इस दुनिया के हर देश में हर समय एक ही विचारधारा के लोग नहीं होते। बहुत से लोग ऐसे होते हैं, जिनकी सोच होती है कि देश या धर्म के साथ जो भी हो, उन्हें क्या? बस उनका भला होना चाहिए। जबकि बहुत से लोगों की सोच होती है कि देश-धर्म के प्रति भी उनकी कुछ जिम्मेदारी है। जयचंद पहली सोच का था, जबकि पृथ्वीराज चौहान दूसरी सोच का। जिस समय देश का बंटवारा हुआ, उस समय पाकिस्तान के सभी लोग इससे खुश थे, ऐसा नहीं था। जिस सोच के लोग ज्यादा प्रभावी होते हैं, वे जीत जाते हैं।
जाट एक प्रतिष्ठित कौम है, लेकिन उसमें भी पहली सोच के लोगों का होना स्वाभाविक ही है, क्योंकि हर किसी के साथ एक जैसे हालात नहीं बनते। इसके लिए उनकी अज्ञानता भी बहुत जिम्मेदार है। उन्हें बताया जाता है कि वे जाट सूरमा हैं, यदि वे खेती करना छोड़ दें तो देश भूखा मर जाएगा और यदि वे सैनिक न बनें तो देश गुलाम बन जाएगा। उन्हें कोई बताए कि ऐसी डींगें अधिकतर जातियां हांकती हैं। सिख कहते हैं कि वे देश और हिंदुओं को बचाए हुए हैं, राजपूत कहते हैं कि उनकी वजह से देश बचा हुआ है। ऐसे ही दावे दूसरी जातियां करती हैं। मैं हैरान तो तब हुआ, जब एक मौके पर एक बिहार वाला यह कह रहा था कि जब करगिल जैसी स्थिति बनती है तो बिहार रेजिमेंट को सबसे आगे कर दिया जाता है। वास्तविकता यह है कि इनमें से किसी एक के दम पर हरगिज देश नहीं चल रहा, बल्कि परस्पर सहयोग से चल रहा है। यदि जाट गेंहू, धान, गन्ना इत्यादि न उपजाएं या सेना में भर्ती होना छोड़ दें तो देश तो किसी न किसी तरह चलता रहेगा, लेकिन जाट जरूर परेशान हो जाएंगे।
हरियाणा में जो हुआ, वह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन इसकी भूमिका तो बहुत पहले से बन रही थी। भगाणा, मिर्चपुर, गोहाना की घटनाएं मीडिया ने बढ़ा-चढ़ाकर उछालीं और वहां से जाटों के खिलाफ माहौल बनना शुरू हुआ। तब भाजपा को वहां पैठ बनाने का मौका मिला। जाट उस स्थिति से निपट सकते थे, लेकिन उनमें से कुछ तो पहली सोच वाले सूरमा थे। इससे यह खाई बढ़ती ही गई और आरक्षण आंदोलन में वे सब 35 बिरादरियां जाटों के खिलाफ लामबंद हो गईं। यदि जाट कुछ ऐसा करें, जिससे उन 35 बिरादरियों का विश्वास जाटों पर लौटे तो अब जाटों का हरियाणा में कोई भविष्य है, नहीं तो चाहे वे मुसलमान बन लें, चाहे कुछ और, सत्ता में तो शायद ही कभी लौट पाएंगे। उनका गेंहू-धान फिर औने-पौने दामों पर खरीदा जाएगा। इसके अलावा भी कई और किस्म की मुसीबतें उनके लिए बढ़ जाएंगी। कुछ जाट सोचते हैं कि जैसे सिख पंजाब में मजबूत हैं, वैसे ही वे हरियाणा में मजबूत हैं। वास्तविकता यह है कि पंजाब में सिख (एक धर्म के लोग) मजबूत हैं लगभग 60 % के संख्या बल के साथ, न कि 20-25 % जट्ट। हरियाणा में जाट 25-28 % ही हैं और बाकी सब उनके खिलाफ हैं, इस बात को दिमाग में बिठाए रखना होगा। वे अभी तक हिंदुओं के साथ रहे तो हिंदुओं ने भी उन्हें लगातार सत्ता में बनाए रखा और उन्हें खूब सम्मान दिया, लेकिन वे मुसलमान बनेंगे तो फिर न तो देश पर कोई खास फर्क पड़ने वाला, न धर्म पर, लेकिन जाटों पर जरूर पड़ेगा। उन पर जो झूठे मुकदमे लगे हैं, वे इस धमकी से हट जाएंगे, ऐसा लगता तो नहीं, क्योंकि पुलिस में और अन्य पदों पर भी पहली सोच वाले लोगों की कोई कमी नहीं है।
किसी को कोई बात बुरी लगी हो तो क्षमा करें।