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(This post is in Devanagari script. If there is difficulty in reading the text, there is need to install ‘Mangal’ font.)
टैक्नालजी की बातें तो बहुत हो रही हैं । चलो, आपको झज्जर तहसील में ले चलता हूं - देखो एक छोटा सा नजारा - ठेठ हरयाणवी भाषा में बातचीत । जिनको हरयाणवी नहीं आती, वे माफ करें ।
हरयाणा सरकार एक नहर का निर्माण करने वाली है - SEZ Water Supply Canal. यह नहर कुंडली-मानेसर एक्सप्रैस-वे से थोडी ही दूर, समानान्तर दूरी पर गुजरेगी । और रोहतक-झज्जर-रेवाड़ी रेलवे लाइन का काम भी चल रहा है । जिनकी जमीनें इन स्कीमों के लिए अधिगृहीत की गई हैं, उनको मुआवजा दिया जा रहा है । हाल ही में कुछ गावों के आदमी झज्जर तहसील में जमा थे - अपना-अपना 'चेक' लेने के लिये । पेश है जनवरी 2008 के पहले हफ्ते का एक सीन ।
स्थान - झज्जर तहसील - नया कार्यालय (गुड़गांव रोड) - तीसरी मंजिल की कैंटीन । चार आदमी बैठे चाय पी रहे हैं ।
(सभी नाम काल्पनिक हैं)
धर्मवीर - गांव दुल्हेड़ा
सतबीर - गांव गोयला कलां
रामफळ - गांव मात्तिन
फतेह सिंह (फत्ते) - गांव बरहाणा (एक बुजुर्ग आदमी)
.....
फत्ते - अरै छोरो, तुम सारे हाड़ै किस काम तैं आये सो ?
धर्मवीर - ताऊ, मैं तै सूं दुल्हेड़े का, यो रामफळ भाई सै मात्तिण का, अर यो सतबीर गोळे का । म्हारी जमीन म्हां-कै एक नहर लिकड़ैगी - उसके मुआवजे खातिर बैठे सां ।
फत्ते – नहर? अरै भाई, इस इलाके की धरती तै बिक्कण लाग रही सै, बड्डे लाला अर रिलायंस आळे खरीदण लाग रहे सैं । या सरकार एक नई नहर काढ़ कै के करैगी ?
रामफळ - ताऊ, या नहर खेतां ताहीं ना काढ़ते, आगै गुड़गामे कान्नी घणी-ऐं फैक्टरी बणैंगी, जमीन का मुआवजा बी मिल लिया, ऊड़ै वाटर-सप्लाई करण ताहीं बणाई जावैगी या नहर, भरी चाल्या करैगी ।
फत्ते - वाह भाई वाह, या तै नई-ए बात सुणी । मैं तै न्यूं सोचूं था अक तुम गुड्ढा-लकड़िया के होगे - रेलवे लाइन का मुआवजा लेण आये होगे । म्हारे एक कीले के बिचाळे कै रेलवे लाइन लिकड़ैगी - मुश्किल तैं आधे कीले का मुआवजा मिल्लैगा, थोड़ी-थोड़ी धरती लाइन के दोनूं तरफ बच ज्यागी, उसका के करांगे - इस तैं तै आच्छया या सरकार पूरे कीले का ऐ मुआवजा दे देती ।
सतबीर - पर ताऊ, थारे गाम की जमीन रेलवे-लाइन में क्यूकर आ-गी ? थारा गाम तै डीघल तैं नीचे नै, सांपले कान्नी हो-ग्या । मैं तैं सोचूं था अक तू डीघल का होगा ।
फत्ते - भाई, म्हारे बुरे दिन आ लिये, न्यूं सोच ल्यो । या रेलवे लाइन अस्थल-बोहर धोरै दिल्ली आळी लाइन में मिल्लैगी । म्हारे गाम का एक सिमाणा सै डीघल तैं लागता - उस म्हां कै जावैगी । बता, म्हारै के काम आवैगी या रेल ? सांपले का स्टेशन कुण-सा घणी दूर सै म्हारे गाम तैं ? या लाइन लिकड़े पाच्छै दोनूं ओड़ की जमीन नै फैक्टरियां आळे खरीद लेंगे, जमींदारा तै समझो खतम हो-ज्यागा बीस साल में ।
धर्मवीर -ताऊ, म्हारै तै पहल्यां ऐं खतम हो लेगा जमींदारा । दुल्हेड़े अर बुपणिया-डाबोदे कै बिचाळै एक बड्डा हाई-वे लिकड़ण लाग रहया सै - एक-बै वो चालू हो ज्यागा तै उसके दोनूं ओड़ की धरती नै बी ये लाला खरीद लेंगे अर म्हारे केस्से उनकी नौकरी करया करैंगे । म्हारै धोरै तै कुल दो कीले जमीन थी । यो आधा कीला तै इस नहर नै खा लिया । या नहर लिकड़े पाछै बाकी आधे कीले मैं खेती-वेती कुछ ना हो - के तै ऊड़ै घर बण ज्यांगे, ना तै छोटी-मोटी फैक्टरी खुल ज्यांगी ।
