pretty Lady


Once upon a time a big monk and a little monk were traveling together. They came to the bank of a river and found the bridge was damaged. They had to wade across the river.

There was a pretty lady who was stuck at the damaged bridge and couldn't cross the river.

The big monk offered to carry her across the river on his back to which the lady accepted.

The little monk was shocked by the move of the big monk and was thinking "How can big brother carry a lady when we are supposed to avoid all intimacy with females?" But he kept quiet.

The big monk carried the lady across the river and the small monk followed unhappily. When they crossed the river, the big monk let the lady down and they parted ways with her.

All along the way for several miles, the little monk was very unhappy with the act of the big monk. He was making up all kinds of accusations about big monk in his head. This got him madder and madder. But he still kept quiet. And the big monk had no inclination to explain his situation.

Finally, at a rest point many hours later, the little monk could not stand it any further, he burst out angrily at the big monk. "How can you claim yourself a devout monk, when you seize the first opportunity to touch a female, especially when she is very pretty?"

All your teachings to me make you a big hypocrite.

The big monk looked surprised and said, "I had put down the pretty lady at the river bank many hours ago, how come you are still carrying her along?"

Moral: This very old Chinese Zen story reflects the thinking of many people today. We encounter many unpleasant things in our life, they irritate us and they make us angry. But like the little monk, we are not willing to let them go away. There is no point in remaining hurt by the unpleasant event after it is over. Learn to move on in life!
 
The 2 Wolves


One evening an old Cherokee told his grandson about a battle that goes on inside people.

He said, "My son, the battle is between two wolves inside us all.

"One is Evil - It is anger, envy, jealousy, sorrow, regret, greed, arrogance, self-pity, guilt, resentment, inferiority, lies, false pride, superiority, and ego.

"The other is Good - It is joy, peace, love, hope, serenity, humility, kindness, benevolence, empathy, generosity, truth, compassion and faith."

The grandson thought about it for a minute and then asked his grandfather: "Which wolf wins?"

The old Cherokee simply replied, "The one you feed."
 
ओ भाई रै, राक्के तो मोड्डा हो लिया...
बोलो राक्के महाराज की...
जय...

@Rakke
टी-शर्ट पहरणिया मोड्डा पहली बै ए देख्या...
 
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