फत्ते -भाई, ये झज्जर आळे घणे उछळ रहे थे - अक यो नया जिला तै बण-ग्या, म्हारै रेल तै सै ए ना । ईब ले लियो इस रेल का स्वाद । बेरा ना के मिल्लैगा रेल की लाइन बणवा कै ? रोहतक, बहादुरगढ़, सांपला, रेवाड़ी के स्टेशन किमैं घणी दूर सैं झज्जर तैं ? आच्छे-भले बैठे थे आराम तैं । ईब रेल लाइन धोरै झुग्गी बस्तियां आळे खुल्ले में हाग्गैंगे जिब देखियो थारै ऊपर के गुजरैगी । खामखां आपणे इलाके का नाश करवा रहे सैं । अर मैं न्यूं सोचूं सूं अक इस नई नहर में पाणी कड़े-तैं आवैगा ? पाणी पै तै लठ बाजण लाग रहया सै ।
रामफळ -ताऊ, बड्डे लाले आ-गे, पच्चीस हजार कीले जमीन खरीद ली गुड़गामे जिले में । या सरकार उनकी फैक्टरियां ताहीं तै पाणी जरूर देवैगी ।
फत्ते -चोखा भाई, ईब तै इन पईसे आळ्यां का ए राज आवैगा, हामनै कूण बूझै सै ?
धर्मवीर -शुक्र सै ताऊ, मुआवजा तै आच्छ्या मिल्लण लाग रहया सै - एक कीले के बीस-बाईस लाख रुपय्ये मिल ज्यावैं सैं ।
फत्ते – अरै, इन रुपय्यां नै के चाटोगे? दो-चार साल ऐश कर ल्यो । फेर थारा हाल वो ए हो ज्यागा जो दिल्ली के गामां का हो रहया सै ।ठीक सै भाई, मैं तै एक-बै नीचै जाऊं सूं - गाम के कई आदमी आ रहे सैं ।
सतबीर -ठीक सै ताऊ, हाम बी आवां सां थोड़ी हाण में, आज तै सांझ हो-ज्यागी, ईबै तै इनका बड्डा अफसर ना आया सै जिसनै चैक पै दस्तखत करणे सैं ।
(ताऊ फत्ते बाहर जाता है)
....continued
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टैक्नालजी की बातें तो बहुत हो रही हैं । चलो, आपको झज्जर तहसील में ले चलता हूं - देखो एक छोटा सा नजारा - ठेठ हरयाणवी भाषा में बातचीत । जिनको हरयाणवी नहीं आती, वे माफ करें ।
हरयाणा सरकार एक नहर का निर्माण करने वाली है - SEZ Water Supply Canal. यह नहर कुंडली-मानेसर एक्सप्रैस-वे से थोडी ही दूर, समानान्तर दूरी पर गुजरेगी । और रोहतक-झज्जर-रेवाड़ी रेलवे लाइन का काम भी चल रहा है । जिनकी जमीनें इन स्कीमों के लिए अधिगृहीत की गई हैं, उनको मुआवजा दिया जा रहा है । हाल ही में कुछ गावों के आदमी झज्जर तहसील में जमा थे - अपना-अपना 'चेक' लेने के लिये । पेश है जनवरी 2008 के पहले हफ्ते का एक सीन ।
स्थान - झज्जर तहसील - नया कार्यालय (गुड़गांव रोड) - तीसरी मंजिल की कैंटीन । चार आदमी बैठे चाय पी रहे हैं ।
(सभी नाम काल्पनिक हैं)
धर्मवीर - गांव दुल्हेड़ा
सतबीर - गांव गोयला कलां
रामफळ - गांव मात्तिन
फतेह सिंह (फत्ते) - गांव बरहाणा (एक बुजुर्ग आदमी)
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फत्ते - अरै छोरो, तुम सारे हाड़ै किस काम तैं आये सो ?
धर्मवीर - ताऊ, मैं तै सूं दुल्हेड़े का, यो रामफळ भाई सै मात्तिण का, अर यो सतबीर गोळे का । म्हारी जमीन म्हां-कै एक नहर लिकड़ैगी - उसके मुआवजे खातिर बैठे सां ।
फत्ते – नहर? अरै भाई, इस इलाके की धरती तै बिक्कण लाग रही सै, बड्डे लाला अर रिलायंस आळे खरीदण लाग रहे सैं । या सरकार एक नई नहर काढ़ कै के करैगी ?
रामफळ - ताऊ, या नहर खेतां ताहीं ना काढ़ते, आगै गुड़गामे कान्नी घणी-ऐं फैक्टरी बणैंगी, जमीन का मुआवजा बी मिल लिया, ऊड़ै वाटर-सप्लाई करण ताहीं बणाई जावैगी या नहर, भरी चाल्या करैगी ।
फत्ते - वाह भाई वाह, या तै नई-ए बात सुणी । मैं तै न्यूं सोचूं था अक तुम गुड्ढा-लकड़िया के होगे - रेलवे लाइन का मुआवजा लेण आये होगे । म्हारे एक कीले के बिचाळे कै रेलवे लाइन लिकड़ैगी - मुश्किल तैं आधे कीले का मुआवजा मिल्लैगा, थोड़ी-थोड़ी धरती लाइन के दोनूं तरफ बच ज्यागी, उसका के करांगे - इस तैं तै आच्छया या सरकार पूरे कीले का ऐ मुआवजा दे देती ।
सतबीर - पर ताऊ, थारे गाम की जमीन रेलवे-लाइन में क्यूकर आ-गी ? थारा गाम तै डीघल तैं नीचे नै, सांपले कान्नी हो-ग्या । मैं तैं सोचूं था अक तू डीघल का होगा ।
फत्ते - भाई, म्हारे बुरे दिन आ लिये, न्यूं सोच ल्यो । या रेलवे लाइन अस्थल-बोहर धोरै दिल्ली आळी लाइन में मिल्लैगी । म्हारे गाम का एक सिमाणा सै डीघल तैं लागता - उस म्हां कै जावैगी । बता, म्हारै के काम आवैगी या रेल ? सांपले का स्टेशन कुण-सा घणी दूर सै म्हारे गाम तैं ? या लाइन लिकड़े पाच्छै दोनूं ओड़ की जमीन नै फैक्टरियां आळे खरीद लेंगे, जमींदारा तै समझो खतम हो-ज्यागा बीस साल में ।
धर्मवीर -ताऊ, म्हारै तै पहल्यां ऐं खतम हो लेगा जमींदारा । दुल्हेड़े अर बुपणिया-डाबोदे कै बिचाळै एक बड्डा हाई-वे लिकड़ण लाग रहया सै - एक-बै वो चालू हो ज्यागा तै उसके दोनूं ओड़ की धरती नै बी ये लाला खरीद लेंगे अर म्हारे केस्से उनकी नौकरी करया करैंगे । म्हारै धोरै तै कुल दो कीले जमीन थी । यो आधा कीला तै इस नहर नै खा लिया । या नहर लिकड़े पाछै बाकी आधे कीले मैं खेती-वेती कुछ ना हो - के तै ऊड़ै घर बण ज्यांगे, ना तै छोटी-मोटी फैक्टरी खुल ज्यांगी ।
फत्ते -भाई, ये झज्जर आळे घणे उछळ रहे थे - अक यो नया जिला तै बण-ग्या, म्हारै रेल तै सै ए ना । ईब ले लियो इस रेल का स्वाद । बेरा ना के मिल्लैगा रेल की लाइन बणवा कै ? रोहतक, बहादुरगढ़, सांपला, रेवाड़ी के स्टेशन किमैं घणी दूर सैं झज्जर तैं ? आच्छे-भले बैठे थे आराम तैं । ईब रेल लाइन धोरै झुग्गी बस्तियां आळे खुल्ले में हाग्गैंगे जिब देखियो थारै ऊपर के गुजरैगी । खामखां आपणे इलाके का नाश करवा रहे सैं । अर मैं न्यूं सोचूं सूं अक इस नई नहर में पाणी कड़े-तैं आवैगा ? पाणी पै तै लठ बाजण लाग रहया सै ।
रामफळ -ताऊ, बड्डे लाले आ-गे, पच्चीस हजार कीले जमीन खरीद ली गुड़गामे जिले में । या सरकार उनकी फैक्टरियां ताहीं तै पाणी जरूर देवैगी ।
फत्ते -चोखा भाई, ईब तै इन पईसे आळ्यां का ए राज आवैगा, हामनै कूण बूझै सै ?
धर्मवीर -शुक्र सै ताऊ, मुआवजा तै आच्छ्या मिल्लण लाग रहया सै - एक कीले के बीस-बाईस लाख रुपय्ये मिल ज्यावैं सैं ।
फत्ते – अरै, इन रुपय्यां नै के चाटोगे? दो-चार साल ऐश कर ल्यो । फेर थारा हाल वो ए हो ज्यागा जो दिल्ली के गामां का हो रहया सै ।ठीक सै भाई, मैं तै एक-बै नीचै जाऊं सूं - गाम के कई आदमी आ रहे सैं ।
सतबीर -ठीक सै ताऊ, हाम बी आवां सां थोड़ी हाण में, आज तै सांझ हो-ज्यागी, ईबै तै इनका बड्डा अफसर ना आया सै जिसनै चैक पै दस्तखत करणे सैं ।
(ताऊ फत्ते बाहर जाता है)
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